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उपद्रव से पावरलूम की खटरपटर बंद
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अहमद नगर में कारीगरों बगैर सूनी पड़ी पावरलूम मशीनें
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मेरठ। बीती 20 दिसंबर को शहर में हुए उपद्रव के बाद से पावरलूम कारोबार ठप पड़ा है। शहर की जिन गलियों से दिनभर खटर पटर की होती रहती थी, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। उपद्रव के बाद से शहर में काम करने वाले अधिकतर पावरलूम कारीगर अपने-अपने घरों को लौट गए हैं। दहशत के चलते कारीगर काम पर लौटने का तैयार नहीं है। ऐसे में लाखों के कारोबार पर ब्रेक लग गया है। माना जा रहा है कि पावरलूम और कंप्यूटराइज कढ़ाई का कारोबार एक दो माह के लिए प्रभावित हो गया है।
महानगर में दस हजार से ज्यादा पावरलूम लगी हैं। इन पर खादी का पकड़ा तैयार किया जाता है। यह कपड़ा देशभर में सप्लाई होता है। कपड़ा बनाने के इस कारोबार में दस हजार से ज्यादा लोग लगे हैं। बताया जा रहा है कि पावरलूम चलाने वालों में अधिकतर लोग बिहार एवं अन्य प्रदेशों के रहने वाले हैं। उपद्रव के बाद ये शहर छोड़कर चले गए हैं। वहीं शहर में आठ हजार से ज्यादा कढ़ाई की कंप्यूटराइज मशीनें भी लगी हैं। इन मशीनों से सूट, साड़ी आदि कपड़ों पर कढ़ाई की जाती है। इस कारोबार से भी सैकड़ों परिवार जुड़े हैं। करीब दो हजार परिवार कारोबार के मालिक है तो करीब आठ हजार कारीगर। दस हजार परिवार कढ़ाई के बाद कपड़ों पर सितारे, मोती आदि लगाने का काम करते हैं। उपद्रव के बाद से इन परिवारों की आय बंद हो गई है।
एक सप्ताह में दस करोड़ का फटका
मुख्य रूप से सुभाष बाजार से खद्दर का कारोबार होता है। यहां से पूरे देश में खद्दर का कपड़ा भेजा जाता है। 20 दिसंबर को हुए उपद्रव का असर बाजार पर साफ दिख रहा है। यहां बाहर से आने वाले व्यापारियों का टोटा है। नया कपड़ा बाजार में नहीं पहुंच रहा है। प्रतिदिन 50 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार, एक सप्ताह में करीब दस करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
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काम हो रहा प्रभावित
पावरलूम चलाने वाले ज्यादातर कारीगर बिहार के हैं। उपद्रव से अगले ही दिन सभी घर लौट गए। अब शहर का माहौल ठीक है, लेकिन कारीगर अभी तक दहशत में हैं। ऐसे में काम बंद है। स्थानीय कारीगर भी घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इस कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है।
-हाजी सईद अंसारी, पावरलूम व कढ़ाई कारोबारी
बाजार में खरीदार नहीं
एक ही दिन के उपद्रव ने खद्दर का कारोबार चौपट कर दिया। पावरलूम बंद पड़ी हैं। बाजार में खरीदार नहीं है। स्थानीय व्यापारी दूसरे शहरों में जा रहा है। फेरी लगाकर कपड़ा बेचने का काम करने वाले भी दहशत में हैं। अब तक दस करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
-अनुज गोयल, महामंत्री, हैंडलूम वस्त्र व्यापार संघ।
इन इलाकों में होता है काम
जमुना नगर, रसीदनगर, इस्लामाबाद, गोला कुंआ, करीमनगर, जाकिर कॉलोनी, ढवाईनगर, समर गार्डन, खत्ता रोड, कांच का पुल, ताला फैक्ट्री, किदवई नगर, शाहपीर गेट आदि इलाकों में बड़ी संख्या में पावरलूम और कंप्यूटराइज कढ़ाई मशीनें लगी हैं।
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महानगर में दस हजार से ज्यादा पावरलूम लगी हैं। इन पर खादी का पकड़ा तैयार किया जाता है। यह कपड़ा देशभर में सप्लाई होता है। कपड़ा बनाने के इस कारोबार में दस हजार से ज्यादा लोग लगे हैं। बताया जा रहा है कि पावरलूम चलाने वालों में अधिकतर लोग बिहार एवं अन्य प्रदेशों के रहने वाले हैं। उपद्रव के बाद ये शहर छोड़कर चले गए हैं। वहीं शहर में आठ हजार से ज्यादा कढ़ाई की कंप्यूटराइज मशीनें भी लगी हैं। इन मशीनों से सूट, साड़ी आदि कपड़ों पर कढ़ाई की जाती है। इस कारोबार से भी सैकड़ों परिवार जुड़े हैं। करीब दो हजार परिवार कारोबार के मालिक है तो करीब आठ हजार कारीगर। दस हजार परिवार कढ़ाई के बाद कपड़ों पर सितारे, मोती आदि लगाने का काम करते हैं। उपद्रव के बाद से इन परिवारों की आय बंद हो गई है।
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एक सप्ताह में दस करोड़ का फटका
मुख्य रूप से सुभाष बाजार से खद्दर का कारोबार होता है। यहां से पूरे देश में खद्दर का कपड़ा भेजा जाता है। 20 दिसंबर को हुए उपद्रव का असर बाजार पर साफ दिख रहा है। यहां बाहर से आने वाले व्यापारियों का टोटा है। नया कपड़ा बाजार में नहीं पहुंच रहा है। प्रतिदिन 50 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार, एक सप्ताह में करीब दस करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
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काम हो रहा प्रभावित
पावरलूम चलाने वाले ज्यादातर कारीगर बिहार के हैं। उपद्रव से अगले ही दिन सभी घर लौट गए। अब शहर का माहौल ठीक है, लेकिन कारीगर अभी तक दहशत में हैं। ऐसे में काम बंद है। स्थानीय कारीगर भी घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इस कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है।
-हाजी सईद अंसारी, पावरलूम व कढ़ाई कारोबारी
बाजार में खरीदार नहीं
एक ही दिन के उपद्रव ने खद्दर का कारोबार चौपट कर दिया। पावरलूम बंद पड़ी हैं। बाजार में खरीदार नहीं है। स्थानीय व्यापारी दूसरे शहरों में जा रहा है। फेरी लगाकर कपड़ा बेचने का काम करने वाले भी दहशत में हैं। अब तक दस करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
-अनुज गोयल, महामंत्री, हैंडलूम वस्त्र व्यापार संघ।
इन इलाकों में होता है काम
जमुना नगर, रसीदनगर, इस्लामाबाद, गोला कुंआ, करीमनगर, जाकिर कॉलोनी, ढवाईनगर, समर गार्डन, खत्ता रोड, कांच का पुल, ताला फैक्ट्री, किदवई नगर, शाहपीर गेट आदि इलाकों में बड़ी संख्या में पावरलूम और कंप्यूटराइज कढ़ाई मशीनें लगी हैं।