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मिजाज बदले बार-बार तो हो जाएं सावधान
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मिजाज बदले बार-बार तो हो जाएं सावधान
मेरठ। यदि आपके मिजाज में अचानक बदलाव आ जाता है, अचानक खुश और दूसरे ही पल दुखी हो जाते हैं तो सावधान हो जाएं। दरअसल आप बायपोलर डिसऑर्डर के शिकार हो सकते हैं। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 30 मार्च को विश्व बायपोलर दिवस मनाया जाता है।
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि धैर्य की कमी के कारण अत्यधिक खुशी या गम तनाव की ऐसी जिंदगी में ले जाता है जहां से उबर पाना बहुत मुश्किल होता है। वहीं व्यक्ति के मिजाज और व्यवहार में बदलाव महज तनाव नहीं है, बल्कि यह बायपोलर डिसऑडर्र के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बायपोलर डिसऑर्डर को मूड डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। इसके तहत आपकी खुशी और गम दोनों अपनी पराकाष्ठा पर होते हैं। इस तरह के मामले हर रोज ओपीडी में आते हैं। जिला अस्पताल में भी काफी मरीज आते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि कार्यस्थल, समाज या परिवार में किसी व्यक्ति के व्यवहार में तेजी से आए बदलाव को जानना और समझना बहुत आवश्यक है। इस मर्ज से निपटने के लिए तनाव के प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अलावा मरीज को अपनी नींद का समय तय रखना चाहिए और नशीले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। इस बीमारी में आत्मविश्वास बनाए रखना और खुद पर नियंत्रण भी जरूरी होता है। साथ ही उन्हें दवा, मनोवैज्ञानिक इलाज और परिवार की काउंसिलिंग आदि महत्वपूर्ण बातों का भी ख्याल रखना चाहए। इस बीमारी में दवाओं का सेवन लंबे समय तक करना पड़ता है।
अनुवांशिक भी होती है बीमारी
ये बीमारी अनुवांशिक भी होती है। कई बार मस्तिष्क में रसायनों का असंतुलन या कुछ ऐसी घटनाएं और अपर्याप्त सामाजिक सहायता भी इस बीमारी का कारण बन सकती है। जब भी आप अपने मिजाज में उतार-चढ़ाव महसूस करें, तुरंत इसकी जांच कराएं। थोड़ी सी भी लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या का सबब बन सकती है।
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मेरठ। यदि आपके मिजाज में अचानक बदलाव आ जाता है, अचानक खुश और दूसरे ही पल दुखी हो जाते हैं तो सावधान हो जाएं। दरअसल आप बायपोलर डिसऑर्डर के शिकार हो सकते हैं। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 30 मार्च को विश्व बायपोलर दिवस मनाया जाता है।
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि धैर्य की कमी के कारण अत्यधिक खुशी या गम तनाव की ऐसी जिंदगी में ले जाता है जहां से उबर पाना बहुत मुश्किल होता है। वहीं व्यक्ति के मिजाज और व्यवहार में बदलाव महज तनाव नहीं है, बल्कि यह बायपोलर डिसऑडर्र के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बायपोलर डिसऑर्डर को मूड डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। इसके तहत आपकी खुशी और गम दोनों अपनी पराकाष्ठा पर होते हैं। इस तरह के मामले हर रोज ओपीडी में आते हैं। जिला अस्पताल में भी काफी मरीज आते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि कार्यस्थल, समाज या परिवार में किसी व्यक्ति के व्यवहार में तेजी से आए बदलाव को जानना और समझना बहुत आवश्यक है। इस मर्ज से निपटने के लिए तनाव के प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अलावा मरीज को अपनी नींद का समय तय रखना चाहिए और नशीले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। इस बीमारी में आत्मविश्वास बनाए रखना और खुद पर नियंत्रण भी जरूरी होता है। साथ ही उन्हें दवा, मनोवैज्ञानिक इलाज और परिवार की काउंसिलिंग आदि महत्वपूर्ण बातों का भी ख्याल रखना चाहए। इस बीमारी में दवाओं का सेवन लंबे समय तक करना पड़ता है।
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अनुवांशिक भी होती है बीमारी
ये बीमारी अनुवांशिक भी होती है। कई बार मस्तिष्क में रसायनों का असंतुलन या कुछ ऐसी घटनाएं और अपर्याप्त सामाजिक सहायता भी इस बीमारी का कारण बन सकती है। जब भी आप अपने मिजाज में उतार-चढ़ाव महसूस करें, तुरंत इसकी जांच कराएं। थोड़ी सी भी लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या का सबब बन सकती है।
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