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भागवत के सभी सिद्धांत वेद सम्मत : अभयानंद सरस्वती
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मेरठ। जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित वेदांत आश्रम में वेदांत सत्संग समिति ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथा व्यास अभयानंद सरस्वती ने भागवत महापुराण पर तात्विक प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि वेद विरुद्ध आचरण से जीवन में सफलता संभव नहीं है। भागवत के सभी सिद्धांत वेद सम्मत हैं।
अभयानंद ने भागवत पुराण को वृक्ष के रूप में समझाया। इसके मूल में चार वेद, 12 स्कंध शाखाएं और 18000 श्लोक पत्ते हैं। उन्होंने अजामिल उपाख्यान का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान से भी बड़ा उनका नाम है। सृष्टि की उत्पत्ति पर प्रकाश डालते हुए विष्णु की नाभि से ब्रह्मा का प्राकट्य बताया।
ब्रह्मा से सनकादिक ऋृषि, नारद, रुद्र तथा मनु-शतरूपा की उत्पत्ति हुई। मनु ने परिवार व समाज संचालन हेतु मनुस्मृति के नियम प्रतिपादित किए। इस अवसर पर कथा यजमान बीडी पांडेय, बीना पांडेय, मनोज गुप्ता, अलका गुप्ता, अरविंद नागर, अर्चना गुप्ता, डॉ. घनश्याम सिंह, यशपाल रस्तोगी रहे।ब्यूरो
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अभयानंद ने भागवत पुराण को वृक्ष के रूप में समझाया। इसके मूल में चार वेद, 12 स्कंध शाखाएं और 18000 श्लोक पत्ते हैं। उन्होंने अजामिल उपाख्यान का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान से भी बड़ा उनका नाम है। सृष्टि की उत्पत्ति पर प्रकाश डालते हुए विष्णु की नाभि से ब्रह्मा का प्राकट्य बताया।
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ब्रह्मा से सनकादिक ऋृषि, नारद, रुद्र तथा मनु-शतरूपा की उत्पत्ति हुई। मनु ने परिवार व समाज संचालन हेतु मनुस्मृति के नियम प्रतिपादित किए। इस अवसर पर कथा यजमान बीडी पांडेय, बीना पांडेय, मनोज गुप्ता, अलका गुप्ता, अरविंद नागर, अर्चना गुप्ता, डॉ. घनश्याम सिंह, यशपाल रस्तोगी रहे।ब्यूरो
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