{"_id":"5d2798c78ebc3e6caa3ba40e","slug":"block-development-office-backward-kithor-news-mrt432721026","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्षेत्र के गांवो के विकास की जिम्मेदारी रखने वाला ब्लॉक कार्यालय अब अपने ही विकास को तरस रहा।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
क्षेत्र के गांवो के विकास की जिम्मेदारी रखने वाला ब्लॉक कार्यालय अब अपने ही विकास को तरस रहा।
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माछरा। खंड विकास कार्यालय माछरा की जिम्मेदारी क्षेत्र के गांवों का विकास करने की है। उसका ब्लॉक मुख्यालय स्वयं ही विकास के लिए तरस रहा है। इस जर्जर पडे़ कार्यालय के कारण ब्लॉक का दफ्तर अब कर्मचारियों एवं अधिकारियों के आवास में चल रहा है।
मेरठ-गढ़ मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर दूर माछरा ब्लॉक कार्यालय स्थित है। कार्यालय भवन का निर्माण शासन द्वारा 1975 में हुआ था। करीब 65 हजार रुपये खर्च करके भवन तैयार किया गया था। ब्लॉक कार्यालय के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया। करीब दो वर्ष बाद ही भवन की छतें बरसात में टपकने लगीं और घटिया सामग्री प्रयोग होने के कारण छत का प्लास्टर टूटकर गिरने लगा।
इसके बाद 1992 में शासन-प्रशासन एवं अनियमितता ने उक्त कार्यालय को बीडीओ, एडीओ और अनरूप कर्मचारियों के आवासीय भवनों में स्थानांतरित कर दिया गया। उधर, बताया कि उक्त कार्यालय भवन की गुणवत्ता की जांच लखनऊ के इंजीनियरों द्वारा कराई गई थी। जिसमें उक्त भवन मानकों के अनुरूप नहीं मिला। इस भवन को बनाने वाले ठेकेदार, इंजीनियर, अवर अभियंता के खिलाफ तत्कालीन सीडीओ ने तभी किठौर थाने पर मुकदमा पंजीकृत कराया था। तभी से उक्त भवन निर्माण में घटिया सामग्री लगने का मामला विचाराधीन बताया जा रहा है। उक्त जर्जर कार्यालय भवन ऐसी ही स्थित में खड़ा है बीते वर्षों में तत्कालीन डीएम बी. चंद्रकला ने ब्लॉक माछरा का निरीक्षण किया बैठने की सही व्यवस्था नहीं होने पर उन्होंने तुरंत अपनी निधि से तीन कमरों का निर्माण कराया। वहीं, जर्जर भवन पर कहा कि इसका मामला कोर्ट में होने के कारण यह कह नहीं सकते हैं। उधर, कार्यालय कर्मचारियों और अधिकारियों के आवासों में चलने के कारण अधिकारी एवं कर्मचारी मेरठ में रहते हैं। उनसे कोई यह भी नहीं सकता है कि आप ब्लॉक कार्यालय पर रात्रि में क्यों नहीं रहते हैं। इससे कर्मचारी खुश हैं।
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परियोजना निदेशक एवं कार्यवाहक सीडीओ भानुप्रताप सिंह ने बताया कि उक्त भवन को गिराने एवं उसके स्थान पर दूसरा भवन निर्माण कराने का प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है इसे गिराकर दूसरा भवन निर्माण कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन 42 गांवों के विकास की जिम्मेदारी ब्लॉक कार्यालय माछरा पर है। वह स्वयं ही अपने विकास को तरस रहा है। वर्तमान ब्लॉक प्रमुख कौशल्या देवी एवं पूर्व प्रमुख ब्रजवीर सिंह का कहना है कि इस जर्जर भवन ने माछरा ब्लॉक कार्यालय की शोभा खराब कर दी है। इसके स्थान पर दूसरा भवन बने। उनका कहना है कि जिन ठेकेदार, इंजीनियर, जेई के विरुद्ध मुकदमा पहले पंजीकृत कराया गया था उनमें से शायद सभी की मृत्यु हो गई है। इसलिए उक्त मुकदमे को बंद कर नया भवन निर्माण होना चाहिए।
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मेरठ-गढ़ मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर दूर माछरा ब्लॉक कार्यालय स्थित है। कार्यालय भवन का निर्माण शासन द्वारा 1975 में हुआ था। करीब 65 हजार रुपये खर्च करके भवन तैयार किया गया था। ब्लॉक कार्यालय के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया। करीब दो वर्ष बाद ही भवन की छतें बरसात में टपकने लगीं और घटिया सामग्री प्रयोग होने के कारण छत का प्लास्टर टूटकर गिरने लगा।
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इसके बाद 1992 में शासन-प्रशासन एवं अनियमितता ने उक्त कार्यालय को बीडीओ, एडीओ और अनरूप कर्मचारियों के आवासीय भवनों में स्थानांतरित कर दिया गया। उधर, बताया कि उक्त कार्यालय भवन की गुणवत्ता की जांच लखनऊ के इंजीनियरों द्वारा कराई गई थी। जिसमें उक्त भवन मानकों के अनुरूप नहीं मिला। इस भवन को बनाने वाले ठेकेदार, इंजीनियर, अवर अभियंता के खिलाफ तत्कालीन सीडीओ ने तभी किठौर थाने पर मुकदमा पंजीकृत कराया था। तभी से उक्त भवन निर्माण में घटिया सामग्री लगने का मामला विचाराधीन बताया जा रहा है। उक्त जर्जर कार्यालय भवन ऐसी ही स्थित में खड़ा है बीते वर्षों में तत्कालीन डीएम बी. चंद्रकला ने ब्लॉक माछरा का निरीक्षण किया बैठने की सही व्यवस्था नहीं होने पर उन्होंने तुरंत अपनी निधि से तीन कमरों का निर्माण कराया। वहीं, जर्जर भवन पर कहा कि इसका मामला कोर्ट में होने के कारण यह कह नहीं सकते हैं। उधर, कार्यालय कर्मचारियों और अधिकारियों के आवासों में चलने के कारण अधिकारी एवं कर्मचारी मेरठ में रहते हैं। उनसे कोई यह भी नहीं सकता है कि आप ब्लॉक कार्यालय पर रात्रि में क्यों नहीं रहते हैं। इससे कर्मचारी खुश हैं।
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परियोजना निदेशक एवं कार्यवाहक सीडीओ भानुप्रताप सिंह ने बताया कि उक्त भवन को गिराने एवं उसके स्थान पर दूसरा भवन निर्माण कराने का प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है इसे गिराकर दूसरा भवन निर्माण कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन 42 गांवों के विकास की जिम्मेदारी ब्लॉक कार्यालय माछरा पर है। वह स्वयं ही अपने विकास को तरस रहा है। वर्तमान ब्लॉक प्रमुख कौशल्या देवी एवं पूर्व प्रमुख ब्रजवीर सिंह का कहना है कि इस जर्जर भवन ने माछरा ब्लॉक कार्यालय की शोभा खराब कर दी है। इसके स्थान पर दूसरा भवन बने। उनका कहना है कि जिन ठेकेदार, इंजीनियर, जेई के विरुद्ध मुकदमा पहले पंजीकृत कराया गया था उनमें से शायद सभी की मृत्यु हो गई है। इसलिए उक्त मुकदमे को बंद कर नया भवन निर्माण होना चाहिए।