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बीएसए दफ्तर में कैद बच्चों का ‘भविष्य’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jul 2018 01:23 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जनपद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में कैद हैं। जिन किताबों का स्कूलों में बच्चों को इंतजार है वह किताबें बीएसए कार्यालय के कमरों में भरी पड़ी हैं। नये सत्र का जुलाई माह भी बीतने को है, लेकिन स्कूलों में अभी तक किताबें नहीं पहुंचीं हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों का बुरा हाल है। इस संबंध में अमर उजाला ने मंगलवार अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। किताबें बच्चों तक नहीं पहुंचने के संबंध में बीएसए सत्येंद्र ढाका ने कहा था कि प्रकाशकों से कुछ ही किताबें उपलब्ध हुई हैं। लेकिन जब मंगलवार को अमर उजाला की टीम बीएसए कार्यालय पहुंची तो वहां कमरों में किताबें भरी पड़ी मिलीं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षा के प्रति कितना गंभीर है।
जिले में 930 प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां प्रतिदिन पढ़ने के लिए बच्चे आते तो हैं, लेकिन किताबें न होने के कारण उनको शिक्षा नहीं मिल पा रही है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 432 है, वहां भी स्थिति खरब है। विभागीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि दूसरी बार आई सैकड़ों पुस्तक बीएसए कार्यालय में एक कमरे में भरी हुई हैं। जिन्हें स्कूलों में बच्चों को नहीं बांटा जा रहा है।
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अभी 24 टाइटल की पुस्तकें हमारे पास आई हैं, जिनका सत्यापन किया गया है। एक-दो दिन में बच्चों को स्कूलों में किताबें दे दी जाएंगी। - सतेंद्र ढाका, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों का बुरा हाल है। इस संबंध में अमर उजाला ने मंगलवार अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। किताबें बच्चों तक नहीं पहुंचने के संबंध में बीएसए सत्येंद्र ढाका ने कहा था कि प्रकाशकों से कुछ ही किताबें उपलब्ध हुई हैं। लेकिन जब मंगलवार को अमर उजाला की टीम बीएसए कार्यालय पहुंची तो वहां कमरों में किताबें भरी पड़ी मिलीं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षा के प्रति कितना गंभीर है।
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जिले में 930 प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां प्रतिदिन पढ़ने के लिए बच्चे आते तो हैं, लेकिन किताबें न होने के कारण उनको शिक्षा नहीं मिल पा रही है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 432 है, वहां भी स्थिति खरब है। विभागीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि दूसरी बार आई सैकड़ों पुस्तक बीएसए कार्यालय में एक कमरे में भरी हुई हैं। जिन्हें स्कूलों में बच्चों को नहीं बांटा जा रहा है।
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अभी 24 टाइटल की पुस्तकें हमारे पास आई हैं, जिनका सत्यापन किया गया है। एक-दो दिन में बच्चों को स्कूलों में किताबें दे दी जाएंगी। - सतेंद्र ढाका, बेसिक शिक्षा अधिकारी