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रक्षाबंधन पर जेल पहुंची बहनों को देख छलक पड़े आंसू
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 30 Aug 2015 02:01 AM IST
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चौधरी चरणसिंह जिला कारागार में शनिवार को भाइयों से मिलने के लिए अग्नि परीक्षा दी। तपती धूप में घंटों वे लाइन में लगी रहीं। जल्दबाजी करने पर हंगामा हुआ तो पुलिस ने लाठी भी फटकारी। रक्षाबंधन के मौके पर मुस्लिम महिलाओं ने भी अपने बंदियों से मुलाकात की।
रक्षाबंधन पर सुबह सात बजे से ही मुलाकात का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके बावजूद भी पुलिस और जेल प्रशासन की व्यवस्था लड़खड़ा गई। अपने अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनें बेताब हो गई। हालत यह थी कि आईजी जोन ऑफिस तक बहनों की भीड़ लगी थी। कई बहनों ने तो नियम भी तोड़ा, जिस पर पुलिस ने लाठी फटकारी। भगदड़ मची तो पुलिस ने जैसे तैसे कर व्यवस्था संभाली। जेल में अंदर मुलाकात की व्यवस्था ठीक थी। बहनों ने आराम से भाई की कलाई पर राखी बांधी।
बहन और भाई ने बहाए आंसू
सलाखों के पीछे भाई से मुलाकात करने पहुंची बहन की आंखें नम हो गईं। कई बंदी तो ऐसे भी है, जोकि आपसी रंजिश के चलते बेवजह जेल में हैं। मासूम बच्चों की भी मिलने के लिए अच्छी खासी भीड़ थी। रक्षाबंधन के अवसर पर मां और पत्नी ने भी बंदियों से मुलाकात की।
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मुस्लिम बहनों ने भी बांधी राखी
रक्षाबंधन के मौके पर दर्जनों मुस्लिम बहनों ने जेल में जाकर अपने मुंहबोले भाई की कलाई पर राखी बांधी। कई महिलाओं ने त्योहार का फायदा उठाकर बंदियों से सीधी मुलाकात की।
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रक्षाबंधन पर सुबह सात बजे से ही मुलाकात का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके बावजूद भी पुलिस और जेल प्रशासन की व्यवस्था लड़खड़ा गई। अपने अपने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनें बेताब हो गई। हालत यह थी कि आईजी जोन ऑफिस तक बहनों की भीड़ लगी थी। कई बहनों ने तो नियम भी तोड़ा, जिस पर पुलिस ने लाठी फटकारी। भगदड़ मची तो पुलिस ने जैसे तैसे कर व्यवस्था संभाली। जेल में अंदर मुलाकात की व्यवस्था ठीक थी। बहनों ने आराम से भाई की कलाई पर राखी बांधी।
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बहन और भाई ने बहाए आंसू
सलाखों के पीछे भाई से मुलाकात करने पहुंची बहन की आंखें नम हो गईं। कई बंदी तो ऐसे भी है, जोकि आपसी रंजिश के चलते बेवजह जेल में हैं। मासूम बच्चों की भी मिलने के लिए अच्छी खासी भीड़ थी। रक्षाबंधन के अवसर पर मां और पत्नी ने भी बंदियों से मुलाकात की।
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मुस्लिम बहनों ने भी बांधी राखी
रक्षाबंधन के मौके पर दर्जनों मुस्लिम बहनों ने जेल में जाकर अपने मुंहबोले भाई की कलाई पर राखी बांधी। कई महिलाओं ने त्योहार का फायदा उठाकर बंदियों से सीधी मुलाकात की।