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Meerut News: जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती पर कृषि वैज्ञानिकों ने किया जागरुक
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कस्बे के स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद किसान स्रोत संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मिशन लाइफ अभियान के तहत स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे किसानों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और प्राकृतिक खेती से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।
गोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नवीन चंद्र ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और जल संरक्षण के प्रति जागरुक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।
डॉ. वीना यादव ने किसानों को जल संरक्षण के महत्व की जानकारी देते हुए वर्षा जल संचयन, खेत तालाब, ड्रिप सिंचाई और अन्य जल बचाव तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर लगातार घट रहा है। प्रत्येक किसान को जल संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए।
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डॉ. शुभम आर्य ने खेती में संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर बल दिया। डॉ. नितेंद्र आर्य ने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बताते हुए किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी। किसानों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण और जल बचाव के उपाय अपनाने का संकल्प लिया।
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हस्तिनापुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मिशन लाइफ अभियान के तहत स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे किसानों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और प्राकृतिक खेती से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।
गोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नवीन चंद्र ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और जल संरक्षण के प्रति जागरुक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।
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डॉ. वीना यादव ने किसानों को जल संरक्षण के महत्व की जानकारी देते हुए वर्षा जल संचयन, खेत तालाब, ड्रिप सिंचाई और अन्य जल बचाव तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर लगातार घट रहा है। प्रत्येक किसान को जल संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए।
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डॉ. शुभम आर्य ने खेती में संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर बल दिया। डॉ. नितेंद्र आर्य ने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बताते हुए किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की सलाह दी। किसानों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण और जल बचाव के उपाय अपनाने का संकल्प लिया।