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होलोप्रोजन कैफिली से ग्रस्त बच्ची ने लिया जन्म
Meerut
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। मेडिकल कालेज अस्पताल में शनिवार को होलोप्रोजन कैफिली नामक डिसऑर्डर की शिकार बच्ची ने जन्म लिया। इस बच्ची के सिर्फ एक आंख है, जो कि माथे पर है। इसके अलावा मुंह है, लेकिन नाक नहीं है।
अस्पताल के गायनी विभाग में शास्त्रीनगर निवासी महिला ने साढ़े सात माह बाद ही बच्ची को जन्म दिया। डॉ. कीर्ति दुबे की देखरेख में दोपहर तीन बजे डिलीवरी हुई। नाक न होने के कारण वह ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी। मुंह के रास्ते फेफड़ों तक आक्सीजन ट्यूब पहुुंचाकर उसे जिंदा रखा जा रहा है। महिला की यह तीसरी डिलीवरी है। इससे पहले दो बेटे हुए, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। विभागीय चिकित्सक डॉ. रचना चौधरी ने बताया कि यह होलोप्रोजन कैफिली नामक डेवलपमेंट डिसआर्डर है। गर्भावस्था के शुरुआती तीन माह में भ्रूण के सिर और दिमाग का निर्माण होता है। गलत दवाओं के सेवन, अनुचित खानपान, डायबिटिक मां, रेडियोपैथिक किरणों के दुष्प्रभाव से भ्रूण अविकसित रह जाता है। ऐसे मामले साल में एक-दो ही आते हैं। बच्ची के अविकसित होने का पता अल्ट्रासाउंड में ही चल गया था। इसीलिए प्री मैच्योर डिलीवरी कराई गई है।
ये हो सकते हैं खतरे
चिकित्सकों के अनुसार, होलोप्रोजन कैफिली से ग्रस्त बच्चे लंबे समय तक जीवित नहीं रहते। अगर कोई बच्चा जिंदा रहता है, तो दिमाग अविकसित होता है। उम्र के मुताबिक शारीरिक विकास नहीं होता। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। ऐसे बच्चे अकसर मृत पैदा होते हैं या अल्पायु वाले होते हैं।
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अस्पताल के गायनी विभाग में शास्त्रीनगर निवासी महिला ने साढ़े सात माह बाद ही बच्ची को जन्म दिया। डॉ. कीर्ति दुबे की देखरेख में दोपहर तीन बजे डिलीवरी हुई। नाक न होने के कारण वह ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी। मुंह के रास्ते फेफड़ों तक आक्सीजन ट्यूब पहुुंचाकर उसे जिंदा रखा जा रहा है। महिला की यह तीसरी डिलीवरी है। इससे पहले दो बेटे हुए, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। विभागीय चिकित्सक डॉ. रचना चौधरी ने बताया कि यह होलोप्रोजन कैफिली नामक डेवलपमेंट डिसआर्डर है। गर्भावस्था के शुरुआती तीन माह में भ्रूण के सिर और दिमाग का निर्माण होता है। गलत दवाओं के सेवन, अनुचित खानपान, डायबिटिक मां, रेडियोपैथिक किरणों के दुष्प्रभाव से भ्रूण अविकसित रह जाता है। ऐसे मामले साल में एक-दो ही आते हैं। बच्ची के अविकसित होने का पता अल्ट्रासाउंड में ही चल गया था। इसीलिए प्री मैच्योर डिलीवरी कराई गई है।
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ये हो सकते हैं खतरे
चिकित्सकों के अनुसार, होलोप्रोजन कैफिली से ग्रस्त बच्चे लंबे समय तक जीवित नहीं रहते। अगर कोई बच्चा जिंदा रहता है, तो दिमाग अविकसित होता है। उम्र के मुताबिक शारीरिक विकास नहीं होता। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। ऐसे बच्चे अकसर मृत पैदा होते हैं या अल्पायु वाले होते हैं।
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