अंग्रेजों के कानून जनता के लिए बने फांस: बंदिशें तोड़ नगर निगम में शामिल होना चाहते हैं मेरठ कैंट के बाशिंदे
ब्रिटिश काल के कई कानून चले आ रहे हैं। कई बार कैंट एक्ट में संशोधन भी हुए पर यहां के लोगों को राहत नहीं मिली। कैंट बोर्ड की मंजूरी बिना लोग यहां घर की दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं कर सकते।
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मेरठ कैंट में नया निर्माण तो दूर घर की मरम्मत तक करना भी आसान नहीं है। परिवारों का आकार बढ़ा तो घर में बंटवारा कर दीवार खींचने की भी यहां अनुमति नहीं।
आबूलेन जैसे शानदार बाजार भी कैंट बोर्ड की नजर में अवैध हैं। वेस्ट एंड रोड के अधिकांश बड़े स्कूल हों या फिर आम लोगों के छोटे-छोटे घर, सब मुश्किल में हैं। यहां लोग जमीन के नहीं सिर्फ मलबे के मालिक हैं। यही कारण है कि यहां के लोग कैंट के कानूनों की बंदिशें तोड़कर नगर निगम में शामिल होना चाहते हैं।
मेरठ कैंट बोर्ड की स्थापना वर्ष 1803 में हुई। तभी से यहां ब्रिटिश काल के कई कानून चले आ रहे हैं। कई बार कैंट एक्ट में संशोधन भी हुए पर यहां के लोगों को राहत नहीं मिली। कैंट के लोग चाहते हैं कि यहां का सिविल एरिया नगर निगम में शामिल किया जाए। निगम में शामिल होने के बाद लोगों को यहां कैंट एक्ट की पाबंदियों से मुक्ति की उम्मीद है।
केस 1-रंगसाज मोहल्ला निवासी मधुसूदन गुप्ता 2018 से अपने जर्जर भवन की मरम्मत के लिए कैंट बोर्ड से अनुमति मांग रहे हैं।
केस 2- लालकुर्ती पंतपुरी मैदा मोहल्ला निवासी चंद्रप्रकाश ने मकान की जर्जर छत बदलने के लिए एक अप्रैल 2021 से मंजूरी के इंतजार में हैं।
केस 3- लालकुर्ती घोसी मोहल्ला निवासी असलम मकान टूटी छत और दीवार की मरम्मत के लिए 21 जुलाई 2020 से अनुमति मांग रहे हैं।
केस 4- लालकुर्ती जामुन मोहल्ला निवासी इरफान के घर की जर्जर छत कभी भी छत गिर सकती है। कैंट बोर्ड से मरम्मत की अनुमति नहीं मिल रही।
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मेरठ कैंट
कैंट बोर्ड की स्थापना : 1803
आबादी: एक लाख, छावनी क्षेत्र का कुल रकबा आठ हजार एकड़
सिविल: 478 एकड, 6250 संपत्ति हैं
सिविल क्षेत्र सडक: 63 किमी,सिविल क्षेत्र में 46 बंगले,
डीईओ के अधीन 300 बंगल
इन पेचीदगियों से परेशान हैं लोग
कैंट बोर्ड की मंजूरी बिना घर की दीवारों पर प्लास्टर तक नहीं कर सकते।
प्रापर्टी के विभाजन की कोई अनुमति नहीं।
एक भवन को भागों में बांटने पर नहीं होता नामांतरण।
अगर मकान में बिना अनुमति कोई बदलाव किया तो एक लाख जुर्माना
दस हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगता है भवनों में बदलाव पर जुर्माना।
कैंट एक्ट की नजर में स्कूल से बाजार तक हैं अवैध
कैंट बोर्ड के रिकॉर्ड में आबूलेन रिहायशी इलाका है जबकि यहां मौके पर शहर का सबसे शानदार बाजार है। कैंट एक्ट की नजर में बाजार अवैध है। इसी की आड़ में बार-बार यहां दुकानदारों को नोटिस भी दिए जाते हैं। कारोबारियों का कहना है कि जब यहां बरसों से बाजार हैं तो कैंट बोर्ड इन्हें अपने रिकॉर्ड में दर्ज करे। यही स्थिति वेस्ट एंड रोड के स्कूलों की है।
ढाई हजार लोगों के हुए हस्ताक्षर रक्षामंत्री से मिलने जाएंगे
कैंट बोर्ड में भ्रष्टाचार और यहां रहने वालों के शोषण की वजह से यहां के लोग नगर निगम में शामिल होना चाहते हैं। इसके लिए कैंट के करीब 10 हजार लोग हस्ताक्षर करके केंद्र सरकार को भेजेंगे। अभी तक ढाई हजार लोगों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। सांसद के साथ जल्द ही रक्षामंत्री से भी मिलेंगे। -डॉ. सतीश शर्मा, मनोनीत सदस्य कैंट बोर्ड