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मेनका प्रकरण में प्रशासन दबाव में
Updated Fri, 20 Jul 2018 03:08 AM IST
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मेरठ। मेनका सिनेमा मामले में जिस तरह प्रशासन लापरवाह नजर आ रहा है, उससे चर्चा है कि जिला प्रशासन पर कोई बड़ा दबाव है। क्योंकि लेखपालों की हड़ताल समाप्त हुए दो दिन हो चुके हैं। लेकिन इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई अभी शून्य है। जबकि पुराने तमाम पत्र इस जमीन के सरकारी होने और कब्जे होने की स्पष्ट गवाही दे रहे हैं।
मेनका मामले में शुरूआती कार्रवाई बड़ी तेजी से हुई। लेकिन जैसे ही इसमें कुछ नामचीन ग्रुप और लोगों के नाम जुड़ने शुरू हुए तो प्रशासन बैकफुट पर आता नजर आने लगा। शुरूआती कार्रवाई में नगर निगम ने जहां मेनका सिनेमा को तोड़ने के लिए दी गयी एनओसी को निरस्त कर दिया, तो एमडीए ने इस तोड़े गए भवन पर सील लगा दी। लेकिन इससे आगे की कार्रवाई पर जिला प्रशासन की तरफ से एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ने कहा कि लेखपालों की हड़ताल के कारण रिपोर्ट रुकी हुई है। रिपोर्ट आने पर इस पर त्वरित कार्रवाई होगी।
मंगलवार को लेखपालों की हड़ताल भी समाप्त हो गयी। लेकिन बृहस्पतिवार तक रिपोर्ट एडीएम कार्यालय नहीं पहुंची। सूत्राें की मानें तो प्रशासन पर बहुत बड़ा दबाव इस मामले को लेकर बना हुआ है। जिससे अधिकारी खुद परेशान है। ऐसे में अब इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन समझ नहीं रहा है कि क्या कार्रवाई की जाए। यही कारण है कि रिपोर्ट तैयार होने में ही देरी हो रही है।
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वहीं, दूसरी तरफ लगातार इस मामले में प्रशासनिक और नगर निगम की लापरवाही लगातार सामने आ रही है। इस मामले में एक नया साक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिसमें वर्ष 2014 में तहसील सदर के तहसीलदार न्यायिक ने जांच रिपोर्ट जारी की थी और इस रिपोर्ट में उन्होंने मेनका सहित कुल 12940 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जा होने की बात कही थी। लेकिन यह रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में पड़ी रही। यही नहीं, नगर निगम के नलकूप विभाग के एक अधिकारी ने भी अवैध कब्जा होने की रिपोर्ट दी थी। लेकिन प्रशासन इन सभी पत्रों को दबाकर बैठा रहा।
खास बातें:
मेनका हॉल प्रकरण
- मंगलवार को हो गई थी लेखपालों की हड़ताल खत्म, बृहस्पतिवार तक नहीं तैयार हो सकी रिपोर्ट
- तमाम पुराने पत्र और जांच दे रही जमीन सरकारी होने की गवाही, अब ठंडे बस्ते में जा रही जांच
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मेनका मामले में शुरूआती कार्रवाई बड़ी तेजी से हुई। लेकिन जैसे ही इसमें कुछ नामचीन ग्रुप और लोगों के नाम जुड़ने शुरू हुए तो प्रशासन बैकफुट पर आता नजर आने लगा। शुरूआती कार्रवाई में नगर निगम ने जहां मेनका सिनेमा को तोड़ने के लिए दी गयी एनओसी को निरस्त कर दिया, तो एमडीए ने इस तोड़े गए भवन पर सील लगा दी। लेकिन इससे आगे की कार्रवाई पर जिला प्रशासन की तरफ से एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ने कहा कि लेखपालों की हड़ताल के कारण रिपोर्ट रुकी हुई है। रिपोर्ट आने पर इस पर त्वरित कार्रवाई होगी।
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मंगलवार को लेखपालों की हड़ताल भी समाप्त हो गयी। लेकिन बृहस्पतिवार तक रिपोर्ट एडीएम कार्यालय नहीं पहुंची। सूत्राें की मानें तो प्रशासन पर बहुत बड़ा दबाव इस मामले को लेकर बना हुआ है। जिससे अधिकारी खुद परेशान है। ऐसे में अब इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन समझ नहीं रहा है कि क्या कार्रवाई की जाए। यही कारण है कि रिपोर्ट तैयार होने में ही देरी हो रही है।
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वहीं, दूसरी तरफ लगातार इस मामले में प्रशासनिक और नगर निगम की लापरवाही लगातार सामने आ रही है। इस मामले में एक नया साक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिसमें वर्ष 2014 में तहसील सदर के तहसीलदार न्यायिक ने जांच रिपोर्ट जारी की थी और इस रिपोर्ट में उन्होंने मेनका सहित कुल 12940 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जा होने की बात कही थी। लेकिन यह रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में पड़ी रही। यही नहीं, नगर निगम के नलकूप विभाग के एक अधिकारी ने भी अवैध कब्जा होने की रिपोर्ट दी थी। लेकिन प्रशासन इन सभी पत्रों को दबाकर बैठा रहा।
खास बातें:
मेनका हॉल प्रकरण
- मंगलवार को हो गई थी लेखपालों की हड़ताल खत्म, बृहस्पतिवार तक नहीं तैयार हो सकी रिपोर्ट
- तमाम पुराने पत्र और जांच दे रही जमीन सरकारी होने की गवाही, अब ठंडे बस्ते में जा रही जांच