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बरनावा लाक्षागृह : टीले से बाहर झांक रहा इतिहास, पढ़ें पूरा अपडेट

Fri, 19 Jan 2018 05:23 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत Updated Fri, 19 Jan 2018 05:23 PM IST
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Barnava Lakshagrah : peeping history out of the mound, read complete update
बरनावा लाक्षागृह - फोटो : अमर उजाला

बरनावा में हिंडन नदी किनारे किए जा रहे उत्खनन कार्य में उल्लेखनीय चीजें नहीं मिली है। उधर, ट्रैंच के नजदीक टीले की सफाई होते ही मिट्टी में दबी पुरानी ईंटें दिखाई पड़ने लगी। उत्खनन स्थल के नजदीक टीले में दबी यह ईंटें करीब ढाई हजार साल पुरानी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। टीला क्षेत्र की सफाई का कार्य किया जा रहा है।

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पुरातत्व पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम हिंडन नदी के किनारे बरनावा में उत्खनन कर रही है। उत्खनन के लिए बनाए गए ट्रैंच में गड्ढ़े खोदे गए हैं। जिस जगह उत्खनन किया जा रहा है, वहां से अभी तक मिट्टी के पुराने समय के बर्तनों के अवशेष, एक पुराना सिक्का मिलने की चर्चा है। उधर, बृहस्पतिवार को मजदूरों ने टीला क्षेत्र में सफाई का कार्य शुरू कर दिया। झाड़ी हटते ही टीले की मिट्टी में दबी पुरानी ईंटें बाहर से ही दिखाई पड़ रही है। मिट्टी के टीले में ऐसे कई जगह हैं, जहां यह ईंटें दिख रही है, इनके अलावा पुरानी दीवार होने का अनुमान है। हालांकि इस क्षेत्र में अभी उत्खनन नहीं किया जा रहा है। इन ईंटों के भी करीब ढाई हजार साल पुरानी होने का अनुमान है। पुरातत्व विभाग की टीम ने अभी तक उत्खनन और सफाई के दौरान मिलने वाली चीजों की पुष्टि नहीं की है।
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बरनावा की विवादित जमीन पर 22 को सुनवाई
बरनावा गांव में टीले की जमीन के विवादित जमीन के प्रकरण में अब 22 जनवरी को सुनवाई होगी। वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता शाहिद अली ने बताया कि सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम में यह प्रकरण चल रहा है। बृहस्पतिवार को प्रकरण की सुनवाई के लिए अगली तिथि तय की गई है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि करीब 36 बीघा जमीन उनकी है और इसमें कब्रिस्तान था। उधर, श्री गांधी धाम आश्रम समिति का कहना है कि कृष्णदत्त ब्रह्मचारी ने यहां पर शिक्षा का प्रचार किया। यही नहीं गुरुकुल की स्थापना की थी। वर्तमान में भी शिक्षण संस्था संचालित है।

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