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महिला जिला अस्पताल का हाल, सालभर में बदहाल
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बनी बिल्डिंग में महिला जिला अस्पताल को शिफ्ट हुए एक साल ही हुआ है, लेकिन अस्पताल में अभी सेटाइल्स उखड़ने लगी हैं। लिफ्ट खराब पड़ी है। दीवारों पर कई जगह सीलन आ गई है। अस्पताल में आग बुझाने के भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत पुराने महिला जिला अस्पताल के ठीक पीछे अस्पताल की नई बिल्डिंग बनाई गई थी। यह बिल्डिंग 100 बेड की पांच मंजिला है। यह 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रोजेक्ट था। पुरानी बिल्डिंग से इस
बिल्डिंग में फरवरी 2018 में महिला जिला अस्पताल शिफ्ट हुआ था। कुछ दिन बाद से ही इसकी टाइल्स उखड़नी शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में इन्हें दुरुस्त कराया गया था, लेकिन अब फिर से उखड़ने लगी हैं। पहले जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग की थी। अब यह जिम्मेदारी महिला जिला अस्पताल प्रबंधन की है। वहीं महिला जिला अस्पताल में हर साल एक लाख से ज्यादा मरीज आते हैं। वहीं पांच हजार से ज्यादा डिलीवरी होती हैं।
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जल्द कराए जाएंगे ठीक
इसका निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग का इसे ठीक कराने की समय अवधि पूरी हो चुकी है। अब अस्पताल प्रबंधन को ही इसे दुरुस्त कराना है। जल्द ही टाइल्स, लिफ्ट और सीलन आने आदि का इंतजाम किया जाएगा। - डॉ. मनीषा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, महिला जिला अस्पताल
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फोटो....
कुर्सी बांधकर रखनी पड़ती है
पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में स्ट्रेचर के लिए तो मारामारी रहती ही है। ओपीडी के बाहर रखी कुर्सी तक बांधकर रखनी पड़ रही है। क्लीनिक के बाहर रखी कुर्सी को गेट के जरिए रस्सी से बांधा हुआ है। अस्पतालों के जिम्मेदारों को डर है कि कहीं कोई मरीज इसे उठाकर न ले जाए।
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मेरठ। 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बनी बिल्डिंग में महिला जिला अस्पताल को शिफ्ट हुए एक साल ही हुआ है, लेकिन अस्पताल में अभी सेटाइल्स उखड़ने लगी हैं। लिफ्ट खराब पड़ी है। दीवारों पर कई जगह सीलन आ गई है। अस्पताल में आग बुझाने के भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत पुराने महिला जिला अस्पताल के ठीक पीछे अस्पताल की नई बिल्डिंग बनाई गई थी। यह बिल्डिंग 100 बेड की पांच मंजिला है। यह 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रोजेक्ट था। पुरानी बिल्डिंग से इस
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बिल्डिंग में फरवरी 2018 में महिला जिला अस्पताल शिफ्ट हुआ था। कुछ दिन बाद से ही इसकी टाइल्स उखड़नी शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में इन्हें दुरुस्त कराया गया था, लेकिन अब फिर से उखड़ने लगी हैं। पहले जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग की थी। अब यह जिम्मेदारी महिला जिला अस्पताल प्रबंधन की है। वहीं महिला जिला अस्पताल में हर साल एक लाख से ज्यादा मरीज आते हैं। वहीं पांच हजार से ज्यादा डिलीवरी होती हैं।
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जल्द कराए जाएंगे ठीक
इसका निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग का इसे ठीक कराने की समय अवधि पूरी हो चुकी है। अब अस्पताल प्रबंधन को ही इसे दुरुस्त कराना है। जल्द ही टाइल्स, लिफ्ट और सीलन आने आदि का इंतजाम किया जाएगा। - डॉ. मनीषा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, महिला जिला अस्पताल
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कुर्सी बांधकर रखनी पड़ती है
पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में स्ट्रेचर के लिए तो मारामारी रहती ही है। ओपीडी के बाहर रखी कुर्सी तक बांधकर रखनी पड़ रही है। क्लीनिक के बाहर रखी कुर्सी को गेट के जरिए रस्सी से बांधा हुआ है। अस्पतालों के जिम्मेदारों को डर है कि कहीं कोई मरीज इसे उठाकर न ले जाए।