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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने को 77 लाख का फंड
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मेरठ। कोरोना संक्रमण काल में शहरी अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है। वहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने सभी को प्रभावित किया है। इसका असर यह देखने को मिला कि शहर से मजदूर गांव की ओर चले। अब मुख्यमंत्री ने भी स्वयं सहायता समूहों को फंड देकर उन्हें उबारने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद करते हुए जिले के स्वयं सहायता समूहों के लिए 77 लाख 90 हजार का फंड ऑनलाइन ट्रांसफर किया। कलक्ट्रेट स्थित एनआईसी में भी पांच महिलाओं को बुलाया गया था। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी ईशा दुहन और जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी मौजूद रहे। जिला स्तर पर गांवों में महिलाएं अभी तक एक लाख से अधिक मास्क तैयार कर चुकी हैं। इन मास्क को सरकार खरीद रही है। एक मास्क 13 रुपये में बेचा जा रहा है। वहीं, कुछ स्वयं सहायता समूह ने तो पीपीई किट बनाकर अचंभित कर दिया है।
अधिकारियों के सामने दिया प्रजेंटेशन
गांव दतावली के आराध्या महिला समूह की सोहनवीरी ने पीपीई किट तैयार की है। इसका प्रजेंटेशन विकास भवन सभागार में जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी के समक्ष किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन पीपीई किट का कपड़ा मेडिकल प्रमाणित है। इनमें नॉन वूमेन फेब्रिक क्लॉथ 50 जीएसएम का प्रयोग किया है। महिला ने बताया कि वह इस पीपीई किट को 500 रुपये में बेच रही हैं। उनकी ये किट अभी तक मेरठ के एक अस्पताल ने ली हैं। ये सफल साबित हुई हैं।
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अब जिला प्रशासन को करना होगा सहयोग
इनके सहयोग के लिए जिला प्रशासन को आगे आना होगा। जिससे इनके सामान की मार्केटिंग हो सके। जिले में सरस सेंटर पर इनके बनाए मास्क और पीपीई किट को डिस्प्ले करना होगा। जिससे लोग स्वयंसेवी महिला समूहों द्वारा बनाए गए मास्क का उपयोग कर सकें।
ऐसे मिलेगा फंड
जिले में 116 स्वयं सहायता समूह ऐसे हैं जिन्हें अभी तीन महीने पूरे हुए हैं। इन्हें 15 हजार रुपये दिए जाएंगे। वहीं, 55 समूह ऐसे हैं जिन्हें छह महीने से अधिक हो गए हैं। इनके खाते में एक लाख 10 हजार रुपये भेजे जाएंगे।
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मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद करते हुए जिले के स्वयं सहायता समूहों के लिए 77 लाख 90 हजार का फंड ऑनलाइन ट्रांसफर किया। कलक्ट्रेट स्थित एनआईसी में भी पांच महिलाओं को बुलाया गया था। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी ईशा दुहन और जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी मौजूद रहे। जिला स्तर पर गांवों में महिलाएं अभी तक एक लाख से अधिक मास्क तैयार कर चुकी हैं। इन मास्क को सरकार खरीद रही है। एक मास्क 13 रुपये में बेचा जा रहा है। वहीं, कुछ स्वयं सहायता समूह ने तो पीपीई किट बनाकर अचंभित कर दिया है।
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अधिकारियों के सामने दिया प्रजेंटेशन
गांव दतावली के आराध्या महिला समूह की सोहनवीरी ने पीपीई किट तैयार की है। इसका प्रजेंटेशन विकास भवन सभागार में जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी के समक्ष किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन पीपीई किट का कपड़ा मेडिकल प्रमाणित है। इनमें नॉन वूमेन फेब्रिक क्लॉथ 50 जीएसएम का प्रयोग किया है। महिला ने बताया कि वह इस पीपीई किट को 500 रुपये में बेच रही हैं। उनकी ये किट अभी तक मेरठ के एक अस्पताल ने ली हैं। ये सफल साबित हुई हैं।
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अब जिला प्रशासन को करना होगा सहयोग
इनके सहयोग के लिए जिला प्रशासन को आगे आना होगा। जिससे इनके सामान की मार्केटिंग हो सके। जिले में सरस सेंटर पर इनके बनाए मास्क और पीपीई किट को डिस्प्ले करना होगा। जिससे लोग स्वयंसेवी महिला समूहों द्वारा बनाए गए मास्क का उपयोग कर सकें।
ऐसे मिलेगा फंड
जिले में 116 स्वयं सहायता समूह ऐसे हैं जिन्हें अभी तीन महीने पूरे हुए हैं। इन्हें 15 हजार रुपये दिए जाएंगे। वहीं, 55 समूह ऐसे हैं जिन्हें छह महीने से अधिक हो गए हैं। इनके खाते में एक लाख 10 हजार रुपये भेजे जाएंगे।