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कोआपरेटिव को पुन: जीवंत कर किया स्थापित

Mon, 02 Dec 2019 01:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2019 01:33 AM IST
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BJP revive the cooprative banks
सीसीएसयू के प्रेक्षागृह मे आयोजित जिला सरकारी बैंक की 71 वी वार्षिक सामान्य निकाय बैठक मे पुस्तक ?
मेरठ।
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प्रदेश के गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि आजादी के बाद अर्थव्यवस्था को संभालने में कोऑपरेटिव सोसायटी का अहम योगदान रहा है। हालांकि इन पर कुछ परिवारों ने कब्जा जमा रखा था। अब कोऑपरेटिव बैंक को दोबारा स्थापित कर लाभ के रास्ते पर लाया गया है। कई सालों बाद मेरठ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। गन्ना विकास मंत्री रविवार को जिला सहकारी बैंक की 71वीं वार्षिक निकाय बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारण, इंपोर्ट ड्यूटी जैसे मुद्दों पर भी प्रकाश डाला।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री सहकारिता मुकुट बिहारी, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, कोऑपरेटिव बैंक मेरठ के चेयरमैन मनिंदर पाल सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष मुकेश सिंघल ने किया। सुरेश राणा ने कहा कि 60 साल की बुराई को खत्म करने में समय जरूर लगेगा, लेकिन सफाई हो जाएगी। किसानों की मांग पर चीनी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई है। मोहिउद्दीनपुर मिल सहित बागपत की चीनी मिलों की क्षमता को भी बढ़ाया गया है। मेट्रो सिटी की तर्ज पर मेरठ के लिए हाईवे बनाए जा रहे हैं। जेवर में एयरपोर्ट बनने से रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे। गुरुग्राम और बागपत एक साथ बने, लेकिन आज बड़ा अंतर है। मोदी सरकार बनने के बाद बागपत के विकास में तेजी आई है।
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मंत्री सहकारिता विभाग मुकुट विहारी ने कहा कि पूर्व में बंद मिलों को बेचा जा रहा था, लेकिन अब बंद मिलों को चलाया जा रहा है। आज हमारे पर खाद का भरपूर स्टॉक रहता है। किसानों की आय बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि 2014 के आंकड़े देखें तो धान का रेट 700 रुपये था, जो अब बढ़कर 1800 के आसपास है। कॉआपरेटिव में सदस्यों की संख्या बढ़ी है। मेरठ ने इस वर्ष 90 लाख का मुनाफा कमाया। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि किसान की हर जरूरत की पूर्ति सहकारिता से संभव हो।
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एग्रेसिव बैंकिंग का नाम किया बर्बाद : सांसद
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि यूपीए सरकार ने एग्रेसिव बैंकिंग के नाम पर बैंकों को बर्बाद कर दिया। परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। राष्ट्रीयकृत बैंकों के नाम पर कुछ लोगों ने स्वार्थ सिद्ध किया। हालांकि मोदी सरकार ने गरीब तक बैंक को पहुंचाया है। छोटे बैंकों का मर्जर कर बड़े बैंक बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में मंदी का कारण है, उत्पादन बढ़ गया है और कंज्यूम कम हो रहा है। पहले कुछ देश कार बनाते थे, अब सभी देश कार बना रहे हैं। हमारे देश में ही हर साल दस लाख वाहन बनते हैं।
कोऑपरेटिव बैंक का मर्जर अनुचित
कोऑपरेटिव बैंक के डेलीकेट, डायरेक्टर और समिति सदस्यों ने कोऑपरेटिव बैंक के मर्जर को गलत बताया। मेरठ के चेयरमैन मनिंदर पाल सिंह ने कहा कि वेस्ट यूपी में कोऑपरेटिव बैंक लाभ में काम कर रहा है। इसका श्रेय यहां के किसानों को जाता है। मर्जर हुआ तो यह बैंक भी नुकसान में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि गन्ने का भुगतान भी कोऑपरेटिव बैंक के माध्यम से कराया जाना चाहिए। अब मुख्यालय के साथ बैंक शाखाओं के जीर्णोद्धार की भी जरूरत है।
बैंक तीन प्रतिशत पर कर रहा काम : सीईओ
कोऑपरेटिव बैंक के सीईओ अरविंद दिवाकर सिंह ने बताया कि बैंक तीन प्रतिशत पर काम कर रहा है। मेरठ के किसानों का पैसा मेरठ के विकास में ही लगाया जाता है। आज कोऑपरेटिव बैंक के मेरठ और बागपत में 3.43 लाख सदस्य हैं। 59 हजार किसानों को केसीसी कार्ड दिए गए हैं। बैंक की 53 शाखाएं हैं। बैंक में डिजिटल लेनदेन किया जा रहा है। किसान सम्मान योजना में तीस हजार से ज्यादा खाते खोले गये हैं। विविधिकरण ऋण योजना पर भी बैंक काम कर रहा है। बैंक 1.60 लाख का ऋण बिना भूमि को बंधक किए दे रहा है। आने वाले समय में नाबार्ड के साथ मिलकर वित्तीय साक्षरता के लिए 450 कैंप लगाए जाएंगे।
आय बढ़ाने के लिए कई व्यवसाय जरूरी
किसानों की आय 2022 तक हर हाल में दोगुना हो जाएगी। नाबार्ड डायरेक्टर रवि शंकर शर्मा ने कहा कि किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए कई व्यवसाय में ध्यान देना चाहिए। साथ ही खर्च का लेखाजोखा भी रखना चाहिए। पशुपालन इसमें मददगार सिद्ध होगा। आज कोऑपरेटिव की मदद से दूध का कलेक्शन किया जा रहा है। किसान गोबर को खाद में उपयोग करें। इस बीच उन्होंने ऋण संबंधी जानकारी भी दी।
समिति डेलीगेट ने दी जानकारी
संचालन मंडल से मदन पाल सिंह ने कहा कि किसान इंटर क्रॉपिंग नहीं कर रहे हैं। जमीन को भी कई बार खाली छोड़ देते हैं। किसान धान की बुआई भी कम करते हैं। बसौरा नारंद जिला सहकारी समिति से जिवय पाल सिंह ने बैंक मर्जर का विरोध किया। पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र सिंह ने कहा कि किसान जब कमजोर था तब कोऑपरेटिव आंदोलन शुरू हुआ। कैश क्राप, पॉली हाउस, पशु पालन की ओर किसानों को ध्यान देना चाहिए।

ये लोग रहे मौजूद
संचालन मंडल से लाखन सिंह, डायरेक्टर प्रदीप त्यागी, अंकुर सांगवान, सुरेंद्र सिंह, चेयरमैन हरिराज सिंह, चेयरमैन केंद्रीय उपभोक्ता भंडार, संजीव बंसल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य योगेंद्र कुसेड़ी और टीटू चौधरी, चेयरमैन राजपाल शर्मा, शरद मुद्गल, मदन पाल सिंह, रीना तोमर, सविता मुखिया, नरेश तोमर, प्रमेंद्र मुखिया, ऋषिपाल सिंह, राजेंद्र प्रेमी, सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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