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बासमती की मॉनिटरिंग अब मोबाइल एप पर
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Mon, 22 Aug 2016 01:49 AM IST
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डॉ. रितेश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय बासमती को वैश्विक स्तर पर खरा साबित करने की विशेष कवायद चल रही है। बासमती धान की खेती के टिप्स और सही रसायन मिश्रण की सटीक जानकारी के लिए मोबाइल एप का सहारा लिया जा रहा है। जिसे एग्रीकल्चरस एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलेपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) और बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम मिलकर तैयार कर रहे हैं। इस एप से यूपी, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के किसानों को खास फायदा होगा।
यूं पड़ी इसकी जरूरत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बासमती धान की खेती के दौरान रसायनों का गलत प्रयोग करने का असर सीधे उसके उत्पादन और क्वालिटी पर पड़ता है। जिसके कारण कई बार विदेशों से बासमती लौटाया जा चुका है। यह बड़ी समस्या है। किसानों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए मोबाइल एप से जोड़ने का निर्णय लिया गया।
‘एपराइजा’ सुलझाएगा समस्या
किसानों को बासमती की खेती से जुड़ी प्रत्येक जानकारी देने के लिए खास तरह का मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है जिसे ‘एपराइजा’ नाम दिया गया है। एप बताएगा कि सही रसायन, कब कितना और कैसे प्रयोग करें। किसान बासमती में मानक के अनुसार खाद, पानी का इस्तेमाल करेंगे। एप के माध्यम से किसानों को पता चल जाएगा कि उसे कौन सा कीटनाशक या अन्य रसायन फसल में इस्तेमाल करना है। जिससे विश्व स्तर पर बासमती मानक पर खरा उतरेगा।
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अपने आप में पहला एप
भारत में अपनी तरह के इस पहले मोबाइल एप में हरियाणा, पंजाब, मेरठ, जम्मू एंड के कृषि विवि को शामिल किया गया है। इसमें हरियाणा कृषि विवि ने कमेटी भी बना दी है। अन्य जगहों पर काम चल रहा है। इस मामले में अभी तक हरियाणा आगे है। मोदीपुरम कृषि विवि ने भी अभी कोई शुुरुआत नहीं की है।
यह होगा फायदा
बासमती के आयात-निर्यात को यूरोपियन फेडरेशन ऑफ राइस इंडस्ट्री देखता है। बासमती में अधिक रसायन की शिकायत पर बासमती का वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। इस एप से खासतौर से किसानों को बताया जाएगा कि कब और कितना रसायन डालना है। इसकी पूरी जानकारी बीईडीएफ मोदीपुरम के पास रहेगी। किसान इसके प्रति जागरूक रहेंगे तो जहां बाजार में फसल के दाम सामान्य फसल के मुकाबले अधिक मिलेंगे तो एक्सपोर्ट बासमती की क्वालिटी भी उच्चस्तरीय रहेगी।
ये रसायन है खतरनाक
विपरो फैजिन, कार्बांडाजिम, ट्राइसाइक्लाजोन, प्रोपीकोनाजॉल, आईसोप्रोथीलीन, वेलीडानाईसिस
यह कीट है बासमती में लगने खतरनाक
गर्दन तोड़, शीथ ब्लाइट, लीफ ब्लाइट, झंडा रोग, तना छेदक, भूरा फूंदका, पत्ती लपेटक, गंधी बग
क्या है एपराइजा
चावल का साइंटिफिक नाम औराइजा सरायवा है। इसका इंडियन नाम एपराइजा है। तभी इसे एपराइजा नाम दिया गया है। किसान इस एप के जरिये कृषि वैज्ञानिकों से सीधे जुड़ जाएंगे।
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यूं पड़ी इसकी जरूरत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बासमती धान की खेती के दौरान रसायनों का गलत प्रयोग करने का असर सीधे उसके उत्पादन और क्वालिटी पर पड़ता है। जिसके कारण कई बार विदेशों से बासमती लौटाया जा चुका है। यह बड़ी समस्या है। किसानों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए मोबाइल एप से जोड़ने का निर्णय लिया गया।
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‘एपराइजा’ सुलझाएगा समस्या
किसानों को बासमती की खेती से जुड़ी प्रत्येक जानकारी देने के लिए खास तरह का मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है जिसे ‘एपराइजा’ नाम दिया गया है। एप बताएगा कि सही रसायन, कब कितना और कैसे प्रयोग करें। किसान बासमती में मानक के अनुसार खाद, पानी का इस्तेमाल करेंगे। एप के माध्यम से किसानों को पता चल जाएगा कि उसे कौन सा कीटनाशक या अन्य रसायन फसल में इस्तेमाल करना है। जिससे विश्व स्तर पर बासमती मानक पर खरा उतरेगा।
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अपने आप में पहला एप
भारत में अपनी तरह के इस पहले मोबाइल एप में हरियाणा, पंजाब, मेरठ, जम्मू एंड के कृषि विवि को शामिल किया गया है। इसमें हरियाणा कृषि विवि ने कमेटी भी बना दी है। अन्य जगहों पर काम चल रहा है। इस मामले में अभी तक हरियाणा आगे है। मोदीपुरम कृषि विवि ने भी अभी कोई शुुरुआत नहीं की है।
यह होगा फायदा
बासमती के आयात-निर्यात को यूरोपियन फेडरेशन ऑफ राइस इंडस्ट्री देखता है। बासमती में अधिक रसायन की शिकायत पर बासमती का वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। इस एप से खासतौर से किसानों को बताया जाएगा कि कब और कितना रसायन डालना है। इसकी पूरी जानकारी बीईडीएफ मोदीपुरम के पास रहेगी। किसान इसके प्रति जागरूक रहेंगे तो जहां बाजार में फसल के दाम सामान्य फसल के मुकाबले अधिक मिलेंगे तो एक्सपोर्ट बासमती की क्वालिटी भी उच्चस्तरीय रहेगी।
ये रसायन है खतरनाक
विपरो फैजिन, कार्बांडाजिम, ट्राइसाइक्लाजोन, प्रोपीकोनाजॉल, आईसोप्रोथीलीन, वेलीडानाईसिस
यह कीट है बासमती में लगने खतरनाक
गर्दन तोड़, शीथ ब्लाइट, लीफ ब्लाइट, झंडा रोग, तना छेदक, भूरा फूंदका, पत्ती लपेटक, गंधी बग
क्या है एपराइजा
चावल का साइंटिफिक नाम औराइजा सरायवा है। इसका इंडियन नाम एपराइजा है। तभी इसे एपराइजा नाम दिया गया है। किसान इस एप के जरिये कृषि वैज्ञानिकों से सीधे जुड़ जाएंगे।