अमर उजाला एक्सक्लूसिव: बैंकों में दम तोड़ रहा स्वरोजगार का सपना, पढ़िए ये खास रिपोर्ट
- आवेदनों के मुकाबले बैंकों की स्वीकृति काफी कम
- बैंकों में दम तोड़ रहा स्वरोजगार का सपना
विस्तार
रोजगार के अवसर बढ़ाने और बेरोजगारों के हाथों को काम देने के लिए चलाई जा रहीं रोजगार योजनाएं बैंकों में जाकर दम तोड़ रही हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना (पीएमईजीपी) और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (एमवाईएसवाई) के आंकड़े बताते हैं कि स्वीकृत आवेदनों के मुकाबले बैंकों से स्वीकृति बहुत कम है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत उद्योग लगाने पर 25 लाख और सेवा क्षेत्र के लिए दस लाख रुपये का ऋण मिलता है। जिला उद्योग केंद्र सहारनपुर के उपायुक्त सिद्धार्थ यादव का कहना है कि लाभार्थियों का चयन करके फाइलें बैंकों को भेज दी जाती हैं, लेकिन बैंक उन्हें लोन देने में कोताही बरत रहे हैं।
बागपत में भी सरकारी सहायता से ऋण लेकर रोजगार शुरू करना आसान नहीं है। ऋण की जटिल प्रक्रिया के कारण मुश्किलें होती हैं। यही हाल मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर का है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना
जनपद स्वीकृत बैंकों की आवेदन स्वीकृति
सहारनपुर 490 39
मेरठ 370 37
शामली 71 19
मुजफ्फरनगर 190 46
बागपत 105 13
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मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना
जनपद स्वीकृत बैंकों की आवेदन स्वीकृति
सहारनपुर 138 06
मेरठ 224 17
शामली 27 05
मुजफ्फरनगर 32 08
बागपत 71 17
उधर, बिजनौर में पीएमईजीपी में 1200 लोगों को 100 करोड़ ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। एमवाईएसवाई में 362 लोगों को 102 करोड़ का ऋण दिया गया है। एक जिला एक उत्पाद योजना में 300 लोगों को 50.53 करोड़ का ऋण दिया गया। आत्मर्निभर भारत योजना के तहत 3119 लोगों को 48.50 करोड़ का ऋण दिया गया।
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