{"_id":"52-46107","slug":"Meerut-46107-52","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस सीजन में नहीं चल पाएगी मोहिउद्दीनपुर मिल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस सीजन में नहीं चल पाएगी मोहिउद्दीनपुर मिल
Meerut
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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मेरठ। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सुर्खियों में आई मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल वर्तमान पेराई सत्र में चालू नहीं हो पाएगी। उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड को मिल रिपेयरिंग की स्वीकृति अभी तक नहीं मिल पाई है। एमडी का कहना है कि स्वीकृति मिलने के बाद ही रिपेयरिंग शुरू कराई जा सकेगी। मिल रिपेयरिंग में कम से कम तीन महीने लगने की संभावना है।
पिछले दो पेराई सत्र से बंद उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की मोहिउद्दीनपुर मिल के चलने की संभावना को उस समय पंख लगे जब 10 नवंबर को मेरठ आए सीएम ने इसकी घोषणा की। इससे पहले सीएम के आदेश पर तकनीकी समिति ने मिल संचालन की संभावनाओं की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। रिपोर्ट में करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। किसानों को उम्मीद थी कि मिल वर्तमान पेराई सत्र में शुरू हो सकती है।
शुरू में निगम अधिकारियों ने भी मिल के जनवरी तक चालू होने की बात कही थी, लेकिन रिपेयर की स्वीकृति में देरी के कारण इस पेराई सत्र में मिल संचालन होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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इस बारेे में उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के एमडी सुरेश कुमार ने अमर उजाला को बताया कि अभी तक उन्हें मिल रिपेयर की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। विभाग को धन की नहीं, मिल रिपेयर की स्वीकृति चाहिए। रिपेयर में जितना खर्च होगा वह किया जाएगा।
अगर एक सप्ताह के अंदर मिल संचालन की स्वीकृति मिलती है तो भी मिल इस सत्र में शुरू नहीं हो सकती। देरी के बारे में उन्होंने बताया कि सरकारी कार्य टेंडरों के जरिये होते हैं। रिपेयरिंग की स्वीकृति मिलने के बाद अलग-अलग कार्यों के टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। इस औपचारिकता में कम से कम 15 से 20 दिन लग जाते हैं। इसके अलावा मिल में तकनीकी स्टाफ की भर्ती करने में भी वक्त लगेगा।
दूसरी मिलों को देना होगा गन्ना
शासन ने इस शर्त पर मिल क्षेत्र का गन्ना दूसरे मिलों को आवंटित किया है कि मिल चलने के बाद उनको गन्ने की आपूर्ति नहीं की जाएगी। लेकिन मिल के पेराई सत्र में शुरू न होने की स्थिति में क्षेत्र का गन्ना दूसरे मिल लेते रहेंगे।
...........................................
एक नजर
मिल क्षेत्र का गन्ना रकबा- 12 हजार 461 हेक्टेयर
मिल क्षेत्र के गांव- 80
क्षेत्र के गन्ना सदस्य- 19 हजार 930
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पिछले दो पेराई सत्र से बंद उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की मोहिउद्दीनपुर मिल के चलने की संभावना को उस समय पंख लगे जब 10 नवंबर को मेरठ आए सीएम ने इसकी घोषणा की। इससे पहले सीएम के आदेश पर तकनीकी समिति ने मिल संचालन की संभावनाओं की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। रिपोर्ट में करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। किसानों को उम्मीद थी कि मिल वर्तमान पेराई सत्र में शुरू हो सकती है।
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शुरू में निगम अधिकारियों ने भी मिल के जनवरी तक चालू होने की बात कही थी, लेकिन रिपेयर की स्वीकृति में देरी के कारण इस पेराई सत्र में मिल संचालन होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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इस बारेे में उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के एमडी सुरेश कुमार ने अमर उजाला को बताया कि अभी तक उन्हें मिल रिपेयर की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। विभाग को धन की नहीं, मिल रिपेयर की स्वीकृति चाहिए। रिपेयर में जितना खर्च होगा वह किया जाएगा।
अगर एक सप्ताह के अंदर मिल संचालन की स्वीकृति मिलती है तो भी मिल इस सत्र में शुरू नहीं हो सकती। देरी के बारे में उन्होंने बताया कि सरकारी कार्य टेंडरों के जरिये होते हैं। रिपेयरिंग की स्वीकृति मिलने के बाद अलग-अलग कार्यों के टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। इस औपचारिकता में कम से कम 15 से 20 दिन लग जाते हैं। इसके अलावा मिल में तकनीकी स्टाफ की भर्ती करने में भी वक्त लगेगा।
दूसरी मिलों को देना होगा गन्ना
शासन ने इस शर्त पर मिल क्षेत्र का गन्ना दूसरे मिलों को आवंटित किया है कि मिल चलने के बाद उनको गन्ने की आपूर्ति नहीं की जाएगी। लेकिन मिल के पेराई सत्र में शुरू न होने की स्थिति में क्षेत्र का गन्ना दूसरे मिल लेते रहेंगे।
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एक नजर
मिल क्षेत्र का गन्ना रकबा- 12 हजार 461 हेक्टेयर
मिल क्षेत्र के गांव- 80
क्षेत्र के गन्ना सदस्य- 19 हजार 930