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70 साल बाद निवास का प्रमाण मिला, अब जमा करने लगे गृहकर
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सरकारी सबूत मिलने के बाद घर के दरवाजे पर खड़े घर के मालिक स्रोत नगर पंचायत
- फोटो : shiv tripathi
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी के 407 हिंदू बंगाली परिवारों को पिछले 70 वर्षों से अपने घरों के सरकारी सबूत का इंतजार खत्म हो गया। तीन दिन में ऐसे 169 लोगों के नाम नगर पंचायत गृहकर रजिस्टर में अंकित किए गए। इन्हें गृहकर की रसीदी भी दे दी गई। शनिवार को गृहकर की रसीद मिलने पर इन लोगों की आंखों में खुशी के आंसू छलक गए। लोगों कहना है कि अब वह सरकारी कागजों में भी स्थायी निवासी हो गए।
वर्ष 1964 से 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान से करीब 407 हिंदू बंगाली परिवारों को हस्तिनापुर में पुनर्स्थापित किया गया था। उसे समय हस्तिनापुर में करीब 150 इंडस्ट्री संचालित थी जिम एशिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री मदन सूत मिल थी। इसमें करीब पांच लोग काम करते थे हिंदू बंगाली परिवारों को भी पुनर्स्थापित कर मदन सूत मिल में काम दिया गया। यहां पर काम करने के बाद इन लोगों को सूत मिल के आसपास ही आवास दिए गए थे, जो अस्थायी थे। यहां पर वर्तमान में कई काॅलोनियां बसी हुई हैं।
सूत मिल बंद होने से गहराया था रोजी-रोटी का संकट
वर्ष 1984 में जब मदन सूत मिल बंद हुआ, तो इन लोगों का रोजगार बंद हो गया। वे और रोजी रोटी के संकट से जूझने लगे। उनके पास स्थायी मकान भी नहीं थे। उन्हें अस्थायी क्वार्टर में समय बिताया। दो दिन पहले समारोह आयोजित कर नगर पंचायत ने इन्हें हस्तिनापुर में निवासी का प्रमाण दे दिया।
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पहले चरण में 1700 लोग होंगे लाभान्वित
पहले चरण के लिए 1700 लोगों को चिन्हित कर लाभान्वित किया जाएगा। नगर पंचायत की टीम जांच के बाद भवन कर की रसीद काट रही है। इसके लिए चेयरपर्सन की ओर से टीम को विशेष दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। अगर भवन कर रसीद देते समय कोई भी लापरवाही बरती गई तो इसके लिए टीम पर कार्रवाई की जाएगी।
भवन कर के लिए लगातार लगाए जाएंगे शिविर
स्वकर प्रणाली के अंतर्गत कस्बे में भवन कर लगाने का कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक वार्ड में शिविर लगाए जाएंगे। जांच के बाद भवन कर निर्धारित किया जाएगा। इसके लिए नगर पंचायत की टीम लगाई गई है।
सुधा खटीक, चेयरपर्सन नगर पंचायत हस्तिनापुर
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वर्ष 1964 से 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान से करीब 407 हिंदू बंगाली परिवारों को हस्तिनापुर में पुनर्स्थापित किया गया था। उसे समय हस्तिनापुर में करीब 150 इंडस्ट्री संचालित थी जिम एशिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री मदन सूत मिल थी। इसमें करीब पांच लोग काम करते थे हिंदू बंगाली परिवारों को भी पुनर्स्थापित कर मदन सूत मिल में काम दिया गया। यहां पर काम करने के बाद इन लोगों को सूत मिल के आसपास ही आवास दिए गए थे, जो अस्थायी थे। यहां पर वर्तमान में कई काॅलोनियां बसी हुई हैं।
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सूत मिल बंद होने से गहराया था रोजी-रोटी का संकट
वर्ष 1984 में जब मदन सूत मिल बंद हुआ, तो इन लोगों का रोजगार बंद हो गया। वे और रोजी रोटी के संकट से जूझने लगे। उनके पास स्थायी मकान भी नहीं थे। उन्हें अस्थायी क्वार्टर में समय बिताया। दो दिन पहले समारोह आयोजित कर नगर पंचायत ने इन्हें हस्तिनापुर में निवासी का प्रमाण दे दिया।
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पहले चरण में 1700 लोग होंगे लाभान्वित
पहले चरण के लिए 1700 लोगों को चिन्हित कर लाभान्वित किया जाएगा। नगर पंचायत की टीम जांच के बाद भवन कर की रसीद काट रही है। इसके लिए चेयरपर्सन की ओर से टीम को विशेष दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। अगर भवन कर रसीद देते समय कोई भी लापरवाही बरती गई तो इसके लिए टीम पर कार्रवाई की जाएगी।
भवन कर के लिए लगातार लगाए जाएंगे शिविर
स्वकर प्रणाली के अंतर्गत कस्बे में भवन कर लगाने का कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक वार्ड में शिविर लगाए जाएंगे। जांच के बाद भवन कर निर्धारित किया जाएगा। इसके लिए नगर पंचायत की टीम लगाई गई है।
सुधा खटीक, चेयरपर्सन नगर पंचायत हस्तिनापुर

सरकारी सबूत मिलने के बाद घर के दरवाजे पर खड़े घर के मालिक स्रोत नगर पंचायत- फोटो : shiv tripathi

सरकारी सबूत मिलने के बाद घर के दरवाजे पर खड़े घर के मालिक स्रोत नगर पंचायत- फोटो : shiv tripathi

सरकारी सबूत मिलने के बाद घर के दरवाजे पर खड़े घर के मालिक स्रोत नगर पंचायत- फोटो : shiv tripathi