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बेटी ने बेटे का फर्ज निभाकर दी पिता को मुखाग्नि
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Wed, 02 Nov 2016 01:38 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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सड़क हादसे का शिकार हुए आकाशवाणी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (रेडियो) नीरज गोयल का मंगलवार को सूरजकुंड श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। बड़ी बेटी रितिका ने बेटे का फर्ज निभाते हुए पिता को मुखाग्नि दी। वहीं, कंकरखेड़ा पुलिस ने मौके से मिली कार की नंबर प्लेट के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। हालांकि पुलिस अभी तक आरोपी कार चालक का सुराग नहीं लगा पाई है।
रोहटा रोड स्थित गगन एंकलेव निवासी नीरज गोयल (45) पुत्र रमेश चंद गोयल आकाशवाणी दिल्ली में डिप्टी डायरेक्टर जनरल (रेडियो) के पद पर तैनात थे। मेरठ के किला रोड पर बन रहे आकाशवाणी केंद्र के पर्यवेक्षक के साथ वे आईईएस सेवा के अधिकारी भी थे। सोमवार रात करीब आठ बजे वह साइकिल से घर से घूमने निकले थे तो एक ऑल्टो कार ने उन्हें टक्कर मार दी थी। सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई थी। जबकि आरोपी कार चालक मौके से फरार हो गया था। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव जब घर पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया।
रितिका ने निभाया बेटे का फर्ज
नीरज गोयल के परिवार में पत्नी अर्चना गोयल और दो बेटियां रितिका (15) व अक्षिता (12) ही हैं। दोनों बागपत रोड स्थित डीपीएस में कक्षा 11 और 9 में पढ़ती हैं। कोई बेटा नहीं है। जबकि अर्चना परतापुर स्थित एक पॉलीटेक्निक इंस्टीट्यूट में विभागाध्यक्ष हैं। मंगलवार को सूरजकुंड श्मशान घाट पर बड़ी बेटी रितिका ने ही पिता को मुखाग्नि दी। साथ ही अंतिम संस्कार की सभी क्रियाएं पूरी कराईं। जिसे देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।
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पिता का सपना पूरा करेंगी
दोनों बहनों ने बिलखते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि अचानक से एक झटके में उनके सिर से पिता का साया उठ जाएगा। अब जिंदगी का मकसद पिता के सपने को पूरा करना ही है। रितिका ने सुबकते हुए कहा कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा बेटों की तरह लाड़ प्यार किया और अच्छी शिक्षा दी। वे अपने पिता के विचारों को आदर्श मानते हुए समाज में उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगी। पढ़ लिखकर इंजीनियर बनना ही उनका मकसद है। क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि दोनों बेटियां इंजीनियर बनें और उनका नाम रोशन करें। वहीं, अर्चना का भी कहना है कि पति की मौत के बाद वे बेटियों की परवरिश और शिक्षा में कोई कमी नहीं आने देंगी।
नंबर के आधार पर केस दर्ज
एसओ कंकरखेड़ा यादराम यादव के अनुसार घटनास्थल पर पुलिस को ऑल्टो कार की टूटी हुई नंबर प्लेट मिली थी। जिस पर यूपी15 एल 8408 नंबर दर्ज था। इस नंबर के आधार पर ही रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। बुधवार को परिवहन विभाग से इस नंबर की डिटेल निकलवाई जाएगी। नंबर के आधार पर ही कार मालिक या चालक का पता किया जा रहा है।
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रोहटा रोड स्थित गगन एंकलेव निवासी नीरज गोयल (45) पुत्र रमेश चंद गोयल आकाशवाणी दिल्ली में डिप्टी डायरेक्टर जनरल (रेडियो) के पद पर तैनात थे। मेरठ के किला रोड पर बन रहे आकाशवाणी केंद्र के पर्यवेक्षक के साथ वे आईईएस सेवा के अधिकारी भी थे। सोमवार रात करीब आठ बजे वह साइकिल से घर से घूमने निकले थे तो एक ऑल्टो कार ने उन्हें टक्कर मार दी थी। सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई थी। जबकि आरोपी कार चालक मौके से फरार हो गया था। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव जब घर पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया।
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रितिका ने निभाया बेटे का फर्ज
नीरज गोयल के परिवार में पत्नी अर्चना गोयल और दो बेटियां रितिका (15) व अक्षिता (12) ही हैं। दोनों बागपत रोड स्थित डीपीएस में कक्षा 11 और 9 में पढ़ती हैं। कोई बेटा नहीं है। जबकि अर्चना परतापुर स्थित एक पॉलीटेक्निक इंस्टीट्यूट में विभागाध्यक्ष हैं। मंगलवार को सूरजकुंड श्मशान घाट पर बड़ी बेटी रितिका ने ही पिता को मुखाग्नि दी। साथ ही अंतिम संस्कार की सभी क्रियाएं पूरी कराईं। जिसे देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।
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पिता का सपना पूरा करेंगी
दोनों बहनों ने बिलखते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि अचानक से एक झटके में उनके सिर से पिता का साया उठ जाएगा। अब जिंदगी का मकसद पिता के सपने को पूरा करना ही है। रितिका ने सुबकते हुए कहा कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा बेटों की तरह लाड़ प्यार किया और अच्छी शिक्षा दी। वे अपने पिता के विचारों को आदर्श मानते हुए समाज में उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगी। पढ़ लिखकर इंजीनियर बनना ही उनका मकसद है। क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि दोनों बेटियां इंजीनियर बनें और उनका नाम रोशन करें। वहीं, अर्चना का भी कहना है कि पति की मौत के बाद वे बेटियों की परवरिश और शिक्षा में कोई कमी नहीं आने देंगी।
नंबर के आधार पर केस दर्ज
एसओ कंकरखेड़ा यादराम यादव के अनुसार घटनास्थल पर पुलिस को ऑल्टो कार की टूटी हुई नंबर प्लेट मिली थी। जिस पर यूपी15 एल 8408 नंबर दर्ज था। इस नंबर के आधार पर ही रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। बुधवार को परिवहन विभाग से इस नंबर की डिटेल निकलवाई जाएगी। नंबर के आधार पर ही कार मालिक या चालक का पता किया जा रहा है।