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झूठ बोलने के कारण नरक तक पहुंचता है व्यक्ति
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के मल्लिनाथ भगवान के समवशरण में पर्यूषण पर्व के अवसर पर चल रहे श्री 1008 इंद्रध्वज महामंडल विधान में सोमवार को श्रद्धालुओं ने तीर्थंकर भगवंतों का अभिषेक किया। सर्वजगत की शांति के लिए महामंत्रों से अमित जैन ने सपरिवार शांतिधारा की।
पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन आचार्य ज्ञान भूषण महाराज रत्नाकर ने सत्य धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि कठोर वचन व झूठ वचनों का त्याग करना ही सत्य धर्म है। सत्यरूपी जवाहर रत्न का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि सत्यवादी प्राणी संसार में सुखी रहते हैं। सत्यधर्म का पालन करते हुए दूसरों के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए। मुनिराजों और श्रावकों की प्रतिष्ठा उत्तम सत्यधर्म के पालन करने से ही है। सत्यधर्म से ही राजा वसु ऊंचे सिंहासन पर बैठकर ही न्याय किया करते थे। व्यक्ति झूठ बोलने के कारण ही नरक तक पहुंचता है और सत्य बोलने से स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त होता है। सत्य को पाने का पहला तरीका झूठ का त्याग कर दें। पर ऐसा सत्य भी न बोलें, जो दूसरों के संताप उत्पन्न कर दे। सत्यवादी की हमेशा परीक्षा होती है और वह हमेशा खरा उतरता है। राजा हरीशचंद्र ने भी अपने जीवन में कितने कष्टों को सहा, परंतु उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा और अंत में सत्य की ही जीत हुई। सत्य को कुछ दिनों के लिए दबाया जा सकता है, किंतु परास्त नहीं किया जा सकता। श्री 1008 इंद्रध्वज महामंडल विधान की समस्त मांगलिक क्रियाए पंडित आशीष जैन शास्त्री ने संपन्न कराई। श्रद्धालुओं ने मांडले पर 72 व 39 अर्घ्य समर्पित किए।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन आदि ने सहयोग किया।
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पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन आचार्य ज्ञान भूषण महाराज रत्नाकर ने सत्य धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि कठोर वचन व झूठ वचनों का त्याग करना ही सत्य धर्म है। सत्यरूपी जवाहर रत्न का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि सत्यवादी प्राणी संसार में सुखी रहते हैं। सत्यधर्म का पालन करते हुए दूसरों के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए। मुनिराजों और श्रावकों की प्रतिष्ठा उत्तम सत्यधर्म के पालन करने से ही है। सत्यधर्म से ही राजा वसु ऊंचे सिंहासन पर बैठकर ही न्याय किया करते थे। व्यक्ति झूठ बोलने के कारण ही नरक तक पहुंचता है और सत्य बोलने से स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त होता है। सत्य को पाने का पहला तरीका झूठ का त्याग कर दें। पर ऐसा सत्य भी न बोलें, जो दूसरों के संताप उत्पन्न कर दे। सत्यवादी की हमेशा परीक्षा होती है और वह हमेशा खरा उतरता है। राजा हरीशचंद्र ने भी अपने जीवन में कितने कष्टों को सहा, परंतु उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा और अंत में सत्य की ही जीत हुई। सत्य को कुछ दिनों के लिए दबाया जा सकता है, किंतु परास्त नहीं किया जा सकता। श्री 1008 इंद्रध्वज महामंडल विधान की समस्त मांगलिक क्रियाए पंडित आशीष जैन शास्त्री ने संपन्न कराई। श्रद्धालुओं ने मांडले पर 72 व 39 अर्घ्य समर्पित किए।
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इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन आदि ने सहयोग किया।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
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