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Amar Ujala Samwad: 'संवाद' में हिस्सा लेंगे शायर 'अजहर इकबाल',शिक्षा-साहित्य के मुद्दों पर रखेंगे अपने विचार

Mon, 21 Apr 2025 02:09 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Mon, 21 Apr 2025 02:09 PM IST
सार

अमर उजाला 'संवाद' का आयोजन 17-18 अप्रैल को लखनऊ में गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा। जिसमें प्रदेश के विकास समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। देश की जानी-मानी शख्सियतें, नीति-नियंता, विचारक-विशेषज्ञ श्रोताओं से चर्चा करेंगे।

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Amar Ujala Samvad Uttar Pradesh: Shayar Azhar Iqbal will also participate in program
शायर अजहर इकबाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक बार फिर 17-18 अप्रैल को अमर उजाला के प्रतिष्ठित कार्यक्रम 'संवाद' का आयोजन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश के विकास समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। देश की जानी-मानी शख्सियतें, नीति-नियंता, विचारक-विशेषज्ञ श्रोताओं से रू-ब-रू होंगे। कार्यक्रम में मशहूर शायर अजहर इकबाल भी शामिल होंगे। प्रदेश के विकास, शिक्षा व साहित्य समेत अन्य मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।  

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1. नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बाद,
   रोटियां भी न मयस्सर हों जिसे काम के बाद।


2. ये ख़ौफ़ है कि रगों में लहू न जम जाए
    तुम्हें गले से लगाया नहीं बहुत दिन से।


देश के मशहूर शायर अज़हर इक़बाल द्वारा लिखे ये चुनिंदा 'अशआर' शायरी के शौकीनों के दिलों की तह तक गूंजते हैं। एक ऐसी शख्सियत जिसकी शानदार शायरी की दुनिया मुरीद है। उनकी जड़े पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की धरती से जुड़ी हैं। विभिन्न कवि सम्मेलनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में की शोभा बढ़ाते रहे अजहर इकबाल प्रसिद्ध भारतीय शायर, कवि और कहानीकार हैं। वह उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना के मूल निवासी हैं। उनकी प्रतिभा और समर्पण में रची-बसी काव्य यात्रा हिंदी और उर्दू साहित्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के अहम भूमिका निभा रही है। उनकी शख्सियत के बारे में विस्तार से पढ़ें-

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Amar Ujala Samvad Uttar Pradesh: Shayar Azhar Iqbal will also participate in program
शायर अज़हर इक़बाल - फोटो : अमर उजाला

बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं शायर अज़हर इक़बाल
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पले-बढ़े अज़हर इक़बाल का बचपन ठेठ सांस्कृतिक माहौल में बीता। शायद ही किसी ने उस वक्त ये सोचा होगा कि एक छोटे से कस्बे का लड़का उर्दू साहित्य के क्षेत्र में बड़ा नाम बन जाएगा। अजहर अपने ज़ौक-ए-शायरी, अटूट प्रतिबद्धता और उर्दू अदब के अनुसरण के दम पर ही वह इस मुकाम तक पहुंच पाए।  
उन्होंने आत्मा को झकझोर देने वाली कविताएं लिखीं। उनकी गजलें हर वर्ग, हर पीढ़ी और हर अदब के लोगों के बीच लोकप्रिय हुईं। उनकी शायरी दिल की गहराइयों तक जगह बनाती रही है। उनकी कविताओं में निहित सार हर उम्र के लोगों के साथ जुड़ने, जज्बातों और तजुर्बे की परख को दर्शाता है।

शायरी से अलग बात करें तो अजहर को विविध प्रतिभाओं और बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने पटकथा लेखन में कदम रखा और अपनी कहानियों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वह एक शानदार एंकर, साक्षतकारकर्ता भी हैं। क्लासिक और समसामयिक दोनों की प्रकार के उर्दू साहित्य पर उनकी अंतर्दृष्टिपूर्ण टिप्पणियों ने विषय की गंभीर समझ प्रदर्शित की और उन्हें विद्वानों और उत्साही लोगों में लोकप्रिय बना दिया।

ऐसी है पारिवारिक पृष्ठभूमि
28 नवंबर, वर्ष 1978 को मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे में जन्मे अज़हर इक़बाल की प्राथमिक शिक्षा जहां बुढ़ाना मुजफ्फरनगर में हुई तो उच्च शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई। स्नातक करने के बाद यहीं से एक कवि के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनानी शुरू की।  इन्हीं प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने कवि के रूप में अपनी पहचान बनानी शुरू की। 

अजहर चार भाई हैं। उनके मामा नवाजुद्दीन सिद्दीकी बॉलीवुड के प्रसिद्ध एक्टर हैं। 7 फरवरी 2009 को सायदा मासूम से अज़हर इकबाल का निकाह हुआ था। दोनों की दो संतानें हैं। इनमें बेटा अब्दुल्लाह काशानी व बेटी ज़ेहरा अज़हर है। अजहर इन दिनों परिवार के साथ मेरठ में रहते हैं।

Amar Ujala Samvad Uttar Pradesh: Shayar Azhar Iqbal will also participate in program
शायर अज़हर इक़बाल - फोटो : अमर उजाला

ऐसे शायर बन गए अज़हर
कवि या शायर बनने में साहित्यिक उपजाऊ पृष्ठभूमि सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अज़हर भी ऐसी ही पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बुढ़ाना, कैराना, गंगोह, झिंझाना, नकुड़ ऐसे क्षेत्र हैं जहां पुराने समय से ही साहित्य और धर्म-आदब और दीन से गहरा लगाव था। महिलाएं दिन में हमेशा अच्छे उपन्यास पढ़ने के लिए समय निकालती थीं और अपने बच्चों और भाई-बहनों को भी सुनाती थीं। पुरुष लगभग हर शाम नशिस्त या बैठकों, काव्य गोष्ठियों में शामिल होते थे। 

अज़हर बताते हैं कि हम इन अदब-पसंद लोगों, कव्वालों और उनकी महफ़िलों से घिरे हुए थे। हर दिन कोई न कोई कार्यक्रम होता था, जहां काव्य, शायरी और गज़लें अलग-अलग विद्या सुनने को मिलती थी। शायरी के प्रति ज़ौक (रुचि) अपने आप ही ज़हन में उतरता चला गया। ऐसा भी होता कि इन आयोजनों में वरिष्ठ शायर एक मिसरा कहता और अगला मिसरा युवा लड़कों से लिखने के लिए कहते। इस कारण किशोर अपना ज्यादातर समय अच्छे कवियों और शायरों को पढ़ने में बिताते। अज़हर बताते हैं कि उन्होंने इसी क्रम में दुष्यंत कुमार से प्रेरित होकर पहली बार शायरी लिखी-

वो मुतमईन है कि पत्थर पिघल नहीं सकता,
मैं इंतजार में हूं आवाज में असर के लिए।
वो फूल बनके  मेरे पास ही महकता है,
मैं सोचता ही रहा अपने हमसफर के लिए।


इन अशआर के साथ अज़हर ने 13 साल की उम्र में अपनी काव्यात्मक कलम चलाई। इसके बाद वे गज़लें लिखते रहे और पढ़ाई के साथ साथ अपने पिता की चाय की दुकान चलाने में मदद भी करते। वह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान उनकी कही गई शायरी को किसी ने सोशल मीडिया पर 

अज़हर बताते हैं कि कोविड के पहले लॉकडाउन के दौरान, मुझे बहरीन जाने का निमंत्रण मिला। वह मेरी पहली विदेश यात्रा थी। लेकिन लॉकडाउन के कारण वह नहीं जा पाए। दर्द में, मैंने अल्लाह से शिकायत की कि यह मेरी पहली प्रतिष्ठित यात्रा है और मैं जा भी नहीं सकता। मानो अल्लाह तब आज़ाद था। उसने मेरी बात इतनी अच्छी तरह सुनी कि उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऐसा ही हुआ।

वह बताते हैं कि किसी ने मेरे पुराने वीडियो में से एक शायरी को अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट कर दिया। कुछ ही समय में, इसे 50 मिलियन व्यूज़ मिल गए। जल्द ही, लोगों ने मेरे दूसरे अशआर (दोहे) ढूंढ़ने शुरू कर दिए। अरबों लोगों ने उन्हें देखा और मैं तुरंत मशहूर हो गया। 

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शायर अज़हर इक़बाल - फोटो : अमर उजाला

हर पीढ़ी के लिए साहित्यिक प्रकाशपुंज
वर्ष 2023 में, वह सोनी टीवी के प्रसिद्ध कॉमेडी शो 'द कपिल शर्मा शो' में भी शामिल हुए। जश्न-ए-बहार और शंकर शाद मुशायरा जैसे विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में किया है। साहित्य कला परिषद, और साहित्य अकादमी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ साहित्यिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी उनकी साहित्यिक समुदाय में अहमियत को रेखांकित करती है।

उन्होंने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, इंडिया हैबिटैट सेंटर, रशियन सेंटर फॉर साइंस एंड कल्चर, श्रीराम सेंटर लिटिल थिएटर ग्रुप और कई केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर अपनी प्रस्तुति दी है। उनकी काव्यात्मक आवाज़ ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक कार्यक्रमों में गूंजते हुए सराहना अर्जित की है।
 
2015 में, अजहर इकबाल ने हरफकार फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य विभिन्न कला रूपों जैसे थिएटर, दास्तानगोई (पारंपरिक कहानी सुनाना), कविता आदि को बढ़ावा देना है। उन्होंने हिंदी और उर्दू थिएटर नाटकों के लिए पटकथा लेखक के रूप में भी काम किया है। इसके अलावा, उन्होंने 'सुराही' और 'मसीहा' जैसी लघु फिल्मों में अपने अभिनय कौशल का भी प्रदर्शन किया है

प्रसिद्ध हस्तियों के साथ कर चुके हैं सहभागिता  
अज़हर इक़बाल ने गुलज़ार, गोपाल दास नीरज, जावेद अख्त़र, निदा फ़ाज़ली, नंदिता दास, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, सुष्मिता सेन, सईद नक़वी, राहुल देव, उस्ताद इक़बाल अहमद खान, उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, जावेद अली, और हरिहरन जैसी साहित्यिक और सांस्कृतिक हस्तियों के साथ मंच साझा करने और उनका साक्षात्कार करने का सम्मान प्राप्त किया है। इन संपर्कों ने उनकी अपनी साहित्यिक यात्रा को समृद्ध किया है, जिससे उन्हें अपने शिल्प को और निखारने का अवसर मिला है।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता और पुरस्कार 
अज़हर इक़बाल की लोकप्रियता भारतीय सीमाओं से परे भी फैली है। भारत के साहित्यिक राजदूत के रूप में, अज़हर इक़बाल ने दुबई, कतर, बहरीन, और पाकिस्तान जैसे देशों की यात्रा की हैं, जहां उन्होंने अपनी कविता से अंतरराष्ट्रीय श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। उनकी वैश्विक पहचान का एक और प्रमाण है बहरीन में 'जश्न-ए-जावेद अख्तर' और दुबई में 'अंदाज़-ए-बयान और' जैसे प्रतिष्ठित कार्यक्रमों की मेज़बानी के रूप में उनकी भूमिका। उन्हें कैलाश गौतम राष्ट्रीय काव्य कुंभ सम्मान, मधुकर श्याम सम्मान, और राम गोपाल चतुर्वेदी सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जो साहित्य और कविता में उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं।

अज़हर इक़बाल सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी विशिष्ट शायरी ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग प्रसिद्धि दिलाई तो उनके जीवन के संघर्ष और सादगी ने उन्हें लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान दिलाया है। अज़हर इक़बालन केवल एक प्रतिभाशाली शायर हैं बल्कि युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी हैं।

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