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डीएम बोले, गर्ल की स्पेलिंग बताओ, बच्चे बोले पता नहीं
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Thu, 04 Aug 2016 02:15 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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ऐसा गांव जिसे जिलाधिकारी ने ही गोद लिया हो और उसकी प्राइमरी पाठशाला में शिक्षा का स्तर बेहद गिरा हो तो बाकी विद्यालयों का क्या हाल होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। जिलाधिकारी ने खुद के गोद लिए गांव उलखपुर में प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक के बच्चों से पूछा कि गर्ल की क्या स्पेलिंग होती है तो बच्चे बोले, पता नहीं। गणित, अंग्रेजी आदि के सवाल पूछे, पहाड़े सुने पर आठवीं क्लास तक के बच्चे अधिकतर सवालों के जवाब नहीं दे पाए।
सरकार ने अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को गांव गोद देकर उनमें सुधार करने को कहा है। सर्वांगीण विकास के साथ ही बच्चों का शैक्षिक स्तर भी उठाने की बात कही गई है। यहां जिलाधिकारी के हिस्से में दौराला ब्लॉक का गांव उलखपुर है। जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी को जिले में आए कुछ दिन ही हुए हैं। लेकिन इससे पूर्व भी इस गांव में काम कराने की मशक्कत होती रही है। जिसकी बानगी बुधवार को उस समय सामने आई जब जिलाधिकारी ने गांव के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय पहुंचकर बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता परखनी शुरू कर दी।
डीएम ने कक्षा आठ के एक बच्चे से ‘मैं जाता हूं’ को अंग्रेजी में कैसे कहोगे पूछा तो कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कई अन्य छात्रों से पूछा पर बच्चे नहीं बता पाए। नाराज डीएम ने पूछा कि गर्ल की क्या स्पेलिंग होती है? इस पर भी बच्चे चुप। कहा कि डरो नहीं, बताओ तो बच्चे बोले कि पता नहीं। दशमलव दो गुणा दशमलव दो कितना होगा पूछा तो बच्चे फिर गोल हो गए। डीएम ने एक बच्चे को ब्लैक बोर्ड पर खड़ा कर कहा कि दस को चार से भाग देकर दिखाओ तो बच्चे इस सवाल को भी नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने मैंगो की स्पेलिंग पूछी तो बच्चाें ने यह बता दी। गुणा, भाग के सवाल, पहाडे़ व अंग्रेजी के कई सवाल पूछे। लेकिन अधिकांश बच्चों ने इनके सही जवाब नहीं दिए। उधर, जवाब बच्चे नहीं दे रहेे थे और हालत अध्यापकों की खराब हो रही थी
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‘एक माह में सुधार दो बच्चों को’
इस स्थिति पर शिक्षकों से बेहद नाराज जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की शिक्षा में एक माह में सुधार ले आओ। ये बच्चे कल का भविष्य हैं, जिनकी तालीम में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। यदि यह हाल रहेगा तो कैसे चलेगा? अध्यापक पूर्ण मनोयोग व निष्ठा से अपने दायित्व निभाएं। कहा कि उपस्थिति भी किसी भी सूरत में कम नहीं रहनी चाहिए। न बच्चाें की और न ही अध्यापकों की। ठीक एक माह बाद फिर से निरीक्षण होगा। हालांकि उनके जाने के बाद शिक्षकों ने कहा कि बच्चे जानते तो थे, पर घबरा गए और कुछ बता नहीं पाए। शायद प्रेशर में आ गए।
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सरकार ने अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को गांव गोद देकर उनमें सुधार करने को कहा है। सर्वांगीण विकास के साथ ही बच्चों का शैक्षिक स्तर भी उठाने की बात कही गई है। यहां जिलाधिकारी के हिस्से में दौराला ब्लॉक का गांव उलखपुर है। जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी को जिले में आए कुछ दिन ही हुए हैं। लेकिन इससे पूर्व भी इस गांव में काम कराने की मशक्कत होती रही है। जिसकी बानगी बुधवार को उस समय सामने आई जब जिलाधिकारी ने गांव के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय पहुंचकर बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता परखनी शुरू कर दी।
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डीएम ने कक्षा आठ के एक बच्चे से ‘मैं जाता हूं’ को अंग्रेजी में कैसे कहोगे पूछा तो कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कई अन्य छात्रों से पूछा पर बच्चे नहीं बता पाए। नाराज डीएम ने पूछा कि गर्ल की क्या स्पेलिंग होती है? इस पर भी बच्चे चुप। कहा कि डरो नहीं, बताओ तो बच्चे बोले कि पता नहीं। दशमलव दो गुणा दशमलव दो कितना होगा पूछा तो बच्चे फिर गोल हो गए। डीएम ने एक बच्चे को ब्लैक बोर्ड पर खड़ा कर कहा कि दस को चार से भाग देकर दिखाओ तो बच्चे इस सवाल को भी नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने मैंगो की स्पेलिंग पूछी तो बच्चाें ने यह बता दी। गुणा, भाग के सवाल, पहाडे़ व अंग्रेजी के कई सवाल पूछे। लेकिन अधिकांश बच्चों ने इनके सही जवाब नहीं दिए। उधर, जवाब बच्चे नहीं दे रहेे थे और हालत अध्यापकों की खराब हो रही थी
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‘एक माह में सुधार दो बच्चों को’
इस स्थिति पर शिक्षकों से बेहद नाराज जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की शिक्षा में एक माह में सुधार ले आओ। ये बच्चे कल का भविष्य हैं, जिनकी तालीम में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। यदि यह हाल रहेगा तो कैसे चलेगा? अध्यापक पूर्ण मनोयोग व निष्ठा से अपने दायित्व निभाएं। कहा कि उपस्थिति भी किसी भी सूरत में कम नहीं रहनी चाहिए। न बच्चाें की और न ही अध्यापकों की। ठीक एक माह बाद फिर से निरीक्षण होगा। हालांकि उनके जाने के बाद शिक्षकों ने कहा कि बच्चे जानते तो थे, पर घबरा गए और कुछ बता नहीं पाए। शायद प्रेशर में आ गए।