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पहले बेची, फिर सरेंडर कर दी जमीन

Mon, 04 Dec 2017 02:14 AM IST
Updated Mon, 04 Dec 2017 02:14 AM IST
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पहले बेची, फिर सरेंडर कर दी जमीन
मेरठ। भू अधिग्रहण के समय किसानों ने खेल किया। सीलिंग में आ रही जमीन को पहले बेच डाला और फिर सरेंडर कर दिया। उधर, उस जमीन पर आवास बन गए। एमडीए को मिली 17 हजार वर्ग मीटर जमीन पर इत्तेफानगर में यही खेल हुआ। मामला सामने आने पर एमडीए के अधिकारी अब इसके दस्तावेज तलाश रहे हैं।
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भू अधिग्रहण प्रक्रिया में अर्बन सीलिंग एक्ट के तहत जमीन सील होती रही हैं। हालांकि यह एक्ट अब नहीं है। लेकिन इससे पूर्व में जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया में इस एक्ट के तहत कार्रवाई होती रही हैं। यह यदि किसी व्यक्ति के पास 1500 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन शहरी क्षेत्र में है तो वह जमीन सीलिंग की श्रेणी में आ जाती है। यह छूट किसान को होती है कि वह सरप्लस कौन सी जमीन को सरेंडर करे।
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सरेंडर में कर दिया खेल
बीस साल पहले मेरठ खास की जमीन का अधिग्रहण हुआ तो किसानों ने खेल किया। लिसाड़ी रोड पर एमडीए को सीलिंग की जमीन दी गई। लेकिन वह पहले ही लोगों को बेच डाली। उस समय सरकारी अधिकारियों की भी मिलीभगत रही होगी कि इस जमीन पर कब्जा नहीं लिया गया। उल्टा जमीन सरेंडर करने वालों ने इसका मुआवजा भी बनवा लिया। हालांकि यह मुआवजा कम मिला। लेकिन इससे उन्हें तो दोहरा लाभ हो ही गया। अब वहां सघन आबादी हो गई है यह जमीन पूरी तरह से एमडीए के हाथ से निकल गई है।
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अभिलेखों में एमडीए के नाम दर्ज
यह जमीन वर्तमान में भी अभिलेखों में एमडीए के नाम दर्ज है। खसरा संख्या 2832, 2833 तथा 2091 में कुल 1.54 हेक्टेयर जमीन एमडीए के नाम दर्ज है। हैरत की बात यह है कि मेरठ विकास प्राधिकरण को इस जमीन का पता ही नहीं चला। आयुक्त से शिकायत हुई तो एमडीए को इसकी जानकारी हुई।
100 रुपये के स्टांप पर बेची जमीन
इस जमीन पर अब पूर्ण आबादी है। यहां काफी मकान बने हुए हैं। यहां के बाशिंदों ने उसी समय सौ-सौ रुपये के स्टांप पर ही यह जमीन खरीद ली। यानी पूरी तरह से अनाधिकृत रूप से इस जमीन की खरीद की गई।
एमडीए अधिकारियों ने बनाई वीडियो
शिकायत के बाद अब एमडीए टीम ने इसकी जांच शुरू की है। तहसीलदार करनवीर सिंह ने मौके पर जाकर यहां वीडियोग्राफी कराई। लोगों से बात की। काफी मकान मालिक तो ऐसे मिले जिन्होंने किसी ओर से जमीन ली है। यानी एक प्लॉट कई-कई बार बेेचा जा चुका है। लोगों को यह तक पता नहीं है कि यह जमीन एमडीए की है।
कैसे होगी कब्जा मुक्त
17 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा इस जमीन पर अनाधिकृत रूप से कई सौ मकान बने हैं। वर्षों से लोग रह रहे हैं। ऐसे में एमडीए इस जमीन को कैसे कब्जा मुक्त करा पाएगा। करोड़ों की यह जमीन एमडीए अधिकारियों की लापरवाही से हाथ से निकल गई है। यहां ध्वस्तीकरण करना तो टेढ़ी खीर है। केवल शमन शुल्क लगाकर यहां एमडीए इस जमीन के पैसे वसूल सकता है।

हम जांच कर रहे हैं
एमडीए के तहसीलदार करनवीर सिंह के अनुसार मैंने यहां जाकर वीडियोग्राफी कराई। जांच की जा रही है। जमीन तो एमडीए की। लेकिन वर्षों पहले से यहां कब्जे हैं। लोगों ने सौ-सौ रुपये के स्टांप पर ही प्लॉट खरीदकर मकान बनाए हैं जो अब सघन आबादी क्षेत्र बन चुका है।
खास बातें:
17 हजार वर्ग मीटर जमीन मिली थी यह एमडीए को
100-100 रुपये के स्टांप पर लोगों ने खरीद रखी है जमीन
- इत्तेफाकनगर में ऐसी जमीन पर अब बन गए आवास
- एमडीए टीम ने बनाई मौके पर जाकर वीडियो
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