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भारत में योग को गलत तरीके से परिभाषित किया- कारी शफीकुर्रहमान
Updated Wed, 15 Nov 2017 02:22 AM IST
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मेरठ। इस्लामिक देश सऊदी अरब ने योग को खेलों में शामिल कर बड़ा कदम उठाया है। इसी देश से इस्लाम दुनिया में फैला है। सऊदी अरब के इस कदम के बाद मामले में उलमाओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
देवबंद दारूल उलूम के मुबल्लिग मौलाना यामीन कासमी ने योग को कसरत के तौर पर सही बताया। उन्होंने कहा इंसान को शरीर स्वस्थ रखने के लिए किसी क्रिया से ऐतराज नहीं होना चाहिए। मुस्लिमों ने कभी योग का विरोध नहीं किया। उनका मानना है सऊदी अरब ने हमारे देश में होने वाली ऐसी क्रियाओं को कतई जगह नहीं दी होगी जिस पर मुस्लिम धर्म के लोगों या उलमाओं को ऐतराज हो। हमारे देश के अधिकतर स्कूलों में योग सिखाया जाने लगा है। यदि सऊदी अरब में योग की गलत क्रियाओं को भी मान्यता मिली है तो उससे अन्य मुस्लिम देशों का कोई लेना देना नहीं होगा। हम सऊदी अरब को आइडल नहीं मानते। मुस्लिम कुरआन और हदीस पर चलते हैं। शहरकाजी जैनुस साजिद्दीन के अनुसार योग से हमारे देश के मुस्लिमों को भी कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत है तो उन गलत क्रियाओं से जो इस्लाम में गलत बताई है। योग से हमारे शरीर को फायदा होता है। सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देश में यदि योग को मान्यता दी जाती है। तो मुस्लिमों को नहीं उन लोगों को सोचने की जरूरत है जो योग को दूसरे लोगों पर जबरन थोपने का काम कर रहे हैं। कारी शफीकुर्रहमान ने बताया भारत के अंदर योग का गलत तरीके से प्रचार किया गया। इस देश में योग का राजनीतिकरण किया गया है। इस कारण मुस्लिम वर्ग ने योग से दूरी बना ली। उन्होंने कहा योग सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखने की एक क्रिया है। योग को धर्म से जोड़ना गलत है। धर्म से जोड़कर ऐसी क्रियाएं नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी एक धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचे। सऊदी अरब जैसे देश में योग को मान्यता देना, योग को धर्म से जोड़कर देखने वालों के लिए बड़ा संदेश है।
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देवबंद दारूल उलूम के मुबल्लिग मौलाना यामीन कासमी ने योग को कसरत के तौर पर सही बताया। उन्होंने कहा इंसान को शरीर स्वस्थ रखने के लिए किसी क्रिया से ऐतराज नहीं होना चाहिए। मुस्लिमों ने कभी योग का विरोध नहीं किया। उनका मानना है सऊदी अरब ने हमारे देश में होने वाली ऐसी क्रियाओं को कतई जगह नहीं दी होगी जिस पर मुस्लिम धर्म के लोगों या उलमाओं को ऐतराज हो। हमारे देश के अधिकतर स्कूलों में योग सिखाया जाने लगा है। यदि सऊदी अरब में योग की गलत क्रियाओं को भी मान्यता मिली है तो उससे अन्य मुस्लिम देशों का कोई लेना देना नहीं होगा। हम सऊदी अरब को आइडल नहीं मानते। मुस्लिम कुरआन और हदीस पर चलते हैं। शहरकाजी जैनुस साजिद्दीन के अनुसार योग से हमारे देश के मुस्लिमों को भी कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत है तो उन गलत क्रियाओं से जो इस्लाम में गलत बताई है। योग से हमारे शरीर को फायदा होता है। सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देश में यदि योग को मान्यता दी जाती है। तो मुस्लिमों को नहीं उन लोगों को सोचने की जरूरत है जो योग को दूसरे लोगों पर जबरन थोपने का काम कर रहे हैं। कारी शफीकुर्रहमान ने बताया भारत के अंदर योग का गलत तरीके से प्रचार किया गया। इस देश में योग का राजनीतिकरण किया गया है। इस कारण मुस्लिम वर्ग ने योग से दूरी बना ली। उन्होंने कहा योग सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखने की एक क्रिया है। योग को धर्म से जोड़ना गलत है। धर्म से जोड़कर ऐसी क्रियाएं नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी एक धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचे। सऊदी अरब जैसे देश में योग को मान्यता देना, योग को धर्म से जोड़कर देखने वालों के लिए बड़ा संदेश है।
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