गजब का जुनून: बीटेक के छात्रों ने कर दिखाया कमाल, चंद माह में बन गए कंपनी के मालिक
बीटेक के छात्रों ने ऐसा कमाल कर दिखाया है कि चंद महीनों में उनके काम का टर्न ओवर सात लाख रुपये पहुंच गया है। वे कंपनी के मालिक भी बन गए है।
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जल बचाने के जुनून ने बीटेक के छात्रों को कंपनी का मालिक बना दिया। उनके बनाए वाटर लेवल कंट्रोलर, होम ऑटोमेशन और सिक्योरिटी सिस्टम सस्ते के साथ सुविधाजनक भी हैं। डिमांड बढ़ी तो कई और छात्रों को जोड़ लिया। करीब आठ माह पहले पांच हजार रुपये से शुरू किया काम अब सात लाख के टर्न ओवर तक पहुंच गया है।
मुजफ्फरनगर में 2018 में श्रीराम कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन से बीटेक करने वाले विकास कुलश्रेष्ठ, संचित और संगीत ग्रोवर ने द्वितीय वर्ष से ही पानी बचाने के लिए गैजेट तैयार करने शुरू कर दिए थे। विकास बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में सेमी ऑटोमेटिक वाटर लेवल कंट्रोलर बनाया।
इसे जिला एवं यूनिवर्सिटी स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी में शामिल किया तो यूपीटीयू (उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी) में पांचवां स्थान मिला। बाजार में सेमी ऑटोमेटिक वाटर लेवल कंट्रोलर 900 रुपये तक मिलते हैं, जबकि उनके गैजेट की कीमत 500 रुपये है। इसे टंकी में लगाने पर टैंक भर जाए तो मोटर खुद बंद हो जाती है।
इसके बाद उन्होंने होम ऑटोमेशन तैयार किया जो मोबाइल से कंट्रोल होता है। सबमर्सिबल कंट्रोलर के साथ ही ऑटोमाइजेशन सिक्योरिटी सिस्टम तैयार किया है। जिस घर में यह सिस्टम होगा, वहां किसी व्यक्ति के आने पर तुरंत मोबाइल पर सूचना मिल जाएगी।
बीटेक पूरा होने के बाद उन्होंने कॉलेज के चेयरमैन डॉ. एससी कुलश्रेष्ठ के सहयोग से श्रीराम टेक्नोलॉजी के नाम से कंपनी शुरू की। जुलाई-अगस्त 2019 में पांच हजार रुपये लगाकर गैजेट तैयार किए और उन्हें विभिन्न कंपनियों को बेचा। इसके बाद उनका काम बढ़ता गया और आठ माह में ही उनका टर्न ओवर सात लाख रुपये पहुंच गया है।
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दस छात्रों को दी नौकरी
कंपनी शुरू करने वाले छात्रों ने आईटीआई, पॉलीटेक्निक, बीटेक एवं बीए कर रहे दस छात्रों को अपने साथ जोड़ा। इनमें सौरभ दीक्षित, राजेश, अभिषेक, आकाश, अंकित, सिद्धांत एवं अमित शामिल हैं। इन्हें एक निश्चित वेतन दिया जा रहा है। कुछ छात्र पार्ट टाइम कार्य करते हैं। इनका कार्य गैजेट बनाना, मार्केटिंग करना और टेंडर आदि डालना है।
नगर पालिकाओं में की सप्लाई
श्रीराम टेक्नोलॉजी ने सेमी ऑटोमेटिक वाटर कंट्रोलर और स्ट्रीट लाइट के लिए सेंसर नगर पालिकाओं को सप्लाई किए हैं। अन्य संस्थाओं से भी ऑर्डर लेने के प्रयास में जुटे हैं। विकास ने बताया कि वे अपने गैजेट में अब तक करीब दस बार बदलाव कर चुके हैं। उसे लगातार अपडेट किया जा रहा है। वे अब सिक्योरिटी सिस्टम का पेटेंट कराने के प्रयास में हैं।
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