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जनपद में 76 भट्टों को मिला पर्यावरण प्रमाण पत्र
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:15 AM IST
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मेरठ के 76 भट्ठों को मिला पर्यावरण प्रमाण पत्र
मेरठ।
ईंट भट्ठा उद्योग को पर्यावरण प्रमाण पत्र की बाध्यता के कारण बड़ा झटका लगने के बाद अब राहत मिली है। पिछले दो सालों से जूझ रहे जनपद के 225 भट्ठों में से अब तक 75 भट्ठे बंद हो चुके हैं। अब पर्यावरण विभाग द्वारा पर्यावरण प्रमाण पत्र जारी करना शुरू किया गया। जिसमें 76 प्रमाण पत्र जहां बृहस्पतिवार को जारी हुए, तो अब तक जनपद में करीब 125 भट्ठों को प्रमाण पत्र जारी होने के बाद इनके संचालन का रास्ता साफ हो चुका है।
मेरठ जनपद में तीन साल पहले तक 225 से ज्यादा भट्ठे संचालित थे। सुप्रीम कोर्ट और इसके बाद एनजीटी के आदेश के बाद पर्यावरण विभाग से प्रमाण पत्र (ईसी) लेने की बाध्यता ने इसउद्योग की कमर तोड़ दी थी। ईंट भट्ठा एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात कर एनओसी को शीघ्र जारी करने की मांग रखी। इसके बाद पिछले चार माह में करीब 40 भट्ठों को प्रमाण पत्र जारी हुए तो बृहस्पतिवार को 76 को प्रमाण पत्र जारी हो गए।
प्रतिबंधों के साथ जारी हुआ प्रमाण पत्र
पर्यावरण प्रमाण पत्र तीन साल के लिए जारी हुआ है। लेकिन इसमें प्रत्येक भट्ठा मालिक को अपने भट्ठे का हाई ड्राफ्ट निर्माण कराना पड़ेगा। जिसके तहत भट्ठा चकोर बनेगा और उसकी चिमनी के भीतर पंखा लगाया जाएगा। अब बारीक कोयले का प्रयोग किया जाएगा। यह हाई ड्राफ्ट निर्माण भट्ठा मालिकों को तीन साल के भीतर पूर्ण कराना होगा, तभी उनको जारी पर्यावरण प्रमाण पत्र का नवीनीकरण हो पाएगा। वहीं हस्तिनापुर वन्य अभ्यारण्य क्षेत्र को दो जोन में बफर और अपर में बांटा गया है। पर्यावरण प्रमाण पत्र जारी करने में अपर जोन के तहत आने वाले कुछ भट्ठों को तो राहत मिल गई। लेकिन बफर जोन में करीब आधा दर्जन भट्ठों को प्रमाण पत्र मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। वहीं मेरठ जनपद ईंट निर्माता समिति के महामंत्री पवन मित्तल का कहना है कि भट्ठे 30 जून तक ही चलेंगे। ऐसे में यह सीजन तो नुकसान में जाएगा, लेकिन अगला सीजन (अक्तूबर से जून) आराम से शुरू कर सकते हैं।
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मेरठ।
ईंट भट्ठा उद्योग को पर्यावरण प्रमाण पत्र की बाध्यता के कारण बड़ा झटका लगने के बाद अब राहत मिली है। पिछले दो सालों से जूझ रहे जनपद के 225 भट्ठों में से अब तक 75 भट्ठे बंद हो चुके हैं। अब पर्यावरण विभाग द्वारा पर्यावरण प्रमाण पत्र जारी करना शुरू किया गया। जिसमें 76 प्रमाण पत्र जहां बृहस्पतिवार को जारी हुए, तो अब तक जनपद में करीब 125 भट्ठों को प्रमाण पत्र जारी होने के बाद इनके संचालन का रास्ता साफ हो चुका है।
मेरठ जनपद में तीन साल पहले तक 225 से ज्यादा भट्ठे संचालित थे। सुप्रीम कोर्ट और इसके बाद एनजीटी के आदेश के बाद पर्यावरण विभाग से प्रमाण पत्र (ईसी) लेने की बाध्यता ने इसउद्योग की कमर तोड़ दी थी। ईंट भट्ठा एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात कर एनओसी को शीघ्र जारी करने की मांग रखी। इसके बाद पिछले चार माह में करीब 40 भट्ठों को प्रमाण पत्र जारी हुए तो बृहस्पतिवार को 76 को प्रमाण पत्र जारी हो गए।
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प्रतिबंधों के साथ जारी हुआ प्रमाण पत्र
पर्यावरण प्रमाण पत्र तीन साल के लिए जारी हुआ है। लेकिन इसमें प्रत्येक भट्ठा मालिक को अपने भट्ठे का हाई ड्राफ्ट निर्माण कराना पड़ेगा। जिसके तहत भट्ठा चकोर बनेगा और उसकी चिमनी के भीतर पंखा लगाया जाएगा। अब बारीक कोयले का प्रयोग किया जाएगा। यह हाई ड्राफ्ट निर्माण भट्ठा मालिकों को तीन साल के भीतर पूर्ण कराना होगा, तभी उनको जारी पर्यावरण प्रमाण पत्र का नवीनीकरण हो पाएगा। वहीं हस्तिनापुर वन्य अभ्यारण्य क्षेत्र को दो जोन में बफर और अपर में बांटा गया है। पर्यावरण प्रमाण पत्र जारी करने में अपर जोन के तहत आने वाले कुछ भट्ठों को तो राहत मिल गई। लेकिन बफर जोन में करीब आधा दर्जन भट्ठों को प्रमाण पत्र मिलना मुश्किल नजर आ रहा है। वहीं मेरठ जनपद ईंट निर्माता समिति के महामंत्री पवन मित्तल का कहना है कि भट्ठे 30 जून तक ही चलेंगे। ऐसे में यह सीजन तो नुकसान में जाएगा, लेकिन अगला सीजन (अक्तूबर से जून) आराम से शुरू कर सकते हैं।
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