निकाय चुनाव: मेरठ नगर पंचायतों की आरक्षण सूची जारी, हस्तिनापुर में बनेगा नया इतिहास, देखिए पूरी लिस्ट
नगर निकाय में चैयरमैन, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों की आरक्षण की सूची जारी हो गई है। देखें मेरठ के नगर पंचायतों की आरक्षण की पूरी सूची और अब क्या बनेंगे नए समीकरण।
विस्तार
उत्तर प्रदेश में होने वाले नगर निकाय में चैयरमैन, नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्षों की आरक्षण की सूची सोमवार को जारी हो गई है। यहां देखिए मेरठ के नगर पंचायतों की आरक्षण की पूरी सूची और अब क्या बनेंगे नए समीकरण।
मेरठ जनपद में नगर निगम समेत 16 निकायों में बनेगी सरकार
नगर निगम समेत सभी निकायों की सीटों का आरक्षण जारी हो गया है। इनमें दो नगर पालिका और 13 नगर पंचायत हैं। इनके वार्डों का आरक्षण पहले ही जारी किया जा चुका है।
सीट - आरक्षण
नगर निगम - अन्य पिछड़ा वर्ग
नगर पालिका मवाना - अनारक्षित
नगर पालिका सरधना - महिला
नगर पंचायत खरखौदा -अन्य पिछड़ा वर्ग
नगर पंचायत सिवालखास -अनारक्षित
नगर पंचायत हस्तिनापुर -अनुसूचित जाति महिला
नगर पंचायत किठौर -अनारक्षित
नगर पंचायत परीक्षितगढ़ -महिला
नगर पंचायत लावड़ -अनारक्षित
नगर पंचायत बहसूमा -अनुसूचित जाति
नगर पंचायत फलावदा -अनारक्षित
नगर पंचायत करनावल -महिला
नगर पंचायत दौराला -अन्य पिछड़ा वर्ग
नगर पंचायत शहाजहांपुर -अनारक्षित
नगर पंचायत हर्रा - अनारक्षित नगर पंचायत खिवाई -अनारक्षित
आरक्षण ने बदला कस्बे की सरकार का समीकरण
निकाय चुनाव में अध्यक्ष पदों का आरक्षण जारी होते ही कई पार्टियों का समीकरण बदल गया है। वहीं कई चर्चित चेहरे चुनाव लड़ने से पहले ही बाहर हो गए हैं।
हस्तिनापुर में 2017 में हुए निकाय चुनाव में चेयरमैन सीट का चुनाव अनारक्षित घोषित किया गया था। लेकिन इस बार चक्रनुसार विधि को अपनाते हुए शासन ने नगर पंचायत चेयरमैन की सीट अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित कर दी है, जिससे मैदान में उतरने वाले कई प्रत्याशी चुनाव लड़ने से पहले ही मैदान से बाहर हो गए हैं। अब आरक्षण सूची आने के बाद इतिहास बदलने के संकेत हैं। इसके पीछे महाभारत कालीन ऐतिहासिक के परिदृश्य के साथ-साथ वार्ड़ों को नई सियासत होगी।
2017 के चुनाव के लिए नगर पंचायत के दायरे के साथ-साथ इस बार मतदाताओं की भी संख्या में करीब दो हजार का इजाफा हुआ है। ऐतिहासिक नगरी में इस बार भी अनारक्षित या ओबीसी सीट का अंदाजा लगाया जा रहा था, जिसके लिए भाजपा सहित अन्य पार्टियों के कार्यकर्ता पिछले कई महीनों से तैयारी में जुटे थे। लेकिन अनुसूचित जाति की महिला का आरक्षण निर्धारित होते ही उनके मंसूबों पर पानी फिर गया है। अब मतदाताओं का घालमेल सही नहीं हुआ तो सियासी विचारधाराएं टकराती नजर आएंगी।
आरक्षण जारी होते ही नगर पंचायत सीट पर नए इतिहास की पृष्ठभूमि भी तैयार होने लगी जनसंख्या से मतदाताओं की संख्या बड़ गई। प्रत्येक वार्ड में मतदाता दो सौ से तीन सौ के से ऊपर पहुंच गए। अब इनको एक साथ साधने में सभासद और चेयरमैन पद के संभावित प्रत्याशी नए सियासी सूरमाओं को पसीने झूठ से दिखाई देंगे।
नगर पंचायत करनावल
नगर पंचायतों का आरक्षण जारी होते ही कई प्रत्याशियों के चेहरे खिल उठे हैं, तो वहीं कई को मायूसी हाथ लगी है। नगर पंचायत करनावल महिला के लिए आरक्षित की गई है, जबकि नगर पंचायत हर्रा व खिवाई अनारक्षित हुई है। नगर पंचायत करनावल की सीट महिला के खाते में जाते ही तैयारी में जुटे कई पुरुष प्रत्याशियों को मायूसी हाथ लगी है।
वहीं, एक बार फिर वर्तमान चेयरमैन कुख्यात उधम सिंह की पत्नी पुष्पा देवी मैदान में उतर सकती हैं। नगर पंचायत हर्रा में वर्तमान चेयरमैन हुस्नो बेगम फिर से मजबूती के साथ मैदान में नजर आएंगी। जबकि नगर पंचायत निवाई में इस बार कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। आरक्षण जारी होते ही प्रत्याशियों ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया है और अपने समर्थकों को चुनाव की तैयारी में जुट जाने की अपील भी कर दी है।
मवाना-
मवाना नगर पालिका अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के कारण पहले से तैयारियों में लगे संभावित प्रत्याशियों के चेहरे खिल उठे हैं। मवाना नगर पालिका अभी तक अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था, जिस पर अयूब कालिया चेयरमैन है। इस बार सभी लोगों को उम्मीद थी कि सामान्य सीट आ सकती है, जिसको लेकर काफी लोग पहले से ही चुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे। वहीं आज सीट अनारक्षित होने के बाद उन सभी के चेहरे खिल उठे हैं।
किठौर-
किठौर व शाहजहांपुर नगर पंचायत चुनाव में अति पिछड़ा वर्ग और अनूसूचति जाति के आरक्षण के बाद चुनाव लड़ने की बांट जोह रहे करीब एक दर्जन लोगों को आरक्षण घोषित होते ही तगड़ा झटका लगा है। शाहजहांपुर में ओबीसी की सीट की संभावना को देखते हुए लोग प्रचार कर रहे थे। लेकिन आरक्षण घोषित होते ही सभी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। वहीं शाहजहांपुर में भाजपा प्रत्याशियों के चेहरे खिले हुए हैं। किठौर में फिर पुराने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार आमने-सामने होंगे। अनारक्षित चुनाव के बाद किठौर व शाहजहांपुर में नगर पंचायत चुनाव में रस्सा कस्सी देखने को मिलेगी। आरक्षण की घोषणा होते ही सामान्य सीट के उम्मीवारों के समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाई दी।
कस्बा किठौर में आरक्षित सीट के बाद फिर राजनीति घमासान नजर आएगा। मुनकाद अली, शाहिद मंजूर और मतलूब गौड के बीच फिर एक नगर पंचायत चुनाव में चुनावी जंग रहेगी। 1962 से 2017 तक किठौर की नगर पंचायत की राजनीति विरासत से ही चलती आ रही है। सबसे पहले किठौर में 1962 से 1972 तक चौधरी सखावत,1988 में सपा विधायक शाहिदमंजूर के चाचा इलियास और उनकी हत्या के बाद कमेटी के हाथों कमान चली गई। जिसके बाद लगातार 10 साल तक शाहिद मंजूर के चचेरे भाई शम्सपरवेज, 2006 से 2017 तक मतलूब गौड और फिर 2017 में मुनकाद की पुत्र वधू नाहिदा सलमान के हाथों नगर पंचायत के अध्यक्ष की कमान रही। लोगों को इस वार परिर्वतन की उम्मीद लगी थी लेकिन अनारिक्षत होने के बाद तैयारी धरी रह गई। वहीं शाहजहांपुर में दूसरी बार फिर अनारक्षित सीट आने पर कई माह से तैयारियों में जुटे अति पिछड़ा वर्ग और अनूसूचित जाति के उम्मीवारों को मासूसी हाथ लगी। जैसे ही आरक्षण की घोषणा हुई उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
किठौर, शाहजहांपुर में भाजपा की होगी अग्निपरीक्षा
किठौर व शाहजहांपुर दोनों की मुस्लिम बाहुल्य नगर पंचायत क्षेत्र है। किठौर में जहां भाजपा के लिए चुनाव लड़ाने के लिए प्रत्याशियों के लाले पड़ रहे हैं। वहीं शाहजहांपुर में भाजपा के टिकट की उम्मीद में दो वैश्य, एक मुस्लिम टिकट की दावेदारी कर रहा है। वहीं एक अन्य पड़ित और एक अन्य वैश्य निर्दलिय चुनाव के लिए मैदान में उतारा हुआ है। जबकी किठौर का समीकरण जाने तो यहां मात्र 15 प्रतिशत हिंदू मतदाता है, जबकी शाहजहांपुर में 25 प्रतिशत है। अगर शाहजहांपुर में भाजपा किसी को टिकट दे दो, उसके लिए अग्निपरीक्षा रहेगी। पिछले नगर पंचायत के चुनाव में भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार तारिख खान को 187 मत मिले थे।
लावड़ की सीट आई सामान्य, दौराला ओबीसी
कस्बा लावड़ की सीट इस बार सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित की गई। कस्बे से लगभग 10 से अधिक उम्मीदवार मैदान में है। सामान्य में सीट आरक्षित होने से सभी के चेहरे खिले हुए हैं। वहीं, पिछली बार कस्बा लावड़ की सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित थी। 2012 में सामान्य व 2007 में पिछड़ा वर्ग महिला के लिए यह सीट आरक्षित थी।
इसके अलावा दौराला कस्बे की सीट इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। पिछड़ा वर्ग में सीट आने से यहां से लगभग तीन चार प्रत्याशियों की उम्मीदों पर पानी फिरा है। मौजूदा चेयरपर्सन रीमा शर्मा भी इस बार अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी में थी। इससे पहले यह सीट 2012 में एससी महिला व 2007 में एससी के लिए आरक्षित थी। नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त होने के बाद भी दौराला कस्बे में जाट बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी नगर पंचायत में अब तक जाट बिरादरी से कोई अध्यक्ष नहीं बन सका है। लेकिन, इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने के कारण जाट बिरादरी से अध्यक्ष बनने की उम्मीद जगी है।
फलावदा-
फलावदा नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सीट अनारक्षित होने के कारण पहले से तैयारियों में लगे संभावित प्रत्याशियों के चेहरे खिल उठे हैं। भावि प्रत्याशियों ने एक-दूसरे को बधाई देते हुए खुशी मनाई। फलावदा अभी तक अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था, जिस पर अब्दुस समद चेयरमैन है। इस बार सभी लोगों को उम्मीद थी कि सामान्य सीट आ सकती है, जिसको लेकर कई लोग पहले से ही चुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे। वहीं आज सीट अनारक्षित होने के बाद उन सभी के चेहरे खिल गए है। अभी तक कई भावी प्रत्याशी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं तो कई प्रत्याशी सीट की स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे थे। अब अनारक्षित सीट आने पर सभी प्रत्याशियों के उत्साह देखा जा रहा है।
परीक्षिगढ़-
परीक्षिगढ़ में आरक्षण सूची देखकर किसी के चहेरे खिले तो कई के चेहरों पर मायूसी छाई है। नगर पंचायत अध्यक्ष चुनाव की आरक्षण सूची आने पर कुछ प्रत्याशियों को झटका लगा तो कुछ दावेदारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। नगर पंचायत अध्यक्ष सीट को लेकर चल रहा घमासन सोमवार देर शाम खत्म हो गया। परीक्षितगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित हुआ है।
नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था। इस सीट को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं। सोमवार को नगर पंचायत अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। जिससे कुछ उम्मीदवारों के अरमानों पर पानी फिर गया है। वहीं कुछ के चेहरे खुशी से चहक उठे हैं।
बता दें कि 2012 में भाजपा से प्रत्याशी राखी अमित मोहन गुप्ता व 2017 में राखी मोहन गुप्ता के पति वर्तमान चेयरमैन अमित मोहन टीप ने नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में विजय हासिल की थी।
जानीखुर्द-
जानीखुर्द में सिवालखास नगर पंचायत के अध्यक्ष पद की सीट अनारक्षित घोषित होने के बाद प्रत्याशियों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ आई है। वहीं सीट को एससी या ओबीसी में आने की संभावना मानकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे प्रत्याशी मायूस हो गए हैं।
मौजूदा नगर पंचायत महिला की लिए आरक्षित हुई थी। फुरकाना पत्नी गुलजार चौहान नगर पंचायत की पहली महिला अध्यक्ष बनी थी। फुरकाना करीब 11 सौ मतों से चुनाव जीती थी। इस बार फुरकाना के पति गुलजार चौहान काफी समय से समान्य सीट आने पर चुनाव लड़ने के लिए तैयारी कर रहे थे।
वहीं 2017 में भी अध्यक्ष पद का अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाने वाले शकील रजा भाजपा से अध्यक्ष पद के लिए टिकट की मांग करते हुए चुनाव की तैयारी कर रहे थे। इसको लेकर उन्होंने कस्बें में भाजपा के कई बड़े कार्यक्रम करवाए है। वहीं नगर पंचायत सिवालखास के पूर्व अध्यक्ष रहे मैराज भी चुनाव लड़ने की तैयारी में लगे हुए हैं।
वही सेवानिर्वत अध्यापक आस मौहम्मद और शकील लम्बरदार भी सामान्य सीट आने पर चुनाव लड़ने के लिए तैयारी में लगे हुए थे। समान्य सीट के सभी दावेदारों ने आरक्षण घोषित होते ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। वह दलबल के साथ सोमवार शाम से ही चुनाव प्रचार में कूद पड़े हैं। कस्बा वासी समान्य सीट आने पर नगर पंचायत सिवालखास के अध्यक्ष पद के चुनाव का संघर्ष पूर्ण मान रहे है।