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Meerut News: ईद उल अजहा शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की अपील
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- जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। आगामी ईद-उल-अजहा पर्व शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और स्वच्छ वातावरण में संपन्न कराने के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बृहस्पतिवार को जमीयत उलमा-ए-हिंद तहसील के सदर मौलाना जुनैद कासमी अपने साथियों के साथ तहसील पहुंचे और एसडीएम उदित नारायण सेंगर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बकरीद के अवसर पर तहसील क्षेत्र में साफ-सफाई, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की गई। साथ ही प्रशासन से अनुरोध किया गया कि अनुमति प्राप्त जानवरों के लाने-ले जाने में किसी प्रकार की अनावश्यक रोक-टोक न हो। प्रतिनिधिमंडल में मौलाना मेराज कासमी, मौलाना मुदस्सिर, मुफ्ती जावेद, मौलाना फुरकान और अशरफ राणा शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज हमेशा प्रशासन का सहयोग करता आया है। मौलाना जुनैद कासमी ने मुस्लिम समाज से भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि खुले स्थानों, सार्वजनिक रास्तों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में कुर्बानी न की जाए तथा ऐसा कोई कार्य न हो जिससे किसी अन्य समुदाय की भावनाएं आहत हों। उन्होंने लोगों से कुर्बानी के जानवरों का प्रदर्शन न करने और कुर्बानी के बाद बची अनुपयोगी वस्तुओं का उचित निस्तारण करने की अपील की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। आगामी ईद-उल-अजहा पर्व शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और स्वच्छ वातावरण में संपन्न कराने के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बृहस्पतिवार को जमीयत उलमा-ए-हिंद तहसील के सदर मौलाना जुनैद कासमी अपने साथियों के साथ तहसील पहुंचे और एसडीएम उदित नारायण सेंगर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बकरीद के अवसर पर तहसील क्षेत्र में साफ-सफाई, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की गई। साथ ही प्रशासन से अनुरोध किया गया कि अनुमति प्राप्त जानवरों के लाने-ले जाने में किसी प्रकार की अनावश्यक रोक-टोक न हो। प्रतिनिधिमंडल में मौलाना मेराज कासमी, मौलाना मुदस्सिर, मुफ्ती जावेद, मौलाना फुरकान और अशरफ राणा शामिल रहे।
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उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज हमेशा प्रशासन का सहयोग करता आया है। मौलाना जुनैद कासमी ने मुस्लिम समाज से भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि खुले स्थानों, सार्वजनिक रास्तों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में कुर्बानी न की जाए तथा ऐसा कोई कार्य न हो जिससे किसी अन्य समुदाय की भावनाएं आहत हों। उन्होंने लोगों से कुर्बानी के जानवरों का प्रदर्शन न करने और कुर्बानी के बाद बची अनुपयोगी वस्तुओं का उचित निस्तारण करने की अपील की।
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