{"_id":"5ba40a06867a557f6c068bb2","slug":"51537477126-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टेंट पेगिंग में घुड़सवारों ने दिखाया कमाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टेंट पेगिंग में घुड़सवारों ने दिखाया कमाल
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टेंट पेगिंग में घुड़सवारों ने दिखाया कमाल
मेरठ। आरवीसी के ग्राउंड पर पांच दिन से चल रही घुड़सवारी प्रतियोगिता में बृहस्पतिवार को टेंट पेगिंग में घुड़सवारों ने खूब कमाल दिखाया। रोमांचक मुकाबलों में घुड़सवारों ने टारगेट को हिट करके अपनी प्रतिभा दिखाई।
आरवीसी में 15 सितंबर से घुड़सवारी की विभिन्न प्रतियोगिताएं हो रही हैं। विशेष ट्रेनिंग और टेस्टिंग कैंप में घुड़सवारों ने अश्वों के साथ बेहतर तालमेल के चलते शानदार प्रदर्शन किया। सेना के साथ ही सिविलयन घुड़सवारों ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई। ड्रेसाज और क्रॉस कंट्री इवेंट के बाद बृहस्पतिवार को टेंट पेगिंग प्रतियोगिता हुई। टेंट पेगिंग बहुत पुरानी स्पर्धा है। इसे सिकंदर के समय से बताया जाता है। यह खेल मूल रूप से एक घुड़सवार तकनीक वाला था, जिसको सोये हुए दुश्मन को खत्म करने के लिए बनाया गया था। माना जाता है कि चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से टेंट पेगिंग विभिन्न देशों में खेला जा रहा है। बाद में एशिया और यूरोपीय साम्राज्यों ने दुनिया भर में इस खेल को फैलाया। टेंट पेगिंग में घुड़सवार को तेज दौड़ते हुए तलवार या लांस का प्रयोग करके जमीन पर पड़े लक्ष्य को उठाना या पकड़ना होता है। एशियाई ओलंपिक परिषद ने 1982 में टेंट पेगिंग को आधिकारिक खेल के रूप में मान्यता दी। सन 1985 में पहली अंतरराष्ट्रीय टेंट पेगिंग चैंपियनशिप का आयोजन हैदराबाद में किया गया था।
विज्ञापन
मेरठ। आरवीसी के ग्राउंड पर पांच दिन से चल रही घुड़सवारी प्रतियोगिता में बृहस्पतिवार को टेंट पेगिंग में घुड़सवारों ने खूब कमाल दिखाया। रोमांचक मुकाबलों में घुड़सवारों ने टारगेट को हिट करके अपनी प्रतिभा दिखाई।
आरवीसी में 15 सितंबर से घुड़सवारी की विभिन्न प्रतियोगिताएं हो रही हैं। विशेष ट्रेनिंग और टेस्टिंग कैंप में घुड़सवारों ने अश्वों के साथ बेहतर तालमेल के चलते शानदार प्रदर्शन किया। सेना के साथ ही सिविलयन घुड़सवारों ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई। ड्रेसाज और क्रॉस कंट्री इवेंट के बाद बृहस्पतिवार को टेंट पेगिंग प्रतियोगिता हुई। टेंट पेगिंग बहुत पुरानी स्पर्धा है। इसे सिकंदर के समय से बताया जाता है। यह खेल मूल रूप से एक घुड़सवार तकनीक वाला था, जिसको सोये हुए दुश्मन को खत्म करने के लिए बनाया गया था। माना जाता है कि चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से टेंट पेगिंग विभिन्न देशों में खेला जा रहा है। बाद में एशिया और यूरोपीय साम्राज्यों ने दुनिया भर में इस खेल को फैलाया। टेंट पेगिंग में घुड़सवार को तेज दौड़ते हुए तलवार या लांस का प्रयोग करके जमीन पर पड़े लक्ष्य को उठाना या पकड़ना होता है। एशियाई ओलंपिक परिषद ने 1982 में टेंट पेगिंग को आधिकारिक खेल के रूप में मान्यता दी। सन 1985 में पहली अंतरराष्ट्रीय टेंट पेगिंग चैंपियनशिप का आयोजन हैदराबाद में किया गया था।
विज्ञापन