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सीए की परीक्षा उतीर्ण कर कोमल ने किया मां-बाप का नाम रोशन
Updated Wed, 19 Jul 2017 08:58 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कंकरखेड़ा।
सीमित संसाधनों के बीच शहर की एक लड़की ने सीए की परीक्षा पास कर अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। तीन बहनों में सबसे छोटी कोमल ने सीए की परीक्षा में 800 में से 466 अंक प्राप्त किए हैं। इससे परिवार में खुशी का माहौल है। पड़ोसियों ने भी घर पहुंचकर उन्हें बधाईयां दीं।
मूल रूप से थाना मुंडाली क्षेत्र के गांव मऊखास के रहने वाले हेमचंद मेरठ के शास्त्री नगर सेक्टर चार में रहते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 24 साल पहले वह गांव छोड़कर शहर आ गए थे। यहां कंप्यूटर टाइपिंग का काम करके परिवार चलाया। उन्होंने बताया कि उनकी तीन बेटियां दीपा, प्रिति और कोमल हैं। कोई बेटा नहीं है। लेकिन उन्हें इसका कभी मलाल नहीं हुआ। हेमचंद ने बताया कि उन्होंने ठान लिया था कि बेटियों को ही बेहतर शिक्षा देकर कामयाबी के शिखर तक पहुंचाना है। आज सबसे छोटी बेटी कोमल ने सीए की परीक्षा पास कर उनकी जीवन भर की मेहनत सफल कर दी है। वहीं मां चंदा देवी का कहना है कि उनके पति ने बेटियों को कामयाब करने के लिए रात दिन एक कर दिया। बेटियों ने इस कदर नाम रोशन किया कि अब बेटा न होने का मलाल नहीं है। सभी को बेटियों को समान अधिकार और शिक्षा देनी चाहिए।
रोशन करना था माता-पिता का नाम
कोमल ने बताया कि उसने 10वीं व 12वीं की परीक्षा शांता स्मारक कालेज से और ग्रेजुएशन मेरठ कॉलेज से किया। 12वीं में क्लास टीचर मंजू ने उसे सीए करने के लिए प्रेरित किया था। इसके अलावा बड़ी बहन दीपा जूनियर हाई स्कूल में टीचर हैं। उससे छोटी प्रिति ने एमलिब किया है। छोटी होने के बावजूद वह दोनों बड़ी बहनों से बेहतर करना चाहती थी। इसलिए उसने 15-15 घंटे पढ़ाई की।
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खास बातें===
तीन बहनों में सबसे छोटी कोमल ने सीए में 800 में पाए 466 अंक
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कंकरखेड़ा।
सीमित संसाधनों के बीच शहर की एक लड़की ने सीए की परीक्षा पास कर अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। तीन बहनों में सबसे छोटी कोमल ने सीए की परीक्षा में 800 में से 466 अंक प्राप्त किए हैं। इससे परिवार में खुशी का माहौल है। पड़ोसियों ने भी घर पहुंचकर उन्हें बधाईयां दीं।
मूल रूप से थाना मुंडाली क्षेत्र के गांव मऊखास के रहने वाले हेमचंद मेरठ के शास्त्री नगर सेक्टर चार में रहते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 24 साल पहले वह गांव छोड़कर शहर आ गए थे। यहां कंप्यूटर टाइपिंग का काम करके परिवार चलाया। उन्होंने बताया कि उनकी तीन बेटियां दीपा, प्रिति और कोमल हैं। कोई बेटा नहीं है। लेकिन उन्हें इसका कभी मलाल नहीं हुआ। हेमचंद ने बताया कि उन्होंने ठान लिया था कि बेटियों को ही बेहतर शिक्षा देकर कामयाबी के शिखर तक पहुंचाना है। आज सबसे छोटी बेटी कोमल ने सीए की परीक्षा पास कर उनकी जीवन भर की मेहनत सफल कर दी है। वहीं मां चंदा देवी का कहना है कि उनके पति ने बेटियों को कामयाब करने के लिए रात दिन एक कर दिया। बेटियों ने इस कदर नाम रोशन किया कि अब बेटा न होने का मलाल नहीं है। सभी को बेटियों को समान अधिकार और शिक्षा देनी चाहिए।
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रोशन करना था माता-पिता का नाम
कोमल ने बताया कि उसने 10वीं व 12वीं की परीक्षा शांता स्मारक कालेज से और ग्रेजुएशन मेरठ कॉलेज से किया। 12वीं में क्लास टीचर मंजू ने उसे सीए करने के लिए प्रेरित किया था। इसके अलावा बड़ी बहन दीपा जूनियर हाई स्कूल में टीचर हैं। उससे छोटी प्रिति ने एमलिब किया है। छोटी होने के बावजूद वह दोनों बड़ी बहनों से बेहतर करना चाहती थी। इसलिए उसने 15-15 घंटे पढ़ाई की।
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खास बातें===
तीन बहनों में सबसे छोटी कोमल ने सीए में 800 में पाए 466 अंक