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बेहतर तालमेल और प्लान से बड़ी चुनौती हुई आसान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2018 12:03 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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तीन लाख से ज्यादा स्वयं सेवक और 20 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े वाहन। सुरक्षा और यातायात के लिहाज से पुलिस प्रशासन के लिए संघ का राष्ट्रोदय कार्यक्रम किसी चुनौती से कम ना था, लेकिन पुलिस प्रशासन और स्वयं सेवकों के बेहतर तालमेल और व्यवस्थाओं से ये आयोजन शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।
दशकों बाद शहर में कोई इतना बड़ा आयोजन हुआ था। सबसे ज्यादा चिंता सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर थी। ऐसे में 15 दिन से पुलिस और प्रशासनिक अमला इसी की तैयारियों में जुटा था। सुरक्षा के लिए तीन कंपनी आरएएफ के अलावा 48 सीओ, 102 थानेदार और क रीब 950 दरोगाओं को लगाया गया था। 2000 सिपाहियों के अलावा होमगार्ड के 500 जवान भी लगे थे। वहीं स्पेशल कमांडो, स्पेशल पुलिस टीमें कार्यक्रम स्थल को घेरे में लिए थीं। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉयड ने कार्यक्रम से पहले वीआईपी गेट नंबर एक और कार्यक्रम स्थल की सघन तलाशी ली। इसी गेट से संघ प्रमुख और वीवीआईपी लोगों को कार्यक्रम में जाना था। कार्यक्रम स्थल के लिए बनाए गए सभी 11 मार्ग (गेट) की क मान एक एएसपी को दी गई थी। महिलाओं के प्रवेश को बनाए गए गेट नंबर दो पर महिला पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को लगाया गया था।
डटे रहे आला अफसर
मंडलायुक्त प्रभात कुमार, एडीजी प्रशांत कुमार, डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी मंजिल सैनी, एसपी सिटी, एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट सहित आला अफसर खुद कार्यक्रम स्थल पर डटकर व्यवस्थाओं पर नजर रखे थे। वहीं कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले सभी 11 मार्गों पर पड़ने वाले मुख्य चौराहों पर पुलिस फोर्स के अलावा फायर ब्रिगेड की टीम भी लगी थीं। तेजगढ़ी चौराहा, पीवीएस, हापुड़ रोड चौराहा, वीआईपी गेट के पास दंगा नियंत्रण वाहन भी लगे थे।
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स्वयं सेवकों ने किया पूरा सहयोग
संघ के भी पांच हजार से अधिक स्वयं सेवकों को सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाने में लगाया गया था । कार्यक्रम स्थल को जाने वाले सभी 11 गेट पर पुलिस के साथ स्वयं सेवकों की टीमें लगाई गई थीं। हर जगह पुलिस और स्वयं सेवकों की टीम आपसी तालमेल से काम कर रही थीं।
200 ट्रैफिक पुलिसकर्मी थे तैनात
कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मुख्य मार्गों पर 200 यातायात पुलिस कर्मियों को लगाया गया था। बाहरी जनपदों से भी यातायात कर्मी बुलाए गए थे। एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी खुद सभी मार्गों का दौरा कर व्यवस्थाएं चेक कर रहे थे। पार्किंग स्थलों पर अधिकांश व्यवस्था स्वयं सेवकों ने संभाली हुई थीं।
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दशकों बाद शहर में कोई इतना बड़ा आयोजन हुआ था। सबसे ज्यादा चिंता सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर थी। ऐसे में 15 दिन से पुलिस और प्रशासनिक अमला इसी की तैयारियों में जुटा था। सुरक्षा के लिए तीन कंपनी आरएएफ के अलावा 48 सीओ, 102 थानेदार और क रीब 950 दरोगाओं को लगाया गया था। 2000 सिपाहियों के अलावा होमगार्ड के 500 जवान भी लगे थे। वहीं स्पेशल कमांडो, स्पेशल पुलिस टीमें कार्यक्रम स्थल को घेरे में लिए थीं। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉयड ने कार्यक्रम से पहले वीआईपी गेट नंबर एक और कार्यक्रम स्थल की सघन तलाशी ली। इसी गेट से संघ प्रमुख और वीवीआईपी लोगों को कार्यक्रम में जाना था। कार्यक्रम स्थल के लिए बनाए गए सभी 11 मार्ग (गेट) की क मान एक एएसपी को दी गई थी। महिलाओं के प्रवेश को बनाए गए गेट नंबर दो पर महिला पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को लगाया गया था।
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डटे रहे आला अफसर
मंडलायुक्त प्रभात कुमार, एडीजी प्रशांत कुमार, डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी मंजिल सैनी, एसपी सिटी, एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट सहित आला अफसर खुद कार्यक्रम स्थल पर डटकर व्यवस्थाओं पर नजर रखे थे। वहीं कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले सभी 11 मार्गों पर पड़ने वाले मुख्य चौराहों पर पुलिस फोर्स के अलावा फायर ब्रिगेड की टीम भी लगी थीं। तेजगढ़ी चौराहा, पीवीएस, हापुड़ रोड चौराहा, वीआईपी गेट के पास दंगा नियंत्रण वाहन भी लगे थे।
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स्वयं सेवकों ने किया पूरा सहयोग
संघ के भी पांच हजार से अधिक स्वयं सेवकों को सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाने में लगाया गया था । कार्यक्रम स्थल को जाने वाले सभी 11 गेट पर पुलिस के साथ स्वयं सेवकों की टीमें लगाई गई थीं। हर जगह पुलिस और स्वयं सेवकों की टीम आपसी तालमेल से काम कर रही थीं।
200 ट्रैफिक पुलिसकर्मी थे तैनात
कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मुख्य मार्गों पर 200 यातायात पुलिस कर्मियों को लगाया गया था। बाहरी जनपदों से भी यातायात कर्मी बुलाए गए थे। एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी खुद सभी मार्गों का दौरा कर व्यवस्थाएं चेक कर रहे थे। पार्किंग स्थलों पर अधिकांश व्यवस्था स्वयं सेवकों ने संभाली हुई थीं।