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भूखंड बंधक व्यवस्था पर बिल्डरों ने जताई आपत्ति

Sat, 18 Jan 2020 01:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2020 01:39 AM IST
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Builders objected to the land mortgage arrangement
भूखंड बंधक व्यवस्था पर बिल्डरों ने जताई आपत्ति
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मेरठ। रियल एस्टेट डेवलेपर एसोसिएशन ने भूखंड बंधक व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे खत्म करने की मांग की। उन्होंने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को पत्र लिखकर इस पर विचार करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि रेरा एक्ट आने के बाद निर्माणकर्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गर्ग और महामंत्री कमल ठाकुर की ओर से प्रमुख सचिव को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया कि आवासीय तलपट मानचित्र (फ्लैट का नक्शा) स्वीकृत कराते समय 20 प्रतिशत बिक्री योग्य भूखंडों को मेरठ विकास प्राधिकरण के पक्ष में बंधक रखने का प्रावधान है। निर्माणकर्ता द्वारा विकास कार्य पूर्ण करने के बाद उन बंधक भूखंडों को मुक्त करा लिया जाता है। आवंटियों के लिहाज से यह व्यवस्था बनाई गई थी। अब जब रेरा एक्ट लागू हो चुका है तो निर्माणकर्ता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। रेरा के अंतर्गत भूखंडों को विक्रय करने से जो राशि प्राप्त होती है, उसका 70 प्रतिशत निर्माणकर्ता को नामित खाते में रखना होता है। आवंटियों के लिहाज से यह व्यवस्था भी ठीक है, लेकिन इसके बाद निर्माणकर्ता की कुल 90 प्रतिशत धनराशि बंधक/रिजर्व हो जाती है। इसका प्रभाव प्रोजेक्ट की वित्तीय व्यवस्था पर पड़ता है। कहीं न कहीं सरकार की प्रोजेक्ट को निर्धारित समयावधि में पूरा कराने की योजना भी प्रभावित हो रही है। इस लिहाज से भूखंड बंधक रखने की व्यवस्था समाप्त करने पर विचार करना जरूरी है। इसके अलावा एसोसिएशन ने ईडब्ल्यूएस/एलआईजी भवनों के निर्माण में सामने आ रही कठिनाइयों को लेकर भी पत्र लिखा है। महासचिव कमल ठाकुर ने बताया कि निर्माणकर्ता मानचित्र स्वीकृत करता है तो प्रस्तावित कुल भवन ईडब्ल्यूएस 10 प्रतिशत और एलआईजी 10 प्रतिशत भवनों का निर्माण निर्माणकर्ता ही करता है। 40 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल के तलपट मानचित्र को स्वीकृति के समय ईडब्ल्यूएस/एलआईजी भवनों के निर्माण न कर शेल्टर फीस (आश्रय शुल्क) का भुगतान भी किया जा सकता है। यह भवन पांच किलोमीटर की परिधि में कहीं भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन 40 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल से ऊपर के भवन उसी स्थान पर बनाने अनिवार्य हैं। व्यवहारिक कठिनाइयों को खत्म करने के लिए 40 हजार की बाध्यता खत्म किया जाना जरूरी है। उन्होंने इसे एक लाख वर्गमीटर कराए जाने की बात कही।
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