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भाजपा ने रामलहर के नाम पर यहां फिर रचा इतिहास, लगाया छक्का
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sun, 12 Mar 2017 02:24 PM IST
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भाजपा प्रत्याशी सुचि चौधरी
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विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू लोगों के सिर पर खूब चढ़कर बोला। 26 साल बाद जिले की छह सीटों पर कमल खिल पाया है। 1991 में रामलहर के चलते भाजपा ने जिले की सभी सात सीटों पर कब्जा किया था। इसके बाद भाजपा ऐसा कोई करिश्मा नहीं कर पाई थी। बसपा को टिकटों का बंटवारा ले डूबा। सभी छह सामान्य सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारने का बसपा का सोशल मैनेजमेंट का फॉर्मूला फेल हो गया। इसे जनता ने पूरी तरह नकार दिया। सपा के दिग्गज आपसी गुटबंदी के कारण कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए।
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रामलहर के चलते भाजपा ने 1991 में उस समय जिले की सभी सात सीटों पर परचम लहराया था। सभी सीटों पर कमल खिल गया था। रामलहर में बिजनौर सीट से महेंद्रपाल सिंह, चांदपुर से डा.अमर सिंह, धामपुर से राजेंद्र सिंह, नजीबाबाद सुरक्षित सीट से राजेंद्र प्रसाद, नगीना सुरक्षित सीट से ओमप्रकाश, स्योहारा से महावीर सिंह और अफजलगढ़ सीट से डा. इंद्रदेव सिंह ने जीत हासिल की थी। इसके बाद से भाजपा जिले में कोई बड़ा करिश्मा नहीं कर पाई थी। विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू काम आ गया। नरेंद्र मोदी का जादू लोगों के खूब सिर चढ़कर बोला। मोदी के आगे किसी की नहीं सुनी। नरेंद्र मोदी के अलावा पेद्दा कांड व नयागांव के विशाल मर्डर से भी वोटों का ध्रुवीकरण हुआ। यही वजह रही कि भाजपा जिले की आठ में से छह सीटें हासिल करने में कामयाब रहीं। भाजपा की झोली में बिजनौर, चांदपुर, नूरपुर, बढ़ापुर, नहटौर व धामपुर सीट गईं। बसपा को चुनाव में भारी खामियाजा उठाना पड़ा। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सभी छह सामान्य सीटों पर मुस्लिमों को उतारकर दलित, मुस्लिम गठजोड़ कार्ड खेला था। 1989 में बसपा ने यह कार्ड खेला था। पांच सामान्य सीटों पर मुस्लिम उतारे थे और सभी जीत गए थे, लेकिन इस बार यह फॉर्मूला वोटरों ने नकार दिया। बसपा को जिले की एक भी सीट नहीं मिली। टिकटों के बंटवारे के कारण ही पूर्व मंत्री ठाकुर यशपाल सिंह अपने बेटे आयुष चौहान के साथ बसपा को छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। अन्य सामान्य सीटों पर भी मुस्लिमों को टिकट देने से सामान्य जाति के नेता नाराज थे। यही वजह रही कि बसपा को इस बार सभी सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। सपा के दिग्गज भी इस बार चुनाव हार गए। धामपुर सीट पर मंत्री मूलचंद चौहान, बिजनौर सीट पर विधायक रुचि वीरा, नूरपुर सीट पर नईमुल हसन, चांदपुर पर अरशद अली अंसारी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए। जिले में सपा में पहले से ही गुटबंदी सड़कों पर आ गई थी। सपा के नेता खेमों में बंटे थे। रुचिवीरा व मूलचंद चौहान अलग-अलग खेमों की कमान संभाले थे। नगीना के विधायक मनोज पारस भी मूलचंद चौहान के खेमे में थे। गनीमत रही कि मनोज पारस इलाके में कुछ मुस्लिम नेताओं के विरोध के चलते अपनी सीट बचाने में कामयाब हो गए। नजीबाबाद से बसपा छोड़कर सपा के टिकट पर लड़े विधायक तसलीम अहमद ने भी सपा की लाज बचा ली। 2012 के चुनाव में भी सपा को नगीना व धामपुर सीट मिली थीं। 2002 के बाद रालोद जिले में कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई। 2002 के चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन के चलते चांदपुर से पूर्व मंत्री स्वामी ओमवेश रालोद के टिकट पर जीते थे। इसके बाद से रालोद का खाता भी नहीं खुला है। इस बार के चुनाव में तो रालोद के प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।
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बिजनौर
1. भाजपा- सुचि चौधरी-------------------- 1,05544 जीत
2. बसपा- रशीद अहमद-------------------- 49400
3. सपा- रुचिवीरा ------------------------ 78,267
2. धामपुर सीट
1. भाजपा- अशोक राणा -------------------- 82,169 जीते
2. सपा- मूलचंद चौहान -------------------- 64,305
3. चांदपुर
1. भाजपा- कमलेश सैनी-------------------- 92345 जीते
2. बसपा- इकबाल----------------------56,696
4. नगीना सीट
1. भाजपा- ओमवती ----------------------69,178
2. सपा- मनोज पारस ----------------------77,145 जीते
5. नजीबाबाद सीट
1. भाजपा- राजीव अग्रवाल---------------------79,080
2. सपा- तसलीम अहमद ----------------------81, 082 जीते
6. नहटौर सीट
1. भाजपा- ओम कुमार-----------------------76644 जीते
2. कांग्रेस- मुन्ना लाल प्रेमी-------------------53493
7. नूरपुर सीट
1. भाजपा- लोकेंद्र चौहान 79,172 जीते
2. सपा- नईमुलहसन 66436
8. बढ़ापुर सीट
1. भाजपा- सुशांत सिंह----------------------78744 जीते
2. बसपा- फहज यजदानी------------------- 50684
3. कांग्रेस- अहसान अली-------------------- 68920