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तीन माह में बनवाए दो पासपोर्ट, पाकिस्तान घूमा... 10 साल बाद आया पकड़ में
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मेरठ। तीन माह में अलग-अलग नाम से दो पासपोर्ट बनवाने के आरोपी को देहली गेट पुलिस ने 10 साल बाद गिरफ्तार किया है। इस दौरान आरोपी पाकिस्तान की कई बार यात्रा कर चुका है। पुलिस ने दोनों पासपोर्ट बरामद कर लिए है। इस पूरे प्रकरण में पासपोर्ट के आवेदन से लेकर सत्यापन और पासपोर्ट जारी होने की व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं।
पुलिस के अनुसार कुछ माह पूर्व सूचना मिली थी कि देहलीगेट क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति ने दो पासपोर्ट बनवा रखे हैं और वह अक्सर पाकिस्तान की यात्रा करता है। इसकी जांच थाना देहली गेट पुलिस के साथ ही एलआईयू भी कर रही थी। जांच में पुष्टि होने के बाद एलआईयू ने अफसरों को रिपोर्ट सौंप दी। सोमवार शाम पुलिस ने इस व्यक्ति को जलीकोठी क्षेत्र से गिरफ्तार कर उसके पास से दोनों पासपोर्ट बरामद कर लिए। एसओ देहलीगेट रविंद्र सिंह ने जानकारी दी कि कोठी अतानस जलीकोठी निवासी रहीसुद्दीन पुत्र सुलेमान को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में रहीसुद्दीन ने बताया कि वह पाकिस्तान में रह रहीं अपनी बहनों से मिलने जाता था। भारत की तुलना में वहां ड्राईफ्रूट काफी सस्ते हैं, इसलिए वह काफी मात्रा में वहां से ड्राईफ्रूट लाकर यहां बेचता था।
कैसे बने दो पासपोर्ट, मामला संदिग्ध
पूछताछ में रहीसुद्दीन ने बताया कि उसने साल 2009 में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। करीब दो माह बाद उसे जानकारी मिली कि उसका आवेदन रद्द कर दिया गया है। उसने इसके बाद दूसरे नाम और पते से आवेदन कर दिया। करीब तीन माह बाद उसे पासपोर्ट प्राप्त हो गया और वह पाकिस्तान जाने लगा। कुछ ही दिन बीते थे कि उसे पूर्व में किए आवेदन का पासपोर्ट भी मिल गया। कुछ माह पूर्व उसने दूसरे पासपोर्ट से यात्रा की। तभी यह मामला निकलकर सामने आया। वहीं, जांच का विषय यह भी है कि रहीसुद्दीन के संपर्क किन लोगों से हैं और उसका पाकिस्तान आने-जाने का मकसद क्या था। मामला अभी तक संदिग्ध बना है।
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प्रक्रिया काफी लंबी, जिम्मेदार कौन
पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदक को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। संबंधित पुलिस थाने से लेकर एलआईयू की जांच होती है। पूरी तरह से सत्यापन के बाद पासपोर्ट विभाग को रिपोर्ट जाती है। लेकिन हैरानी की बात है कि रहीसुद्दीन ने अपने नाम और पते में मामूली फेरबदल कर अपने दो पासपोर्ट कैसे तैयार करा लिए। सवाल यह है कि जब पहला आवेदन निरस्त कर दिया गया तो उसका क्या कारण था और उसके बावजूद वह बाद में मंजूर कैसे कर दिया गया। वहीं, फर्जीवाड़ा कर नाम पता बदलकर दूसरा आवेदन कैसे किया गया और उससे पासपोर्ट बनवा भी लिया गया। जाहिर है कि दोनों ही पासपोर्ट के आवेदन में थाना पुलिस और एलआईयू ने किस तरह का वेरीफिकेशन किया कि दोनों ही जांचों में रहीसुद्दीन पकड़ में नहीं आया।
अभी कुछ कहना जल्दबाजी
आरोपी रहीसुद्दीन को गिरफ्तार कर दोनों पासपोर्ट जब्त कर लिए हैं। अन्य विभागों से भी अगर किसी की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई होगी। गंभीरता से जांच चल रही है। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। -दिनेश शुक्ला, सीओ कोतवाली
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पुलिस के अनुसार कुछ माह पूर्व सूचना मिली थी कि देहलीगेट क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति ने दो पासपोर्ट बनवा रखे हैं और वह अक्सर पाकिस्तान की यात्रा करता है। इसकी जांच थाना देहली गेट पुलिस के साथ ही एलआईयू भी कर रही थी। जांच में पुष्टि होने के बाद एलआईयू ने अफसरों को रिपोर्ट सौंप दी। सोमवार शाम पुलिस ने इस व्यक्ति को जलीकोठी क्षेत्र से गिरफ्तार कर उसके पास से दोनों पासपोर्ट बरामद कर लिए। एसओ देहलीगेट रविंद्र सिंह ने जानकारी दी कि कोठी अतानस जलीकोठी निवासी रहीसुद्दीन पुत्र सुलेमान को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में रहीसुद्दीन ने बताया कि वह पाकिस्तान में रह रहीं अपनी बहनों से मिलने जाता था। भारत की तुलना में वहां ड्राईफ्रूट काफी सस्ते हैं, इसलिए वह काफी मात्रा में वहां से ड्राईफ्रूट लाकर यहां बेचता था।
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कैसे बने दो पासपोर्ट, मामला संदिग्ध
पूछताछ में रहीसुद्दीन ने बताया कि उसने साल 2009 में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। करीब दो माह बाद उसे जानकारी मिली कि उसका आवेदन रद्द कर दिया गया है। उसने इसके बाद दूसरे नाम और पते से आवेदन कर दिया। करीब तीन माह बाद उसे पासपोर्ट प्राप्त हो गया और वह पाकिस्तान जाने लगा। कुछ ही दिन बीते थे कि उसे पूर्व में किए आवेदन का पासपोर्ट भी मिल गया। कुछ माह पूर्व उसने दूसरे पासपोर्ट से यात्रा की। तभी यह मामला निकलकर सामने आया। वहीं, जांच का विषय यह भी है कि रहीसुद्दीन के संपर्क किन लोगों से हैं और उसका पाकिस्तान आने-जाने का मकसद क्या था। मामला अभी तक संदिग्ध बना है।
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प्रक्रिया काफी लंबी, जिम्मेदार कौन
पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदक को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। संबंधित पुलिस थाने से लेकर एलआईयू की जांच होती है। पूरी तरह से सत्यापन के बाद पासपोर्ट विभाग को रिपोर्ट जाती है। लेकिन हैरानी की बात है कि रहीसुद्दीन ने अपने नाम और पते में मामूली फेरबदल कर अपने दो पासपोर्ट कैसे तैयार करा लिए। सवाल यह है कि जब पहला आवेदन निरस्त कर दिया गया तो उसका क्या कारण था और उसके बावजूद वह बाद में मंजूर कैसे कर दिया गया। वहीं, फर्जीवाड़ा कर नाम पता बदलकर दूसरा आवेदन कैसे किया गया और उससे पासपोर्ट बनवा भी लिया गया। जाहिर है कि दोनों ही पासपोर्ट के आवेदन में थाना पुलिस और एलआईयू ने किस तरह का वेरीफिकेशन किया कि दोनों ही जांचों में रहीसुद्दीन पकड़ में नहीं आया।
अभी कुछ कहना जल्दबाजी
आरोपी रहीसुद्दीन को गिरफ्तार कर दोनों पासपोर्ट जब्त कर लिए हैं। अन्य विभागों से भी अगर किसी की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई होगी। गंभीरता से जांच चल रही है। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। -दिनेश शुक्ला, सीओ कोतवाली