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मन वांछित फल देने वाली हैं मां चंडी देवी
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चंडी देवी के दरबार में पूरी होती हैं मनोकामनाएं
मेरठ। नौचंदी मैदान स्थित मां चंडी देवी के मंदिर में श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती है। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान मंदोदरी ने चंडी देवी की मूर्ति स्थापित कर यहां सबसे पहले पूजा की थी। उन्होंने मंदिर तक आने के लिए एक गुप्त मार्ग भी बनवाया था, इसी मार्ग से वह मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती थीं। आज यह मंदिर नवचंडी देवी, नौचंदी देवी व चंडी देवी नाम से प्रसिद्ध है।
मुख्य पुजारी महेंद्र शर्मा ने बताया कि उनका परिवार सात पीढ़ियों से मंदिर में सेवा कर रहा है। जब चंडी देवी के मंदिर की स्थापना हुई थी, तब से मां के नौ रूप होने के कारण मां को नवचंडी देवी के नाम से भी पुकारा जाता था। समय गुजरने के साथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी। यहां नौचंदी मेला भी लगने लगा। 18वीं शताब्दी में यहां एक दिन का मेला लगता था। इसके बाद चैत्र शुक्ल के नवरात्र में पहले तीन दिन, फिर नौ दिन और अब 40 दिन मेला लगता है।
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मनोकामना पूर्ण करती हैं मां
- मान्यता है कि अगर कोई भक्त सच्चे मन से चंडी देवी की 40 दिन तक पूजा करता है, तो मां प्रसन्न हो जाती हैं। पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए भी यहां श्रद्धालु पूजा करते हैं। नवरात्र में मां की अखंड ज्योति जलाई जाती है। - देवेंद्र शर्मा, श्रद्धालु
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मां का स्वरूप अलौकिक
- मां का अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर देता है। दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूर्ण हो जाती है। -आकाश, श्रद्धालु
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मेरठ। नौचंदी मैदान स्थित मां चंडी देवी के मंदिर में श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती है। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान मंदोदरी ने चंडी देवी की मूर्ति स्थापित कर यहां सबसे पहले पूजा की थी। उन्होंने मंदिर तक आने के लिए एक गुप्त मार्ग भी बनवाया था, इसी मार्ग से वह मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती थीं। आज यह मंदिर नवचंडी देवी, नौचंदी देवी व चंडी देवी नाम से प्रसिद्ध है।
मुख्य पुजारी महेंद्र शर्मा ने बताया कि उनका परिवार सात पीढ़ियों से मंदिर में सेवा कर रहा है। जब चंडी देवी के मंदिर की स्थापना हुई थी, तब से मां के नौ रूप होने के कारण मां को नवचंडी देवी के नाम से भी पुकारा जाता था। समय गुजरने के साथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी। यहां नौचंदी मेला भी लगने लगा। 18वीं शताब्दी में यहां एक दिन का मेला लगता था। इसके बाद चैत्र शुक्ल के नवरात्र में पहले तीन दिन, फिर नौ दिन और अब 40 दिन मेला लगता है।
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मनोकामना पूर्ण करती हैं मां
- मान्यता है कि अगर कोई भक्त सच्चे मन से चंडी देवी की 40 दिन तक पूजा करता है, तो मां प्रसन्न हो जाती हैं। पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए भी यहां श्रद्धालु पूजा करते हैं। नवरात्र में मां की अखंड ज्योति जलाई जाती है। - देवेंद्र शर्मा, श्रद्धालु
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मां का स्वरूप अलौकिक
- मां का अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर देता है। दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूर्ण हो जाती है। -आकाश, श्रद्धालु