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मेरठ: बीना वाधवा भाजपा में शामिल, बनेंगें नए समीकरण, कैंट समेत कई चुनावों में बदल जाएगी सियासत

Sat, 19 Dec 2020 02:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ
सचिन त्यागी, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 19 Dec 2020 02:11 AM IST
सार

  • पति सुनील वाधवा 2012 में भाजपा से तीन हजार वोटों से हारे थे चुनाव
  • कैंट की राजनीति में भी बना है नया समीकरण

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Bina Wadhwa joins BJP, will change equation
बीना वाधवा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ कैंट बोर्ड की पूर्व उपाध्यक्ष सदस्य बीना वाधवा के भाजपा में आने के बाद कैंट की सियासत में नया मोड़ आ गया है। बीना वाधवा जहां पांच साल से राजनीति में जनता के हित के मुद्दे उठाती आ रही हैं। वहीं, उनके पति सुनील वाधवा का कैंट की राजनीति में खासा दखल है। ऐसे में बसपा को यह तगड़ा झटका है। कैंट में भाजपा के बाद सुनील वाधवा सबसे सक्रिय रहे हैं। जिस तरह से बोर्ड उपाध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता द्वारा चुने जाने की अटकलें लगी हैं, उससे बीना वाधवा के भाजपा में आने से पूरा राजनीतिक सीन ही बदल जाएगा। पंजाबी बिरादरी में भी भाजपा की पकड़ और मजबूत होगी।
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कैंट में बीना वाधवा के परिवार की राजनीति में सक्रिय भागीदारी 35 साल से हैं। सुनील वाधवा के बड़े भाई महेंद्र वाधवा सन 1985 में कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष बने। इसके बाद सन 1997 में सुनील वाधवा ने निर्दलीय रहते हुए कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाया। साल 2007 में उन्होंने कैंट विधानसभा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। 44 हजार वोट पाकर वे दूसरे नंबर पर रहे। इसके बाद साल 2012 से वे दोबारा बसपा से चुनाव लड़े।
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कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल से मात्र करीब तीन हजार वोटों से हार गए। साल 2015 में वार्ड तीन से बीना वाधवा चुनाव लड़कर सदस्य बनीं। बोर्ड उपाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाया। पिछले साल जुलाई में उनके खिलाफ भाजपा के सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए । जिसके बाद यहां विपिन सोढ़ी उपाध्यक्ष बने। जिस तरह से बीना वाधवा की भाजपा में एंट्री हुई उसके बाद अब यहां के कई चुनावों में पूरी तरह से सियासत बदल जाएगी।
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वसूली मामले में भाजपा विधायक के समर्थन में रहीं बीना वाधवा
भाजपा के सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव आने के बावजूद कई बार बीना वाधवा ने सांसद और विधायक के समर्थन में बोर्ड बैठक में खुलकर अपनी आवाज रखी। मवाना-रुड़की-दिल्ली रोड पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूली के मामले में भी वे विधायक के समर्थन में खुलकर बोलीं। वहीं, अब कैंट बोर्ड का पूरा बोर्ड भगवा रंग में रंग गया है। आठ में से सात सदस्य भाजपा के हो गए हैं।

भाजपा का एक खेमा पहले से था साथ
बीना वाधवा के पति भले ही भाजपा के मंच पर नजर न आए हों। लेकिन इसके पीछे एक बहुत ही सोची समझी सियासत है। सुनील वाधवा के करीबी जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह का इस पूरी राजनीतिक बिसात में बड़ा हाथ है। यही नहीं, बसपा समर्थन से स्नातक एमएलसी चुनाव लड़ चुके महावीर एजूकेशनल ग्रुप के चेयरमैन धर्मेंद्र भारद्वाज भी सुनील वाधवा के करीबी हैं। धर्मेंद्र भारद्वाज इन दिनों सरधना विधायक संगीत सोम के बेहद करीबी हैं। इन्हीं करीबियों के चलते यह राजनीतिक समीकरण बना है।

कैंट की राजनीति में भी बना है नया समीकरण
बीना वाधवा की ज्वाइनिंग भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस शर्त पर कराई है कि वह सिर्फ कैंट बोर्ड की राजनीति तक सीमित रहेंगी। लेकिन राजनीति में ऐसी शर्त कितने दिन चलती है, यह सबको पता है। ऐसे में साफ है कि अब कैंट विधानसभा की राजनीति में भी एक नया समीकरण बन गया है। जिसे लेकर खुद कैंट के दावेदार भी अचानक मंच पर वीना वाधवा की मौजूदगी को लेकर हैरत में नजर आए।

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