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आखिर किसके भरोसे जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र व्यवस्था
Meerut
Updated Thu, 12 Jun 2014 05:32 AM IST
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मेरठ। नगर निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को महापौर और नगरायुक्त ने कार्यालय का निरीक्षण किया, तो व्यवस्था के मुखिया नगर स्वास्थ्य अधिकारी फिर गायब मिले। नाराज नगरायुक्त ने तत्काल केबिन पर ताला जड़ दिया। उनके खिलाफ प्रमुख सचिव को रिपोर्ट भेजी जाएगी। वहीं महापौर ने व्यवस्था को अपर नगरायुक्त को सौंपने के निर्देश दिए।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को लेकर लगातार शिकायतें हो रही हैं कि व्यवस्था पूरी तरह से दलालों के हाथ में है। वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी और लिपिक में खींचतान हो रही है। 10 दिन पहले भी महापौर ने निगम में निरीक्षण किया था और नगरायुक्त को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। बुधवार को महापौर हरिकांत अहलुवालिया अपने साथ नगरायुक्त अब्दुल समद, अपर नगरायुक्त लालचंद मौर्य, जीएम जल और कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव को लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कक्ष पहुंचे। यहां सब अव्यवस्थित मिला। फीडिंग करने वाले प्राइवेट कर्मचारियों ने 900 से 1000 फार्म लंबित होने की जानकारी दी। लिपिक दिनेश ने बताया कि फार्म फीडिंग होने के बाद नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पास जाते हैं, जिसके कारण प्रमाण पत्र लेट हो रहे हैं। बाहरी लोगों द्वारा कार्य कराए जाने और सही जवाब न मिलने पर महापौर का पारा चढ़ गया। उन्होंने नगरायुक्त से व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। इस दौरान मौजूद पार्षद सेंसरपाल, पंकज कतीरा, सुनीलदत्त सैनी, राजू वर्मा, हरीश कुमार, राजकुमार मुन्ना, ऋषिपाल, पूर्व पार्षद विपिन जिंदल, रविंद्र तेवतिया आदि ने भी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कहां गायब हो जाते हैं डा. राजवीर
महापौर ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी की बार-बार अनुपस्थिति और रिश्वत लेकर प्रमाण पत्र जारी होने की शिकायत पर नाराजगी जताई। नगरायुक्त को निर्देश दिए कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. राजवीर के खिलाफ प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, कमिश्नर और डीएम को रिपोर्ट भेजी जाए। कई बार निरीक्षण किया, लेकिन एक बार भी डा. राजवीर अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं पाए गए।
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भाग गए दलाल
निगम की दुकानों में संचालित जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था निगम प्रशासन ने भले ही भंग कर दी हो, लेकिन यहां अभी भी प्रमाण पत्रों के नाम पर जनता से ठगी चल रही है। बुधवार को निरीक्षण होने पर यहां से दलाल भागते नजर आए।
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जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को लेकर लगातार शिकायतें हो रही हैं कि व्यवस्था पूरी तरह से दलालों के हाथ में है। वहीं नगर स्वास्थ्य अधिकारी और लिपिक में खींचतान हो रही है। 10 दिन पहले भी महापौर ने निगम में निरीक्षण किया था और नगरायुक्त को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। बुधवार को महापौर हरिकांत अहलुवालिया अपने साथ नगरायुक्त अब्दुल समद, अपर नगरायुक्त लालचंद मौर्य, जीएम जल और कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव को लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कक्ष पहुंचे। यहां सब अव्यवस्थित मिला। फीडिंग करने वाले प्राइवेट कर्मचारियों ने 900 से 1000 फार्म लंबित होने की जानकारी दी। लिपिक दिनेश ने बताया कि फार्म फीडिंग होने के बाद नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पास जाते हैं, जिसके कारण प्रमाण पत्र लेट हो रहे हैं। बाहरी लोगों द्वारा कार्य कराए जाने और सही जवाब न मिलने पर महापौर का पारा चढ़ गया। उन्होंने नगरायुक्त से व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। इस दौरान मौजूद पार्षद सेंसरपाल, पंकज कतीरा, सुनीलदत्त सैनी, राजू वर्मा, हरीश कुमार, राजकुमार मुन्ना, ऋषिपाल, पूर्व पार्षद विपिन जिंदल, रविंद्र तेवतिया आदि ने भी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
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कहां गायब हो जाते हैं डा. राजवीर
महापौर ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी की बार-बार अनुपस्थिति और रिश्वत लेकर प्रमाण पत्र जारी होने की शिकायत पर नाराजगी जताई। नगरायुक्त को निर्देश दिए कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. राजवीर के खिलाफ प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, कमिश्नर और डीएम को रिपोर्ट भेजी जाए। कई बार निरीक्षण किया, लेकिन एक बार भी डा. राजवीर अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं पाए गए।
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भाग गए दलाल
निगम की दुकानों में संचालित जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था निगम प्रशासन ने भले ही भंग कर दी हो, लेकिन यहां अभी भी प्रमाण पत्रों के नाम पर जनता से ठगी चल रही है। बुधवार को निरीक्षण होने पर यहां से दलाल भागते नजर आए।