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जमीन के बिना शहर से बाहर होंगी डेयरियां
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जमीन के बिना शहर से बाहर होंगी डेयरियां
- डीएम ने की डेयरी संचालकों के साथ बैठक, दिए निर्देश
- न्यायालय की अवमानना करने वालों से वसूला जाएगा अर्थदंड
- एक जून से डेयरियों को बाहर करने के लिए चलाया जाएगा अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर में किसी भी कीमत पर अब डेयरियां नहीं रहेंगी। बुधवार को जिलाधिकारी ने डेयरी संचालकों के साथ बैठक करके साफ कर दिया है। 30 जून सभी डेयरियां शहर से बाहर होंगी। एक जून से जिला प्रशासन, नगर निगम मिलकर डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए अभियान चलाएगा। न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने वालों से अर्थदंड वसूला जाएगा। प्रशासन को एक जुलाई को न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
डीएम अनिल ढींगरा ने बुधवार को बचत भवन सभागार में नगर निगम के अपर नगरायुक्त अमित सिंह, एमडीए सचिव राजकुमार और डेयरी संचालकों के साथ बैठक की। जिसमें डीएम ने सभी को हाईकोर्ट के आदेश से अवगत कराया। उन्होंने डेयरी संचालक को स्पष्ट किया कि 30 जून तक प्रत्येक दशा में शहरी क्षेत्र से बाहर अपनी डेयरियों को स्थापित करें। जो डेयरी संचालक न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करें, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए अर्थदंड वसूला जाए। अपर नगर आयुक्त अमित सिंह को निर्देश दिए कि वह डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए तैयारियां करें।
दो हजार डेयरियां कहां होंगी स्थापित
महानगर में लगभग दो हजार डेयरियां हैं। करीब 20 हजार से अधिक पशु हैं। जिन्हें शहर से बाहर किया जाना है। एमडीए की महायोजना में भले ही कैटल कालोनी विकसित करने की जिम्मेदारी हो। लेकिन अब एमडीए ने कैटल कालोनी के लिए भूमि न होने की कहकर पल्ला झाड़ लिया है। अब डेयरी संचालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। उधर, डेयरी संचालकों से पिछले सप्ताह भूमि के लिए आवेदन मांगे गए थे। अब सभी डेयरी संचालक को न्यायालय के आदेश के सामने पसीना छूटा हुआ है। डीएम ने भी डेयरी संचालकों को शहर से बाहर जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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पढ़ाया जिम्मेदार नागरिक बनने का पाठ
डीएम ने डेयरी संचालकों को शहर की स्वच्छता और प्रदूषण मुक्त बनाने में अपना दायित्व निभाने की सलाह दी। कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करें। स्वयं शहर के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनकर आपसी समन्वय स्थापित करके डेयरियों को शहर से बाहर करें। क्योंकि शहर में डेयरियों से निकलने वाले गोबर से नाली और नाले हर समय चोक रहते हैं। डेयरी संचालकों ने डीएम से अनुरोध किया कि डेयरी उनका आजीविका का साधन हैं। वह अपनी डेयरियों को शहर से बाहर करने को तैयार हैं। लेकिन प्रशासन को उनके रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। बैठक में एमडीए वीसी राजेश कुमार पांडेय, सचिव राजकुमार, अपर नगर आयुक्त अमित सिंह, डेयरी संचालक मौजूद रहे।
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- डीएम ने की डेयरी संचालकों के साथ बैठक, दिए निर्देश
- न्यायालय की अवमानना करने वालों से वसूला जाएगा अर्थदंड
- एक जून से डेयरियों को बाहर करने के लिए चलाया जाएगा अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर में किसी भी कीमत पर अब डेयरियां नहीं रहेंगी। बुधवार को जिलाधिकारी ने डेयरी संचालकों के साथ बैठक करके साफ कर दिया है। 30 जून सभी डेयरियां शहर से बाहर होंगी। एक जून से जिला प्रशासन, नगर निगम मिलकर डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए अभियान चलाएगा। न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने वालों से अर्थदंड वसूला जाएगा। प्रशासन को एक जुलाई को न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
डीएम अनिल ढींगरा ने बुधवार को बचत भवन सभागार में नगर निगम के अपर नगरायुक्त अमित सिंह, एमडीए सचिव राजकुमार और डेयरी संचालकों के साथ बैठक की। जिसमें डीएम ने सभी को हाईकोर्ट के आदेश से अवगत कराया। उन्होंने डेयरी संचालक को स्पष्ट किया कि 30 जून तक प्रत्येक दशा में शहरी क्षेत्र से बाहर अपनी डेयरियों को स्थापित करें। जो डेयरी संचालक न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करें, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए अर्थदंड वसूला जाए। अपर नगर आयुक्त अमित सिंह को निर्देश दिए कि वह डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए तैयारियां करें।
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दो हजार डेयरियां कहां होंगी स्थापित
महानगर में लगभग दो हजार डेयरियां हैं। करीब 20 हजार से अधिक पशु हैं। जिन्हें शहर से बाहर किया जाना है। एमडीए की महायोजना में भले ही कैटल कालोनी विकसित करने की जिम्मेदारी हो। लेकिन अब एमडीए ने कैटल कालोनी के लिए भूमि न होने की कहकर पल्ला झाड़ लिया है। अब डेयरी संचालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। उधर, डेयरी संचालकों से पिछले सप्ताह भूमि के लिए आवेदन मांगे गए थे। अब सभी डेयरी संचालक को न्यायालय के आदेश के सामने पसीना छूटा हुआ है। डीएम ने भी डेयरी संचालकों को शहर से बाहर जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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पढ़ाया जिम्मेदार नागरिक बनने का पाठ
डीएम ने डेयरी संचालकों को शहर की स्वच्छता और प्रदूषण मुक्त बनाने में अपना दायित्व निभाने की सलाह दी। कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करें। स्वयं शहर के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनकर आपसी समन्वय स्थापित करके डेयरियों को शहर से बाहर करें। क्योंकि शहर में डेयरियों से निकलने वाले गोबर से नाली और नाले हर समय चोक रहते हैं। डेयरी संचालकों ने डीएम से अनुरोध किया कि डेयरी उनका आजीविका का साधन हैं। वह अपनी डेयरियों को शहर से बाहर करने को तैयार हैं। लेकिन प्रशासन को उनके रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। बैठक में एमडीए वीसी राजेश कुमार पांडेय, सचिव राजकुमार, अपर नगर आयुक्त अमित सिंह, डेयरी संचालक मौजूद रहे।