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सिंचाई विधि

Sun, 18 Jun 2017 07:15 PM IST
Updated Sun, 18 Jun 2017 07:15 PM IST
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सिंचाई विधि
नंगलामल शुगर मिल के प्रोत्साहन पर दर्जनों किसानों ने अपनाई तकनीक
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गन्ना विभाग व चीनी मिल दे रहे प्रोजेक्ट को सब्सिडी

मेरठ। बेतरतीब जल दोहन से पानी की समस्या से जूझ रहे वेस्ट यूपी को इजरायली ड्रिप इरिगेशन तकनीक ने संभालना शुरू कर दिया है। महंगी तकनीक में वित्तीय मदद मिलने से गन्ना किसानों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया है। नंगलामल मिल क्षेत्र के दो दर्जन से ज्यादा किसानों ने अपने खेतों में इसे स्थापित करा लिया है। जल व समय की बचत और फसल बढ़ोतरी से किसान खुश हैं।

ये है सिंचाई विधि
इजरायली ड्रिप इरिगेशन तकनीक एक ऐसी तकनीक है जिसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कम अंतराल पर सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। जबकि परंपरागत सिंचाई (फ्ल्ड इरिगेशन) में अधिकतर पानी रिसकर जमीन और वाष्प के रूप में बेकार चला जाता है।
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70 फीसदी पानी की होती है बचत
गन्ने की फसल को पानी की भरपूर जरूरत होती है। एक हेक्टेयर खेत की परंपरागत विधि से सिंचाई करने में 12 से 14 घंटे लगते हैं। जबकि इस तकनीक से मात्र डेढ़ से दो घंटे में ही एक हेक्टेयर फसल की सिंचाई हो जाती है। इससे 70 फीसदी तक जल की बचत होती है। इस पद्धति से रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों की खपत भी कम हो जाती है। रासायनिक उर्वरक द्वारा पोषक तत्व बराबर मात्रा में पौधे की जड़ों तक पहुंच जाता है। इससे पैदावार भी अधिक होती है और जमीन की अम्लीयता व क्षारीयता भी नहीं बढ़ती।
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सब्जी व फल उत्पादन में सिरमौर
अपनी तकनीक व सुरक्षा मामलों में दुनिया के टॉप टेन देशों में शामिल इजरायल एक रेगिस्तानी देश है। उपजाऊ मिट्टी नहीं होने के बावजूद इजरायल ने टपक सिंचाई के दम पर ही प्रति हेक्टेयर सब्जी और फल के सर्वाधिक उत्पादन में महारथ हासिल की है। पिछले 52 साल से काम कर ही इजरायली कंपनी नेटाफिम अब गन्ना बेल्ट को भी बचाने के लिए अपनी तकनीक किसानों को मुहैया करा रही है।

30 हेक्टेयर जमीन में स्थापित हुआ संयंत्र
जनपद में ड्रिप इरिगेशन पर नंगलामल मिल बेहतरीन काम कर रहा है। मिल व गन्ना विभाग के सहयोग से मिल क्षेत्र के गांव माछरा, कबूलपुर, गेसूपुर, अजराड़ा, अटोला, रछौती, जसोरी, खरखौदा, खंदरावली, गोविंदपुरी आदि के करीब 26 किसानों ने अपनी 30 हेक्टेयर जमीन पर ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगवा लिया है। किसानों ने बताया कि ड्रिप सिंचाई से न केवल पानी और समय की बचत हो रही है, बल्कि फसल भी बाकी खेतों से 30 फीसदी ज्यादा है।

मिल व गन्ना विभाग कर रहे मदद
ड्रिप सिंचाई तकनीक महंगी होेने के चलते किसान हाथ खड़े कर देते हैं। लेकिन अब मदद के लिए गन्ना विभाग व शुगर मिल आगे आई हैं। एक हेक्टेयर में संयंत्र स्थापित करने में करीब 1 लाख 50 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें 50 हजार शुगर मिल, 50 हजार गन्ना विभाग, 20 हजार गन्ना परिषद् वहन करती है। किसान को प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये देने होते हैं।

समय और पानी की भरपूर बचत
परंपरागत सिंचाई के मुकाबले ड्रिप सिंचाई से प्रति हेक्टेयर 70 फीसदी पानी की और पांच गुणा समय की बचत होती है। फसल पैदावार में भी 30 से 50 फीसदी की वृद्धि होती है। नगंलामल मिल इस तकनीक को न केवल बढ़ावा दे रहा है, बल्कि इच्छुक किसानों के यहां संयंत्र भी लगवा रहा है। अब तक 26 किसानों के यहां यह तकनीक पहुंच गई है। - एलडी शर्मा, जीएम, केन नंगलामल शुगर कांप्लेक्स


किसान हो सकते हैं मालामाल
भविष्य में किसानों को ड्रिप इरिगेशन सिस्टम ही बचा सकता है। बेतरतीब पानी दोहन और फसल चक्र नहीं अपनाने से जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। ड्रिप इरिगेशन के लिए सरकार और शुगर मिल अनुदान दे रहे हैं। - हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र
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