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एनजीटी ने यूपी सरकार से जवाब मांगा, मुख्य सचिव को दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

Sun, 17 Mar 2019 12:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 17 Mar 2019 12:04 AM IST
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Baghpat, NGT has sought a reply from the UP government, and warned the Chief Secretary of action
फाइल फोटो - फोटो : गूगल

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दोआबा पर्यावरण समिति के मुकदमों में पारित आदेश की अवहेलना करने पर यूपी सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही अधिकारियों को अवहेलना के लिए एनजीटी के नियमों के अनुसार मुख्य सचिव को कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। मामला यूपी के बागपत जनपद का है। 

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दोआबा पर्यावरण समिति दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने बताया कि एनजीटी ने सरकार व अधिकारियों की लापरवाही को लेकर दोआबा पर्यावरण समिति द्वारा उठाए मुद्दों को गंभीरता से लिया। 16 जनवरी 2018 को कमेटी का गठन किया।
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इसमें केंद्रीय प्रदूषण, यूपी प्रदूषण विभाग, जल निगम, केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के भूतपूर्व मेंबर सचिव की टीम बनाई। कमेटी की रिपोर्ट पर 124 फैक्ट्ररियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। जिला मजिस्ट्रेट को भी जिला स्तर पर कार्रवाई के आदेश दिए। एनजीटी ने जस्टिस एसयू खान को इस आदेश का पालन कराने के लिए चेयरमैन नियुक्त किया।
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जस्टिस एसयू खान ने अपनी रिपोर्ट 11 फरवरी 2019 को एनजीटी दिल्ली में सौंप दी। इसमें बताया कि जिला सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर की फैक्ट्ररियों व शहरों का पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में डाला जा रहा है। इस आदेश के बाद 118 फैक्ट्ररियां बंद कीं। इसमें 28 को उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आदेश पालन करा कर खोल दिया है।

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इलाकों में जहां लोग पीड़ित हैं, न तो कोई स्वास्थ्य का चैक अप हुआ और न ही कोई जनता के लिए जागरूकता का कार्यक्रम किया। गांवों के हैंडपंप अभी भी गंदा पानी उगल रहे हैं। लोग अभी भी इस गंदे पानी को पी रहे हैं। अधिकारियों ने जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया। सरकार ने दूषित पानी से ग्रसित मरीजों तथा मृतकों को जो मुआवजा देने था, उनकी पहचान तक नहीं की। कमेटी ने अपनी सिफारिश की है कि सरकार नदियों को साफ सुथरा समय सीमा में करें। 

एनजीटी ने आदेश किया है कि अधिकारी इस आदेश को ढिलाई से न लें और मुख्य सचिव को अधिकारियों के प्रति रोष जताया है। जो अधिकारी इसकी अवहेलना करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। मुख्य सचिव को मॉनिटरिंग टीम को सभी सुविधा देने के आदेश दिए। हेड ऑफ डिपार्टमेंट यदि गलत पाया जाता है, तो उसके खिलाफ 10 करोड़ का जुर्माना और तीन साल की सजा का प्रावधान भी नियम के तहत किया जा सकता है। इसके लिए सरकार पांच करोड़ की परफोरमेंस गारंटी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड में जमा कराएगी। पालन न होने पर यह राशि जब्त कर ली जाएगी। अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।

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