शुक्रवार रात 8:50 बजे। गंगानगर स्थित एपेक्स कॉम्प्लेक्स में स्थित कृष्णा मेडिकल स्टोर पर हथियारों से लैस बदमाश पहुंचे। बदमाशों ने मेडिकल स्टोर संचालक संजीव सैनी पर हमला कर नगदी लूट ली। इसके बाद बदमाश गंगानगर में घूमते रहे, लेकिन इस वारदात में पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई। इसके बाद बदमाशों ने गंगानगर थाने के बगल में सीएनजी पंप पर रात 9:50 बजे डकैती की वारदात को अंजाम दे दिया।
यूपी: पांच दिन में दूसरी बड़ी वारदात से थर्राया मेरठ, हथियारबंद बदमाशों ने एक घंटा बरपाया कहर
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लाइट जाते ही तानी पिस्टल
सीएनजी पंप के सीसीटीवी में पूरी वारदात कैद है। बदमाशों ने आठ मिनट 20 सेकेंड सीएनजी पंप पर कहर बरपाया। बदमाश दो बाइक पर आए।और कर्मचारियों से टाइम पूछा। उस समय कर्मचारी पंप को बंद करने की तैयारी कर रहे थे। बदमाश और कर्मचारी आपस में बातचीत कर रहे थे, तभी लाइट चली गई। इसी दौरान बदमाशों ने कर्मचारियों की कनपटी पर पिस्टल तान दी।
केबिन में बंधक बनाकर मारी गोली
पिस्टल से लैस बदमाशों ने कर्मचारियों से केबिन में चलने की बात कही। पहले तो कर्मचारी इसे मजाक मानते रहे, लेकिन जब बदमाशों ने कनपटी पर पिस्टल तानी, तब कर्मचारियों में दहशत हुई। मैनेजर शेर सिंह, कर्मचारी प्रदीप सोम, प्रदीप शर्मा, शुभम गिरि को केबिन और केबिन के अंदर वाले कमरे में रामकेश और प्रवीण उर्फ राहुल को बंद कर दिया। छीना झपटी के दौरान बदमाशों ने केबिन में ही मैनेजर शेर सिंह को गोली मारी, जो कि उसके जांघ में लगी। बदमाशों ने कर्मचारियों को तमंचे, पिस्टल की बट से पीटना शुरू कर दिया।
सटीक रेकी के बाद वारदात
बदमाशों ने दोनों वारदात सटीक रेकी के बाद की हैं। बदमाश पेट्रोल पंप पर पानी पीने का बहाना कर रहे थे। कर्मचारियों ने बदमाशों से कहा कि यहां से चले जाओ। क्योंकि पंप रात 10 बजे बंद हो जाता है। वहीं कर्मचारी शिवम गिरि ने बताया कि केबिन से उसने 100 नंबर पर कॉल करने का प्रयास किया था, तभी एक बदमाश ने उसके मुंह पर मुक्का मारा और सिर पर पिस्टल की बट। उसके बाद बदमाशों ने सबके मोबाइल और जेबों से कैश भी छीन लिया।
5 दिन में दूसरी बड़ी वारदात, थर्राया मेरठ
बदमाशों ने शहर की कानून व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। लूट की कई घटनाएं पुलिस अफसरों के लिए चुनौती बन गई हैं। पुलिस अफसर ऑफिसों में बैठकर बड़े बड़े दावे करते हैं, लेकिन शाम होते ही बदमाश कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा देते हैं। लूट और हत्या जैसी घटना नहीं खुलती तो अफसर संदिग्ध बताकर पीड़ित को धमकाने लगते हैं।