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घर पर रहेंगे, खेत पर रहेंगे, मगर चुप नहीं रहेंगे.., लाॅकडाउन में कृषि संकट से उबरने को भाकियू ने केंद्र सरकार से मांगे 1.5 लाख करोड़

Fri, 17 Apr 2020 07:41 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 17 Apr 2020 07:41 PM IST
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Bhakiyu asked the central government for 1.5 lakh croreto recover from the agricultural crisis during Lockdown
लॉकडाउन - फोटो : amar ujala
अंतरराष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन और भारतीय किसान आंदोलन समेत अन्य तमाम किसान संगठनों ने अपने कृषि यंत्रों के फोटो खींचकर और हैशटैग 'घर पर रहेंगे, खेत पर रहेंगे मगर चुप नहीं रहेंगे' के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की और आकर्षित किया। 
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साथ ही भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार से कोविड-19 के चलते हुए लॉक डाउन में कृषि को संकट से उबारने और  किसानों के कल्याण लिए अलग से एक विस्तृत पैकेज 1.5 लाख करोड़ घोषित करने की मांग की है। 
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इन किसानों में किसी ने अपने घर के गेट पर तो किसी ने खेत पर अपने ट्रैक्टरों और अन्य कृषि यंत्रों के साथ फोटो खींचे। भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी ने ट्रैक्टर और फावड़े के साथ फोटो शेयर करते हुए लाॅकडाउन में किसानों को क्षतिपूर्ति के लिए आर्थिक पैकेज देने, किसानों को पूर्णतया कर्जमुक्त करने, बिजली फ्री करने, किसानों पर देय ब्याज और पेनाल्टी माफ करने की मांग की।
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संगठन के संयोजक हरबीर निलोहा, ज्ञानेंद्र त्यागी, नानक त्यागी, अनिल त्यागी, सुफियान चौहान, अनिल पाब्ला, रिंकू त्यागी आदि ने भी फोटो शेयर किए। दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन छात्र इकाई के अध्यक्ष राजकुमार करनावल ने अपने गांव में काफी किसानों के साथ फोटो खींचकर सोशल मीडिया में शेयर किए।

इसके अलावा भाकियू के पूर्व जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह, हरेंद्र जानी, बाबा इलम सिंह, छात्र नेता अनुराग चौधरी, पूर्व महासचिव सत्यवीर सिंह जंगेठी, जवाहर सिंह जिटौली, संजय दौरालिया, रविन्द्र दौरालिया, नरेश चौधरी, विजयपाल घोपला, इंद्रपाल सिंह आदि ने भी कृषि यंत्रों के साथ फोटो शेयर कर मांगों को पूरा करने की मांग की। 

इसलिये मनता है अंतराष्ट्रीय किसान दिवस::
पूरे विश्व के किसानों को एक मंच पर लाने के लिए 1998 में भारतीय किसान यूनियन व कर्नाटक राज्य रैयत संघ द्वारा ला विया कम्पेसिना नामक एक मंच तैयार किया गया था। जिसमें दुनिया के आज के समय में लगभग 181 संगठन व 81 देश शामिल हैं।

इसी वैश्विक किसान आन्दोलन का नतीजा है कि पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में किसानों के मानवाधिकार को लेकर 2018 में प्रस्ताव पारित करते हुए स्वीकृति प्रदान की है, लेकिन अभी बहुत सारे देशों की सरकारों द्वारा इसे अपनाया नहीं गया, जिसके लिए संघर्ष जारी है। अंतरराष्ट्रीय किसान आन्दोलन खाद्य सम्प्रभुता, विश्व व्यापार संगठन से खेती को बाहर किए जाने, परम्परागत खेती, अनुवांशिक बीज, महिला किसानों के अधिकार को लेकर कार्य कर रहा है।

17 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'ला विया कम्पेसिना' संगठन अंतरराष्ट्रीय किसान संघर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों के साथ एकजुटता दिखाता है। इसका उद्देश्य किसानों की समाज के लिए ऐतिहासिक भूमिका जैसे-युद्ध, आपदा एवं महामारी के समय लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए किसान संघर्षों को नमन, प्रणाम करना है।

भाकियू ने मांगा 1.5 लाख करोड़ का पैकेज
भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार से कोविड-19 के चलते हुए लॉक डाउन में कृषि को संकट से उबारने और  किसानों के कल्याण लिए अलग से एक विस्तृत पैकेज 1.5 लाख करोड घोषित करने की मांग की है। कृषि कार्य हेतु किसानों को मनरेगा के माध्यम से श्रमिक उपलब्ध कराने, खेतीहर मजदूरों को भी मिलने वाले 1000 रुपये का लाभ दिलाने की मांग की है।

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