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दूध में पानी की मिलावट, मलाई भी कर गए चट
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adeltration in milk
मेरठ। खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल जारी है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन के पास आई हालिया रिपोर्ट में 32 में से 14 सैंपल फेल निकले हैं, यानि करीब 44 प्रतिशत सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। 12 सैंपलों में खुलासा हुुआ है कि दूध में पानी मिलाया गया था। उसमें से फैट यानि चिकनाई भी मानक से कम थी। मिल्क केक और मिल्क खोया भी सब स्टैंडर्ड निकले हैं। नमकीन के दो सैंपल मिसब्रांड निकले हैं। यह सैंपल इसी साल मई में शहर के विभिन्न स्थानों से लिए गए थे। लखनऊ प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आई है।
आजीवन कारावास तक की सजा
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल गंगवार ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाते हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलता, जिसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है और तीन लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
मिलावट से हो सकते हैं गंभीर रोग
फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया ने बताया कि मिलावट से गंभीर किस्म के रोग हो सकते हैं। सबसे ज्यादा किडनी को नुकसान पहुंच सकता है और पेट संबंधी कई तरह के रोग हो सकते हैं। रंगों की मिलावट और अखाद्य पदार्थों से बने खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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विभाग मिलावट करने वालों के नाम नहीं करेगा सार्वजनिक
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि विभाग को निर्देश मिले हैं कि जब तक इन मामलों में कोर्ट कोई फैसला नहीं देता है, तब तक ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि दरअसल, रिपोर्ट आने के बाद इन लोगों को एक माह तक अपील करने का हक है।
घर पर जांचे दूध और मावे की मिलावट
दूध में पानी- दूध की एक बूंद को चिकने या चमकदार तिरछी सतह पर डालने से शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे आगे बढ़कर पीछे एक सफेद निशान छोड़कर बहती है, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहेगा।
दूध में यूरिया- दूध में यूरिया की जांच के लिए एक परखनली में थोड़ा दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाकर हिलाएं, फिर इसे पांच मिनट के लिए रख दें, इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में यूरिया की मिलावट मानी जाती है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकान से मिल जाता है।
दूध में वनस्पति- तीन से पांच मिली दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं एक चम्मच चीनी मिलाने पर पांच मिनट बाद लाल रंग दिखाई देने लगे तो दूध में वनस्पति की मिलावट होती है।
मावा- शुद्ध मावा कठोर होता है। मावे में आयोडीन सॉल्यूशन डालें, अगर मावा में मिलावट होगी तो उसका रंग बैंगनी हो जाएगा।
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आजीवन कारावास तक की सजा
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल गंगवार ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए जाते हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलता, जिसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है और तीन लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
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मिलावट से हो सकते हैं गंभीर रोग
फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया ने बताया कि मिलावट से गंभीर किस्म के रोग हो सकते हैं। सबसे ज्यादा किडनी को नुकसान पहुंच सकता है और पेट संबंधी कई तरह के रोग हो सकते हैं। रंगों की मिलावट और अखाद्य पदार्थों से बने खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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विभाग मिलावट करने वालों के नाम नहीं करेगा सार्वजनिक
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि विभाग को निर्देश मिले हैं कि जब तक इन मामलों में कोर्ट कोई फैसला नहीं देता है, तब तक ऐसे लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि दरअसल, रिपोर्ट आने के बाद इन लोगों को एक माह तक अपील करने का हक है।
घर पर जांचे दूध और मावे की मिलावट
दूध में पानी- दूध की एक बूंद को चिकने या चमकदार तिरछी सतह पर डालने से शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे आगे बढ़कर पीछे एक सफेद निशान छोड़कर बहती है, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहेगा।
दूध में यूरिया- दूध में यूरिया की जांच के लिए एक परखनली में थोड़ा दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाकर हिलाएं, फिर इसे पांच मिनट के लिए रख दें, इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में यूरिया की मिलावट मानी जाती है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकान से मिल जाता है।
दूध में वनस्पति- तीन से पांच मिली दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं एक चम्मच चीनी मिलाने पर पांच मिनट बाद लाल रंग दिखाई देने लगे तो दूध में वनस्पति की मिलावट होती है।
मावा- शुद्ध मावा कठोर होता है। मावे में आयोडीन सॉल्यूशन डालें, अगर मावा में मिलावट होगी तो उसका रंग बैंगनी हो जाएगा।