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तीजनबाई ने दो स्कूलों में दी प्रस्तुति
Updated Sat, 16 Dec 2017 02:37 AM IST
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मेरठ। दुशासन द्वारा चीरहरण के अपमान से क्रोधित द्रोपदी, एकांतवास में नकुल को समक्ष देखकर कहती हैं... तुम लोगों को कौन शर्म, मेरा तो अपमान हुआ है। मैं पराए की बेटी हूं तो तुम मेरी चिंता काहे करोगे, युद्ध का मैदान छोड़कर यहां आए हो। लेकिन जब भीम ने पैरों तले दबे दुशासन की भुजा उखाड़ी तो रक्त की धारा प्रवाहित हो उठी। दुशासन की बहती रक्तधारा में द्रोपदी ने बिखरे हुए बाल दुशासन क ी उसी भुजा के रक्त से धोए और कहा आज मैं सुहागिन बनी हूं। द्रोपदी के सम्मान की रक्षा, संकल्प पूर्ति और दुशासन वध का यह खूबसूरत चित्रण मशहूर पंडवानी गायिका तीजनबाई ने किया। स्पिक मैके के तत्वावधान में शुक्रवार को एमपीजीएस और विद्या ग्लोबल स्कूल में तीजनबाई ने प्रस्तुति दी।
अब तो बच्चे कहानी ही नहीं सुनते
तीजनबाई ने कहा कि मेरे अपने परिवार में किसी ने पंडवानी नहीं सीखी, अब किसी को जबरन बैठाकर डंडा मारकर कलाकार तो नहीं बना सकते। बच्चे पंडवानी में रुचि नहीं रखते। आजकल के बच्चे तो कहानी भी नहीं सुनते। मैंने तो अपने नाना से महाभारत की कहानी सुनकर ही पंडवानी सीखी है। बचपन में घर में पंडवानी गाती थी तो माता-पिता खूब डांटते थे, छिपकर गाती थी, क्योंकि तब लड़की का गाना-बजाना अच्छा नहीं मानते थे। लता मंगेशकर, हेमा मालिनी, गिरिजा देवी सभी के साथ स्टेज प्रोग्राम दे चुकी हूं।
छात्राओं को सुनाई द्रोपदी चीरहरण कथा
एमपीजीएस शास्त्रीनगर में स्पिक मैके के तत्वावधान में पंडवानी की प्रस्तुति हुई। छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोकगीत नाट्य की पहली महिला कलाकार तीजन बाई ने शुभारंभ किया। स्वागत प्रिंसिपल सपना आहूजा ने किया। तीजनबाई ने हाथ में तानपुरा लेकर छात्राओं को द्रोपदी चीरहरण, कृष्ण-अर्जुन संवाद की कथा सुनाई। संचालन शिवांगी तोमर ने किया। हारमोनियम पर चेतराम, तबला पर केवल देशमुख, ढपल पर श्रीरामचंद्र, मंजीरा पर खेमलाल, बैंजो पर दालेश्वर ने संगत दी। स्पिक मैके मेरठ चैप्टर की कोआर्डिनेटर सुचेता सहगल, अंकित बब्बर, प्रीति गुप्ता, सोनिया धवन व स्टाफ ने सहयोग दिया। कापालिक शैली में किया दुशासन वध का चित्रण
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विद्या ग्लोबल स्कूल में डॉ. तीजनबाई ने छात्रों को दुशासन वध संवाद सुनाया। पंडवानी की प्रमुख कापालिक शैली में छात्रों को दुशासन वध का पूरा चित्रण दिखाया। संस्थान के कार्यकारी निदेशक विशाल जैन, डॉ. राजीव चेची, डीन स्टूडेंट्स अफेयर रोहित खोखर व प्रिंसिपल विनीत सूद ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। वाइस प्रिंसिपल डॉ. बलजीत कौर सेठी, स्वप्ना. ए. आफले और शिक्षिकाओं ने सहयोग दिया।
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अब तो बच्चे कहानी ही नहीं सुनते
तीजनबाई ने कहा कि मेरे अपने परिवार में किसी ने पंडवानी नहीं सीखी, अब किसी को जबरन बैठाकर डंडा मारकर कलाकार तो नहीं बना सकते। बच्चे पंडवानी में रुचि नहीं रखते। आजकल के बच्चे तो कहानी भी नहीं सुनते। मैंने तो अपने नाना से महाभारत की कहानी सुनकर ही पंडवानी सीखी है। बचपन में घर में पंडवानी गाती थी तो माता-पिता खूब डांटते थे, छिपकर गाती थी, क्योंकि तब लड़की का गाना-बजाना अच्छा नहीं मानते थे। लता मंगेशकर, हेमा मालिनी, गिरिजा देवी सभी के साथ स्टेज प्रोग्राम दे चुकी हूं।
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छात्राओं को सुनाई द्रोपदी चीरहरण कथा
एमपीजीएस शास्त्रीनगर में स्पिक मैके के तत्वावधान में पंडवानी की प्रस्तुति हुई। छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोकगीत नाट्य की पहली महिला कलाकार तीजन बाई ने शुभारंभ किया। स्वागत प्रिंसिपल सपना आहूजा ने किया। तीजनबाई ने हाथ में तानपुरा लेकर छात्राओं को द्रोपदी चीरहरण, कृष्ण-अर्जुन संवाद की कथा सुनाई। संचालन शिवांगी तोमर ने किया। हारमोनियम पर चेतराम, तबला पर केवल देशमुख, ढपल पर श्रीरामचंद्र, मंजीरा पर खेमलाल, बैंजो पर दालेश्वर ने संगत दी। स्पिक मैके मेरठ चैप्टर की कोआर्डिनेटर सुचेता सहगल, अंकित बब्बर, प्रीति गुप्ता, सोनिया धवन व स्टाफ ने सहयोग दिया। कापालिक शैली में किया दुशासन वध का चित्रण
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विद्या ग्लोबल स्कूल में डॉ. तीजनबाई ने छात्रों को दुशासन वध संवाद सुनाया। पंडवानी की प्रमुख कापालिक शैली में छात्रों को दुशासन वध का पूरा चित्रण दिखाया। संस्थान के कार्यकारी निदेशक विशाल जैन, डॉ. राजीव चेची, डीन स्टूडेंट्स अफेयर रोहित खोखर व प्रिंसिपल विनीत सूद ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। वाइस प्रिंसिपल डॉ. बलजीत कौर सेठी, स्वप्ना. ए. आफले और शिक्षिकाओं ने सहयोग दिया।