फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Amar Ujala Special Report: The budget of the electricity department has deteriorated due to Corona and this time the dilapidated wires will not be replaced in the villages

कोरोना का असर : इस बार गांवों में नहीं बदले जाएंगे जर्जर तार, खास रिपोर्ट में जानिए बड़ी वजह

Fri, 04 Jun 2021 07:40 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजदीप जाखड़, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजदीप जाखड़, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 04 Jun 2021 07:40 PM IST
सार

इस साल गांवों में जर्जर तार नहीं बदले जाएंगे। अमर उजाला की खास रिपोर्ट में पढ़िए इसके पीछे क्या बड़ी वजह है।

विज्ञापन
Amar Ujala Special Report: The budget of the electricity department has deteriorated due to Corona and this time the dilapidated wires will not be replaced in the villages
जर्जर तार। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना संक्रमण ने ऊर्जा विभाग का बजट बिगाड़ दिया है। यही वजह है कि इस साल गांवों में विद्युतीकरण विस्तार नहीं होगा। जर्जर तार भी नहीं बदले जाएंगे। पिछले साल के बिजनेस प्लान के शेष बचे 116 करोड़ रुपये से ही काम कराने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। यह अब तक का पीवीवीएनएल का सबसे छोटा बिजनेस प्लान है। 

विज्ञापन


पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) विस्तार की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रत्येक वर्ष बिजनेस प्लान बनाकर शासन को भेजता है। नए बिजलीघर बनाने, पुराने बिजलीघरों की क्षमता वृद्धि, जर्जर तार बदलने, नई लाइन डालने, ट्रांसफार्मर लगाने और पुराने ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कराने के कार्यों को शामिल किया जाता है। इस बार पीवीवीएनएल ने करीब 390 करोड़ रुपये का बिजनेस प्लान बनाकर भेजा था। लेकिन बजट के अभाव में शासन से हरी झंडी नहीं मिल सकी। कोरोना के कारण पिछले साल के बिजनेस प्लान के बाकी कार्यों को ही इस साल कराने के लिए हरी झंडी मिली है। यह कार्य 116 करोड़ रुपये से कराए जाएंगे। लेकिन इस प्लान में गांवों में जर्जर लाइन बदलने के लिए बजट नहीं मिल सका है। इसके चलते आए दिन तार टूटने से होने वाला नुकसान जारी रहेगा। 
विज्ञापन


जर्जर लाइनों से जानमाल का खतरा 
उर्जा निगम गांवों में भी शहर की तर्ज पर बिजली चोरी रोकने के लिए एबीसी केबल डलवा रहा है। लेकिन चालू वित्तीय वर्ष के बिजनेस प्लान में न तो जर्जर लाइनों को बदलने के लिए बजट मिला है और न ही एबीसी केबल के लिए। जर्जर लाइन के तार टूटने से आए दिन जानमाल का नुकसान होता रहता है। फसलों में आग लगने से किसानों को भी भारी नुकसान होता रहता है। ग्रामीण जर्जर तारों को बदलने और लो वोल्टेज की समस्या दूर करने के लिए ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि की मांग सबसे ज्यादा करते है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह है बिजनेस प्लान
कार्य                                             संख्या      खर्च लाख रुपये में 

33 केवी बिजलीघरों का निर्माण            16              8273.09
33 केवी बिजलीघरों की क्षमतावृद्धि       18              1503.20
33 केवी लाइन का निर्माण                   00               00
11 केवी लाइन का निर्माण                89 किमी       824.02
नए ट्रांसफार्मर                                 100             
पुराने ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि          400            1000.00
कुल योग                                                   11600.31 लाख रुपये

कोरोना के चलते पुराने बिजनेस प्लान को ही संशोधित प्लान के रूप में पास किया गया है। पिछले साल के प्लान से बाकी बचे कार्यों को ही इस साल पूरा कराया जाएगा। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, प्रबंध निदेशक पीवीवीएनएल मेरठ

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed