{"_id":"5aa59a404f1c1ba6768b4f69","slug":"91520802368-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘माया को सभी भजें, माधव भजे न कोय’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘माया को सभी भजें, माधव भजे न कोय’
Updated Mon, 12 Mar 2018 02:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। कथा हमें स्वर्ग नहीं बल्कि मुक्ति देती है। कथा सुनने मात्र से ही बैकुंठ की प्राप्ति होती है। अपने जख्म दुनिया को मत दिखाओ क्योंकि हर व्यक्ति अपने हाथों में नमक लिए हुए है। अपनी समस्या प्रभु के चरणों में रखो। वे ही आपकी हर समस्या का समाधान कर सकते हैं।
ये विचार कथा वाचक पं. संजीव कुमार शास्त्री ने सोमदत्त विहार फेज-2 में स्थित शंकर वाटिका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कहे। रविवार को दूसरे दिन उन्होंने नारद जी व व्यास जी के संवाद की कथा सुनायी। कथा का पूजन यजमान विपिन त्यागी, दिलबाग बांगा, दीपक भाटिया एवं राजेश मिगलानी ने किया।
आंखों से हटाओ मायाजाल
पं. शास्त्री ने कहा कि ‘माया को सभी भजें, माधव भजे न कोय’। आज हर कोई लक्ष्मी को पाना चाहता है। लक्ष्मी सभी को चाहिए। लेकिन नारायण हरि के लिए किसी के पास समय नहीं है। नारायण को सच्चे मन से याद करोगे तो लक्ष्मी जी स्वयं ही नारायण के साथ आएंगी। जब तक माया जाल आंखों के आगे रहेगा, भगवान नजर नहीं आएंगे। जरूरत नजरिया बदलने की है, नजारे खुद बदल जाएंगे। भगवान आनंद के दाता हैं वे कभी भक्तों को दुख नहीं देते। सुख और दुख हमारे कर्मों के फल हैं। जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा। कथा में कामिनी बांगा, सुमन त्यागी, मनीषा राणा, हैपी राणा, सुभाष अरोड़ा, सुभाष बांगा, अभिषेक बांगा, तन्वी, गौरव, टेकचंद प्रजापति, राजपाल सिंह आदि का मुख्य सहयोग रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये विचार कथा वाचक पं. संजीव कुमार शास्त्री ने सोमदत्त विहार फेज-2 में स्थित शंकर वाटिका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कहे। रविवार को दूसरे दिन उन्होंने नारद जी व व्यास जी के संवाद की कथा सुनायी। कथा का पूजन यजमान विपिन त्यागी, दिलबाग बांगा, दीपक भाटिया एवं राजेश मिगलानी ने किया।
विज्ञापन
आंखों से हटाओ मायाजाल
पं. शास्त्री ने कहा कि ‘माया को सभी भजें, माधव भजे न कोय’। आज हर कोई लक्ष्मी को पाना चाहता है। लक्ष्मी सभी को चाहिए। लेकिन नारायण हरि के लिए किसी के पास समय नहीं है। नारायण को सच्चे मन से याद करोगे तो लक्ष्मी जी स्वयं ही नारायण के साथ आएंगी। जब तक माया जाल आंखों के आगे रहेगा, भगवान नजर नहीं आएंगे। जरूरत नजरिया बदलने की है, नजारे खुद बदल जाएंगे। भगवान आनंद के दाता हैं वे कभी भक्तों को दुख नहीं देते। सुख और दुख हमारे कर्मों के फल हैं। जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा। कथा में कामिनी बांगा, सुमन त्यागी, मनीषा राणा, हैपी राणा, सुभाष अरोड़ा, सुभाष बांगा, अभिषेक बांगा, तन्वी, गौरव, टेकचंद प्रजापति, राजपाल सिंह आदि का मुख्य सहयोग रहा।
विज्ञापन