गंगा की रेती में अद्भुत तपस्या: गर्दन तक रेत में दबे रहे आचार्य, 24 घंटे जनकल्याण की कामना
हस्तिनापुर में कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा मेले के दौरान प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ के आचार्य ने भू समाधि की अनूठी तपस्या की। आचार्य 24 घंटे तक गर्दन तक रेत में दबे रहे और जन कल्याण की प्रार्थना में लीन रहे।
विस्तार
हस्तिनापुर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर हस्तिनापुर में गंगा मेले का आयोजन हर वर्ष की तरह इस बार भी धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ हुआ। इसी बीच लोगों का ध्यान एक अनोखी तपस्या पर आकर ठहर गया। प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के आचार्य ने जनकल्याण की कामना के लिए भू समाधि लेते हुए 24 घंटे तक गंगा की रेती में तपस्या की।
यह भी पढ़ें: प्यार, फेरे और फिर सौदेबाजी: मंदिर में प्रेम विवाह…अब पति ने कहा-20 लाख दो, तभी तुम्हें पत्नी मानूंगा!
आचार्य गर्दन तक रेत में दबे रहे और पूर्ण रूप से ध्यान में लीन रहे। आसपास पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत दृश्य को नज़दीक से देखा और कई लोगों ने इसे युगों से चली आ रही भारतीय तपस्या परंपरा का जीवंत रूप बताया। मान्यता है कि ऐसी तपस्याएं सामूहिक कल्याण और प्रकृति के संतुलन के लिए की जाती हैं।
गंगा तट पर दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। आचार्य को तपस्या के दौरान साधकों और अनुयायियों ने पास में बैठकर मंत्रजप और स्तुति के साथ सहयोग दिया। आयोजन शांत और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।