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बीस प्रधान और दो रिटायर्ड डीएसपी थे बवाल के सूत्रधार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Apr 2018 01:03 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दो अप्रैल को शहर में दलित विरोध के दौरान हुए बवाल में पुलिस के निशाने पर बीस गांवों के प्रधान और दो रिटायर्ड डिप्टी एसपी हैं। जांच में सामने आ रहा कि इन प्रधानों और दोनों रिटायर्ड अधिकारियों ने शहर में बवाल कराने में अहम भूमिका अदा की थी। वीडियो फुटेज से भी इस बात का खुलासा हुआ है कि इस बवाल को अंजाम देेने वाली 90 प्रतिशत बवाली देहात क्षेत्र से ही आए थे।
भारत बंद के दौरान सोमवार को आंबेडकर चौक पर सबसे ज्यादा बवाली जुटे थे। एफआईआर में इन बवालियों की संख्या दो हजार से अधिक बताई गई। बुधवार को आंबेडकर चौक पर उपद्रव की घटना की पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। फोकस बवालियों के अलावा वे लोग भी पुलिस के टारगेट पर हैं, जिन्होंने इस पूरे उपद्रव का नेतृत्व किया। इतनी भीड़ का रिमोट आखिर किसे हाथ में था, इस पर सबसे ज्यादा मशक्कत चल रही है। इसी को लेकर पूर्व विधायक योगेश वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। बाकी लोगों को भी तलाश करने की बात कही जा रही है। उच्च अधिकारियों ने वीडियो फुटेज खंगाली तो पता चला कि अधिकांश भीड़ देहात के मार्गों से आई थी। ऐसे बीस गांवों की लिस्ट बनायी गयी हैं, जिनके लोग मुख्य रूप से बवालियों में शामिल थे।
सीक्रेट मीटिंग की बात आ रही सामने
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बीस गांवों के प्रधानों ने दंगाई दस्तों पर सीक्रेेट मीटिंग की और बवाल कराने में अहम भूमिका अदा की। महत्वपूर्ण बात यह सामने आ रही है कि दो रिटायर्ड डीएसपी भी इस पूरी योजना में शामिल रहे। दरअसल गांवों के प्रधान तथा दोनों रिटायर्ड अधिकारी विभिन्न दलित संगठनों से जुड़े हैं। उन्होंने सुबह आठ बजे से ही दलित समाज के युवाओं को आंबेडकर चौक पर पहुंचने का आह्वान किया गया। घटना के वक्त गांव के प्रधान भी भीड़ के साथ शहर की तरफ पहुंचे थे। ये दोनों रिटायर्ड अधिकारी भी आंबेडकर चौक पर ही मुस्तैद रहे। मुख्य स्थानों पर भी पुलिस ने सोमवार सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक की सीसीटीवी फुटेज की जांच तो देहात के बवालियों के बारे में पता चल सका। इन सभी की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है।
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पुलिस अफसरों की हुई मीटिंग
बुधवार सुबह पुलिस अफसरों की मीटिंग हुई। इसके बाद शाम को गांवों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए। थाना प्रभारियों से इन सूची मांगी गई है। इनके लिए सीओ और एडिशनल एसपी को जिम्मेदारी दी गई है। परतापुर थाने में एक दर्जन गांवों के लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इनके अलावा जानी, सरूरपुर थाना क्षेत्र के एक दर्जन गांवों की जांच शुरू की गई है। किला रोड के तीन गांव शामिल हैं। मवाना रोड के गंगानगर थाना क्षेत्र और इंचौली थाना क्षेत्र के एक दर्जन गांवों की जांच शुरूकर दी गई है।
वर्जन
पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी सरकार से पेंशन ले रहे हैं। किसी भी मामले में वह विभाग की छवि धूमिल नहीं कर सकते और यह तो मामला ही इतना ंभीर है। आंबेडकर चौक पर हुए धरना प्रदर्शन में रिटायर्ड डीएसपी के मौजूद रहने की बात सामने आई है। इस पर जांच की जा रही है
- मानसिंह चौहान, एसपी सिटी
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भारत बंद के दौरान सोमवार को आंबेडकर चौक पर सबसे ज्यादा बवाली जुटे थे। एफआईआर में इन बवालियों की संख्या दो हजार से अधिक बताई गई। बुधवार को आंबेडकर चौक पर उपद्रव की घटना की पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। फोकस बवालियों के अलावा वे लोग भी पुलिस के टारगेट पर हैं, जिन्होंने इस पूरे उपद्रव का नेतृत्व किया। इतनी भीड़ का रिमोट आखिर किसे हाथ में था, इस पर सबसे ज्यादा मशक्कत चल रही है। इसी को लेकर पूर्व विधायक योगेश वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। बाकी लोगों को भी तलाश करने की बात कही जा रही है। उच्च अधिकारियों ने वीडियो फुटेज खंगाली तो पता चला कि अधिकांश भीड़ देहात के मार्गों से आई थी। ऐसे बीस गांवों की लिस्ट बनायी गयी हैं, जिनके लोग मुख्य रूप से बवालियों में शामिल थे।
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सीक्रेट मीटिंग की बात आ रही सामने
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बीस गांवों के प्रधानों ने दंगाई दस्तों पर सीक्रेेट मीटिंग की और बवाल कराने में अहम भूमिका अदा की। महत्वपूर्ण बात यह सामने आ रही है कि दो रिटायर्ड डीएसपी भी इस पूरी योजना में शामिल रहे। दरअसल गांवों के प्रधान तथा दोनों रिटायर्ड अधिकारी विभिन्न दलित संगठनों से जुड़े हैं। उन्होंने सुबह आठ बजे से ही दलित समाज के युवाओं को आंबेडकर चौक पर पहुंचने का आह्वान किया गया। घटना के वक्त गांव के प्रधान भी भीड़ के साथ शहर की तरफ पहुंचे थे। ये दोनों रिटायर्ड अधिकारी भी आंबेडकर चौक पर ही मुस्तैद रहे। मुख्य स्थानों पर भी पुलिस ने सोमवार सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक की सीसीटीवी फुटेज की जांच तो देहात के बवालियों के बारे में पता चल सका। इन सभी की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है।
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पुलिस अफसरों की हुई मीटिंग
बुधवार सुबह पुलिस अफसरों की मीटिंग हुई। इसके बाद शाम को गांवों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए। थाना प्रभारियों से इन सूची मांगी गई है। इनके लिए सीओ और एडिशनल एसपी को जिम्मेदारी दी गई है। परतापुर थाने में एक दर्जन गांवों के लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इनके अलावा जानी, सरूरपुर थाना क्षेत्र के एक दर्जन गांवों की जांच शुरू की गई है। किला रोड के तीन गांव शामिल हैं। मवाना रोड के गंगानगर थाना क्षेत्र और इंचौली थाना क्षेत्र के एक दर्जन गांवों की जांच शुरूकर दी गई है।
वर्जन
पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी सरकार से पेंशन ले रहे हैं। किसी भी मामले में वह विभाग की छवि धूमिल नहीं कर सकते और यह तो मामला ही इतना ंभीर है। आंबेडकर चौक पर हुए धरना प्रदर्शन में रिटायर्ड डीएसपी के मौजूद रहने की बात सामने आई है। इस पर जांच की जा रही है
- मानसिंह चौहान, एसपी सिटी