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कॉलेजों में मना थल सेना दिवस, सेना के सम्मान का लिया संकल्प
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कॉलेजों में मना थल सेना दिवस, सेना के सम्मान का लिया संकल्प
रोहटा। जनता इंटर कॉलेज कल्याणपुर में भारतीय थल सेना दिवस पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें छात्रों ने विचार रखते हुए 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना की विजय गाथा का वर्णन किया। सभी ने सेना के सम्मान के लिए संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि हमें भारतीय सेना का सम्मान करना चाहिए। उन्हीं के नेतृत्व में 1971 का युद्ध जीता गया। वे माताएं धन्य है जिनकी कोख से ऐसे भारतीय वीरों का जन्म हुआ। हम उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन करते हैं। प्रधानाचार्य डॉ. जयभगवान सिंह ने बताया कि केएम करिअप्पा भारतीय सैनिकों की वकालत करते थे। 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली तभी एक माह बाद सितंबर में पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। इस संघर्ष में भारतीय सैनिकों ने जोजिला द्रास सेक्टर व कारगिल को अपने कब्जे में ले लिया। केएम करिअप्पा 15 जनवरी 1949 को पहले भारतीय सेना थल सेना प्रमुख बने। उनके नेतृत्व में 1962, 1965, 1971 के युद्ध में भारतीय सेना ने अद्भुत साहस, शौर्य व पराक्रम के बल पर भारत को विजय दिलाई। सन 1986 में केएम करिअप्पा को फील्ड मार्शल बनाया गया। उन्हीं का बेटा नंदा एयर चीफ मार्शल बनाया गया। भारतीय सैनिक इतिहास में मानेकशॉ व केएम करिअप्पा ने भारतीय सेना के चीफ फील्ड मार्शल पद को सुशोभित किया। गोष्ठी का संचालन हेम सिंह वर्मा ने किया। इस दौरान मनोज कुमार, रविंद्र नाथ यादव, विनोद कौशिक, महेंद्र सिंह, रिंकल, राहुल, यशी, पायल, सौरभ आदि मौजूद रहे।
सैनिकों के त्याग, शौर्य से लें प्रेरणा
खरखौदा। कस्बा स्थित महिला महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ. रेखा रानी तिवारी की अध्यक्षता में थल सेना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। देश के वीर सैनिकों की कर्त्तव्यपरायणता व सर्वोच्च बलिदान के प्रति नए सिरे से दृढ़ता के साथ स्वयं को समर्पित करने के भावों से अभिभूत अनेक प्रसंग, कविताएं छात्रा लाची त्यागी, सृष्टि, वीनस, राखी, सिमरन, ललिता, आंचल व रजिया द्वारा प्रस्तुत किए गए। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एमसी शर्मा ने छात्राओं को बताया कि आज जो भी समस्याएं है मानव सृजित हैं। अत हमें व्यक्तिगत स्तर पर सुधार करने की आवश्यकता है। डा. नीलम सिंह ने बताया कि हमें सैनिकों के त्याग व शौर्य से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। वहीं प्राचार्य डॉ. रेखा रानी ने बताया कि यह दिवस हमें कर्त्तव्यों के प्रति आश्वस्त रहने का मार्ग दिखाता है। एक सैनिक की तरह छात्राओं को भी अपने कर्त्तव्य के पूर्ण तत्परता लानी है। संचालन राजनीतिशास्त्र विभाग प्रभारी डॉ. शैलजा द्वारा किया गया।
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रोहटा। जनता इंटर कॉलेज कल्याणपुर में भारतीय थल सेना दिवस पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें छात्रों ने विचार रखते हुए 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना की विजय गाथा का वर्णन किया। सभी ने सेना के सम्मान के लिए संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि हमें भारतीय सेना का सम्मान करना चाहिए। उन्हीं के नेतृत्व में 1971 का युद्ध जीता गया। वे माताएं धन्य है जिनकी कोख से ऐसे भारतीय वीरों का जन्म हुआ। हम उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन करते हैं। प्रधानाचार्य डॉ. जयभगवान सिंह ने बताया कि केएम करिअप्पा भारतीय सैनिकों की वकालत करते थे। 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली तभी एक माह बाद सितंबर में पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। इस संघर्ष में भारतीय सैनिकों ने जोजिला द्रास सेक्टर व कारगिल को अपने कब्जे में ले लिया। केएम करिअप्पा 15 जनवरी 1949 को पहले भारतीय सेना थल सेना प्रमुख बने। उनके नेतृत्व में 1962, 1965, 1971 के युद्ध में भारतीय सेना ने अद्भुत साहस, शौर्य व पराक्रम के बल पर भारत को विजय दिलाई। सन 1986 में केएम करिअप्पा को फील्ड मार्शल बनाया गया। उन्हीं का बेटा नंदा एयर चीफ मार्शल बनाया गया। भारतीय सैनिक इतिहास में मानेकशॉ व केएम करिअप्पा ने भारतीय सेना के चीफ फील्ड मार्शल पद को सुशोभित किया। गोष्ठी का संचालन हेम सिंह वर्मा ने किया। इस दौरान मनोज कुमार, रविंद्र नाथ यादव, विनोद कौशिक, महेंद्र सिंह, रिंकल, राहुल, यशी, पायल, सौरभ आदि मौजूद रहे।
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सैनिकों के त्याग, शौर्य से लें प्रेरणा
खरखौदा। कस्बा स्थित महिला महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ. रेखा रानी तिवारी की अध्यक्षता में थल सेना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। देश के वीर सैनिकों की कर्त्तव्यपरायणता व सर्वोच्च बलिदान के प्रति नए सिरे से दृढ़ता के साथ स्वयं को समर्पित करने के भावों से अभिभूत अनेक प्रसंग, कविताएं छात्रा लाची त्यागी, सृष्टि, वीनस, राखी, सिमरन, ललिता, आंचल व रजिया द्वारा प्रस्तुत किए गए। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एमसी शर्मा ने छात्राओं को बताया कि आज जो भी समस्याएं है मानव सृजित हैं। अत हमें व्यक्तिगत स्तर पर सुधार करने की आवश्यकता है। डा. नीलम सिंह ने बताया कि हमें सैनिकों के त्याग व शौर्य से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। वहीं प्राचार्य डॉ. रेखा रानी ने बताया कि यह दिवस हमें कर्त्तव्यों के प्रति आश्वस्त रहने का मार्ग दिखाता है। एक सैनिक की तरह छात्राओं को भी अपने कर्त्तव्य के पूर्ण तत्परता लानी है। संचालन राजनीतिशास्त्र विभाग प्रभारी डॉ. शैलजा द्वारा किया गया।
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