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कुख्यात बदन सिंह बद्दो की फरारी का मामला: एमडीए को शासन के आदेश का इंतजार, पुलिस चल रही कछुआ चाल 

Sun, 26 Jul 2020 04:24 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 26 Jul 2020 04:24 PM IST
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Badan Singh Baddo absconding case: MDA awaiting government order in meerut
बदन सिंह बद्दो - फोटो : अमर उजाला
कुख्यात बदन सिंह बद्दो की फरारी में होटल मुकुट महल के मालिक मुकेश गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद रिश्वत के आरोप में घिरी पुलिस ने होटल मालिक पर चौतरफा दबाव बनाया। तब लगा कि होटल पर बड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन कार्रवाई सिर्फ लाइसेंस निरस्तीकरण से आगे नहीं बढ़ पाई। यह दबाव तब तक अधिक रहा जब तक एसपी देहात गाजियाबाद के यहां व्यापारी बयान नहीं दे आए। बयान के बाद अधिकारी आश्वस्त हो गए हैं। चर्चा है कि इन्हीं कारणों से कार्रवाई भी कछुआ चाल चल रही है कि बयान उनके हक में हैं।
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28 मार्च 2019 को होटल मुकुट महल से पुलिस कस्टडी से फरार हुए बद्दो का आज तक कुछ पता नहीं चला है। बद्दो की फरारी में शामिल होटल मालिक की गिरफ्तारी में पुलिस ने पहले देरी की और उसका फायदा उठाकर वह हाईकोर्ट से चार्जशीट दाखिल होने तक स्टे ले आए।
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कानपुर प्रकरण के बाद पुलिस को एक साल बाद बद्दो की याद आई। आनन फानन में चार्जशीट दाखिल कर होटल मालिक मुकेश गुप्ता को जेल भेज दिया गया। मुकेश की गिरफ्तारी के बाद उनके भाई नरेश कंसल ने आरोप लगाया कि उन्होंने संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता को 10 लाख रुपये दिए थे। नवीन गुप्ता ने एसपी सिटी के माध्यम से पूरा मामला मैनेज कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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जिसके बाद संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता और एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण आरोपों के घेरे में आ गए, जिसकी जांच एसपी देहात गाजियाबाद नीरज जादौन कर रहे हैं। जब तक जांच शुरू होती, पुलिस ने अपना दूसरा काम शुरू कर दिया।

एमडीए, अग्निशमन और आबकारी विभाग को जांच के न केवल आदेश दिए, बल्कि पत्रावली भी मंगा ली। मामले में अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए होटल मुकुट महल का सराय एक्ट के तहत जारी लाइसेंस निरस्त कर दिया। लेकिन एमडीए मामले पर चुप्पी साधकर बैठ गया और उसे अब शासन के आदेश का इंतजार है। 

कहीं दबाव बनाने की तो नहीं थी मंशा 
इस मामले में अब एक बार फिर मेरठ पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों से बचने के लिए पुलिस ने जिस तरह आनन फानन में होटल मुकुट महल ही नहीं बल्कि होटल मालिक ही अन्य दूसरी संपत्ति पर जांच बैठाई।

वह कहीं न कहीं अब दबाव की मंशा से की गई कार्रवाई नजर आ रही है। क्योंकि अब पुलिस इस तरफ से चुप्पी साधकर बैठ गई है। जबकि उम्मीद की जा रही थी कि होटल में हुए अवैध निर्माण पर पुलिस और एमडीए कार्रवाई शुरू करेंगे, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। 

बयानों के बाद सभी ले रहे राहत की सांस
एसपी देहात गाजियाबाद इस मामले की जांच कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार नरेश कंसल ने पहले एसपी सिटी के नाम पर नवीन गुप्ता को रिश्वत देने का आरोप लगाया था, वहीं अब वे पलट गए हैं। उन्होंने बयानों में कहा है कि उन्होंने नवीन गुप्ता को 10 लाख मजबूत पैरवी के लिए दिए थे, लेकिन वे पैरवी नहीं करा पाए। कंसल का यह बयान किसी के गले नहीं उतर रहा है। क्योंकि वे स्वयं इतने सक्षम हैं कि जब पहले हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले आए थे, तो उसके बाद भी पैरवी मजबूती से करा सकते थे। ऐसे में उनका बयानों से पलटना कहीं न कहीं दबाव को माना जा रहा है। 

नवीन के विरोधी भी नहीं दे पाए विपक्ष में बयान 
दूसरी अहम बात ये रही कि एसपी देहात गाजियाबाद के सामने वो सभी 10 व्यापारी उपस्थित हुए, जो फैसले में थे। इन व्यापारियों में दो व्यापारी ऐसे भी थे, जो अब नवीन गुप्ता के विरोधी हैं। लेकिन एसपी देहात के सामने उन्होंने भी नवीन गुप्ता के सामने आरोपों की पुष्टि में बयान नहीं दिए। बाकी व्यापारियों ने जहां लगभग एक जैसे बयान दिए तो एक व्यापारी ने अपनी मौजूदगी से ही इंकार कर दिया।

करीबी लोगों की संपत्ति की होगी जांच
बद्दो के चार करीबी लोगों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त की रिपोर्ट के बाद उनकी बेनामी संपत्ति की जांच के लिए नोटिस भेजे गए हैं। शनिवार को पुलिस ने संपत्ति की जांच के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी को चिट्ठी लिख दी है। पुलिस का मानना है कि बद्दो द्वारा अपराध से कमाई गई संपत्ति उसने अपने परिचितों के नाम की हुई है। एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि बदन सिंह बद्दो से जुड़े कई और लोगों के नाम जांच में सामने आ रहे हैं। उनके खिलाफ भी सुबूत तलाश कर कार्रवाई की जा रही है। 

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